आरबीआई बुलेटिन: पश्चिम एशिया तनाव के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रहा सहारा, कौन से सेक्टर हो रहे मजबूत?
आरबीआई बुलेटिन के अनुसार, मजबूत जीडीपी और रिकॉर्ड 765.9 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार से भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। जानिए क्रूड ऑयल, एफडीआई, शेयर बाजार और महंगाई पर पूरी विश्लेषण रिपोर्ट। अभी पढ़ें।
विस्तार
वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का आंतरिक ढांचा अपनी मजबूती बनाए हुए है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीअई) द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' लेख के अनुसार, मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के बल पर देश के वित्तीय और बाहरी सेक्टर लगातार मजबूती हासिल कर रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (पहली तिमाही) में भारत ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद मजबूत जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि, सितंबर में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से कच्चे तेल के दाम चढ़ने, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आने और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव फिर से बढ़ने की आशंका जताई गई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को कहां से मिल रही है मजबूती और क्या हैं जोखिम?
आरबीआई बुलेटिन में यह स्पष्ट किया गया है कि देश के वित्तीय और बाहरी क्षेत्र वास्तविक अर्थव्यवस्था की बुनियाद से संबल पा रहे हैं। पहली तिमाही में मजबूत जीडीपी विकास दर दर्ज होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताएं आर्थिक परिदृश्य के लिए प्रमुख जोखिम बनी हुई हैं।
अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियां:
- कच्चे तेल में तेजी: सितंबर में पश्चिम एशिया संघर्ष के फिर से भड़कने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान और मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं।
- बॉन्ड यील्ड का दबाव: प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में सॉवरेन बॉन्ड यील्ड बढ़ने से वहां की सरकारी वित्त व्यवस्था पर दबाव पड़ा है।
- मौसम की अनिश्चितता: मौसम संबंधी अनिश्चितताएं और खाद्य जिंसों की दरों में उतार-चढ़ाव निकट अवधि के लिए जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं।
बैंकिंग, लिक्विडिटी और क्रेडिट ग्रोथ की क्या है वर्तमान स्थिति?
घरेलू वित्तीय प्रणाली में बैंकिंग गतिविधियां और लिक्विडिटी की स्थिति काफी संतोषजनक बनी हुई है।
- लिक्विडिटी में उछाल: अगस्त महीने में बैंकिंग सिस्टम लिक्विडिटी सरप्लस में रही और सितंबर के पहले पखवाड़े में इसमें और तेजी आई, क्योंकि बैंकों ने आरबीआई की एफसीएनआर (बी) स्वैप सुविधा का उपयोग किया। हालांकि, सितंबर के उत्तरार्ध में टैक्स भुगतानों के कारण इसमें कुछ कमी दर्ज की गई।
- डिपॉजिट व क्रेडिट ग्रोथ: कुल जमा में तेजी से वृद्धि के कारण अगस्त में मनी सप्लाई ग्रोथ में तेजी आई। क्रेडिट ग्रोथ ने अपनी गति बनाए रखी, जबकि जमा वृद्धि में सुधार दर्ज किया गया।
विदेश व्यापार, एफडीआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं?
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का बाहरी क्षेत्र कई मोर्चों पर रिकॉर्ड मजबूती प्रदर्शित कर रहा है।
- करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी): सेवाओं के मजबूत निर्यात और विदेशी प्रेषण के सहारे पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा सीमित और नियंत्रित रहा।
- एफडीआई और विदेशी मुद्रा भंडार: जुलाई में एफडीआई प्रवाह मजबूत रहा और शुद्ध एफडीआई पांच वर्षों के उच्चतम मासिक स्तर पर पहुंच गया। गैर-निवासी जमा में भी भारी बढ़त दर्ज की गई। जून में घोषित पूंजी प्रवाह उपायों के समर्थन से 18 सितंबर 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 765.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
शेयर बाजार, एफपीआई और महंगाई के मोर्चे पर क्या चुनौतियां हैं?
दूसरी ओर, पूंजी बाजार और खाद्य कीमतों के मोर्चे पर सतर्कता बरतने की आवश्यकता जताई गई है।
- इक्विटी बाजार और एफपीआई: भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची बॉन्ड यील्ड के चलते अगस्त और सितंबर में भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती रही। अगस्त में निवेश के बाद सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से शुद्ध निकासी दर्ज की गई।
- खाद्य महंगाई का दबाव: 21 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों की कीमतों में क्रमिक बढ़ोतरी देखी गई है। चावल और गेहूं के दाम में वृद्धि जारी है, हालांकि चावल की मासिक दर में नरमी आई है। चना, तुअर और मूंग जैसी दालों तथा सरसों व पाम ऑयल के नेतृत्व में खाद्य तेलों के दाम चढ़े हैं। सब्जियों में प्याज की कीमत में तेज उछाल आया और टमाटर के दाम मामूली चढ़े, जबकि आलू के दाम में गिरावट आई है।
आरबीआई बुलेटिन का यह विश्लेषण दर्शाता है कि मजबूत जीडीपी, रिकॉर्ड 765.9 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित कैड के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहने में सक्षम है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल में तेजी और खाद्य महंगाई जैसे जोखिमों पर आने वाले समय में करीब से नजर रखनी होगी। आरबीआई ने साफ किया है कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं और अनिवार्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं)।