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चक्रव्यूह से निकला ‘अभिमन्यु, चक्कर में पुलिस
Lakhimpur
Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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परिजनों का दावा, चार लाख देकर छुड़ाया, सीडीआर रिपोर्ट झुठला रही कहानी
अपहरण की बात को झूठा बता रही जीआरपी
लखीमपुर खीरी। दादी के घर जाते वक्त ट्रेन से अगवा किए गया अभिमन्यु बदमाशों के चक्रव्यूह से निकल आया। परिजनों ने दावा किया है कि उन्होंने अपहरणकर्ताओं को चार लाख रुपये की फिरौती देकर छुड़ाया है, जबकि जीआरपी अभिमन्यु के अपहरण तथा उसकी कहानी को पूरी तरह गलत बता रही है।
शहर के मोहल्ला नौरंगाबाद निवासी राजेश ने दो दिन पहले कोतवाली पुलिस व जीआरपी को बताया था कि छ: जून को उनका पुत्र अभिमन्यु लखीमपुर से फरधान थाना क्षेत्र के ग्राम धौरहरा निवासी अपनी दादी के घर जाने के लिए सुबह आठ बजे ट्रेन से फरधान के लिए रवाना हुआ था, रास्ते से ही कुछ लोगों ने फिरौती के लिए उसका अपहरण कर लिया था। बाद में उसी दिन अपहरण कर्ताओं ने फोन कर उनसे पांच लाख रुपये फिरौती की मांग की थी। परिजनों की सूचना पर जीआरपी ने शुक्रवार को इस मामले में गुमशुदगी दर्ज कर ली थी, लेकिन अपहृत किशोर का सुराग लगाने में असफल रही थी। बाद में अभिमन्यु का फोन ऑफ हो जाने के कारण परिजन खासे परेशान भी थे। अभिमन्यु के पिता राजेश ने बताया कि शुक्रवार की रात वह अपहरणकर्ताओं के बताए मुताबिक अपने कुछ अन्य परिजनों के साथ चार लाख रुपये एक बैग में भरकर ले गया। गोला रेलवे क्रासिंग के थोड़ा पहले ही सभी को रोक कर अपहरणकर्ताओं द्वारा बताए गए ठिकाने (सड़क से अंदर जंगल की ओर तीन किमी दूर) के लिए अकेले ही बैग में पैसा लेकर चल दिया। राजेश के मुताबिक उसे जंगल के थोड़ा भीतर जाते ही एक व्यक्ति ने पीछे से रुकने की आवाज लगाई तथा रुकने पर करीब पहुंच कर संबंधित व्यक्ति ने उसका नाम, पता पूछने के बाद अंदर उस स्थान पर ले गया जहां उसके अन्य साथी मौजूद थे। राजेश के मुताबिक वहां करीब 14 लोग उसे मिले। उन लोगों ने पैसे गिनने के बाद उससे कहा कि वह जाए उसका लड़का पहुंच जाएगा। थोड़ी दूर ही वह चला था कि उसे रोक लिया गया तथा 15 मिनट के भीतर ही उसका लाडला उसके पास पहुंचा दिया गया। जिसे लेकर वह देर रात घर पहुंचा तो परिजनों की जान में जान आई। राजेश ने इसकी सूचना जीआरपी को दी।
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जीआरपी, अपहरण को बता रही नाटक
अभिमन्यु के घर लौटने पर प्रभारी एसओ जीआरपी चंद्र प्रकाश शुक्ला ने राजेश व अभिमन्यु को थाने बुलाकर दोनों से घंटों पूछताछ की। श्री शुक्ला ने बताया कि पूछताछ में अभिमन्यु बार-बार अपनी बात बदल रहा है। उसके पिता की माली हालत भी इतनी बेहतर नहीं कि कोई फिरौती के लिए उसका अपहरण करेगा। इसके अलावा अभिमन्यु के पास मौजूद मोबाइल की लोकेशन भी छ: जून को शहर में ही बता रही है। जबकि अभिमन्यु का कहना है कि अपहरणकर्ता उसे गोला ले गए थे। छ: जून के बाद की सीडीआर अभी नहीं मिल सकी है। वह भी निकलवाई जा रही है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। प्रभारी एसओ ने यह भी दावा किया कि कड़ाई से की गई पूछताछ में अभिमन्यु ने परिजनों को परेशान करने की नीयत से यह कहानी बनाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसके आधार पर ही आगे कार्रवाई की जाएगी।
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अपहरण की बात को झूठा बता रही जीआरपी
लखीमपुर खीरी। दादी के घर जाते वक्त ट्रेन से अगवा किए गया अभिमन्यु बदमाशों के चक्रव्यूह से निकल आया। परिजनों ने दावा किया है कि उन्होंने अपहरणकर्ताओं को चार लाख रुपये की फिरौती देकर छुड़ाया है, जबकि जीआरपी अभिमन्यु के अपहरण तथा उसकी कहानी को पूरी तरह गलत बता रही है।
शहर के मोहल्ला नौरंगाबाद निवासी राजेश ने दो दिन पहले कोतवाली पुलिस व जीआरपी को बताया था कि छ: जून को उनका पुत्र अभिमन्यु लखीमपुर से फरधान थाना क्षेत्र के ग्राम धौरहरा निवासी अपनी दादी के घर जाने के लिए सुबह आठ बजे ट्रेन से फरधान के लिए रवाना हुआ था, रास्ते से ही कुछ लोगों ने फिरौती के लिए उसका अपहरण कर लिया था। बाद में उसी दिन अपहरण कर्ताओं ने फोन कर उनसे पांच लाख रुपये फिरौती की मांग की थी। परिजनों की सूचना पर जीआरपी ने शुक्रवार को इस मामले में गुमशुदगी दर्ज कर ली थी, लेकिन अपहृत किशोर का सुराग लगाने में असफल रही थी। बाद में अभिमन्यु का फोन ऑफ हो जाने के कारण परिजन खासे परेशान भी थे। अभिमन्यु के पिता राजेश ने बताया कि शुक्रवार की रात वह अपहरणकर्ताओं के बताए मुताबिक अपने कुछ अन्य परिजनों के साथ चार लाख रुपये एक बैग में भरकर ले गया। गोला रेलवे क्रासिंग के थोड़ा पहले ही सभी को रोक कर अपहरणकर्ताओं द्वारा बताए गए ठिकाने (सड़क से अंदर जंगल की ओर तीन किमी दूर) के लिए अकेले ही बैग में पैसा लेकर चल दिया। राजेश के मुताबिक उसे जंगल के थोड़ा भीतर जाते ही एक व्यक्ति ने पीछे से रुकने की आवाज लगाई तथा रुकने पर करीब पहुंच कर संबंधित व्यक्ति ने उसका नाम, पता पूछने के बाद अंदर उस स्थान पर ले गया जहां उसके अन्य साथी मौजूद थे। राजेश के मुताबिक वहां करीब 14 लोग उसे मिले। उन लोगों ने पैसे गिनने के बाद उससे कहा कि वह जाए उसका लड़का पहुंच जाएगा। थोड़ी दूर ही वह चला था कि उसे रोक लिया गया तथा 15 मिनट के भीतर ही उसका लाडला उसके पास पहुंचा दिया गया। जिसे लेकर वह देर रात घर पहुंचा तो परिजनों की जान में जान आई। राजेश ने इसकी सूचना जीआरपी को दी।
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जीआरपी, अपहरण को बता रही नाटक
अभिमन्यु के घर लौटने पर प्रभारी एसओ जीआरपी चंद्र प्रकाश शुक्ला ने राजेश व अभिमन्यु को थाने बुलाकर दोनों से घंटों पूछताछ की। श्री शुक्ला ने बताया कि पूछताछ में अभिमन्यु बार-बार अपनी बात बदल रहा है। उसके पिता की माली हालत भी इतनी बेहतर नहीं कि कोई फिरौती के लिए उसका अपहरण करेगा। इसके अलावा अभिमन्यु के पास मौजूद मोबाइल की लोकेशन भी छ: जून को शहर में ही बता रही है। जबकि अभिमन्यु का कहना है कि अपहरणकर्ता उसे गोला ले गए थे। छ: जून के बाद की सीडीआर अभी नहीं मिल सकी है। वह भी निकलवाई जा रही है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। प्रभारी एसओ ने यह भी दावा किया कि कड़ाई से की गई पूछताछ में अभिमन्यु ने परिजनों को परेशान करने की नीयत से यह कहानी बनाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसके आधार पर ही आगे कार्रवाई की जाएगी।
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