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आपदा में अतिगंभीर पीड़ित को पहचानना है आवश्यक
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आपदा में अतिगंभीर पीड़ित को पहचानना है आवश्यक
आपदा पीड़ितों को बचाने के लिए किया गया जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जिला ग्राम्य विकास संस्थान में आपदा प्रबंधन में चिकित्सा विभाग की भूमिका को लेकर एक कार्यशाला हुई, जिसमें आपदा के दौरान अतिगंभीर पीड़ित की पहचान कर उसे प्राथमिक उपचार मुहैया कराने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसीएमओ डॉ.रवींद्र शर्मा ने कहा कि आपदा चाहें जिस प्रकार की हो, उसके शुरूआती कुछ घंटे ही अतिसंवेदनशील होते है, क्योंकि आपदा में बचे लोग एवं उसके आसपास रह रहे लोगों को ही चिकित्सीय एवं पुलिस सुविधा पहुंचने तक घायल एवं पीड़ितों की सहायता करनी होती है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि दुर्घटनाग्रस्त एवं प्रभावितों में अति गंभीर कौन है और उसे बचाने के लिए कौन सी जीवन रक्षक क्रियाएं हैं, उन्हें अपनाकर पीड़ित की जान बचाई जा सके। एसीएमओ ने भूकंप, आग, बाढ़, तूफान से बचाव एवं पीड़ितों के उपचार के बारे में आवश्यक जानकारी दी। कार्यशाला में ग्राम विकास अधिकारी एवं सहायक ग्राम विकास अधिकारी मौजूद रहे।
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आपदा पीड़ितों को बचाने के लिए किया गया जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जिला ग्राम्य विकास संस्थान में आपदा प्रबंधन में चिकित्सा विभाग की भूमिका को लेकर एक कार्यशाला हुई, जिसमें आपदा के दौरान अतिगंभीर पीड़ित की पहचान कर उसे प्राथमिक उपचार मुहैया कराने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसीएमओ डॉ.रवींद्र शर्मा ने कहा कि आपदा चाहें जिस प्रकार की हो, उसके शुरूआती कुछ घंटे ही अतिसंवेदनशील होते है, क्योंकि आपदा में बचे लोग एवं उसके आसपास रह रहे लोगों को ही चिकित्सीय एवं पुलिस सुविधा पहुंचने तक घायल एवं पीड़ितों की सहायता करनी होती है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि दुर्घटनाग्रस्त एवं प्रभावितों में अति गंभीर कौन है और उसे बचाने के लिए कौन सी जीवन रक्षक क्रियाएं हैं, उन्हें अपनाकर पीड़ित की जान बचाई जा सके। एसीएमओ ने भूकंप, आग, बाढ़, तूफान से बचाव एवं पीड़ितों के उपचार के बारे में आवश्यक जानकारी दी। कार्यशाला में ग्राम विकास अधिकारी एवं सहायक ग्राम विकास अधिकारी मौजूद रहे।
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