कमलेश की मौत की सूचना मिलते ही मचा कोहराम
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सुम्हाखोर निवासी 58 वर्षीय कमलेश एक सप्ताह पूर्व थाने में पिस्टल साफ करते दौरान गोली लग जाने से घायल हो गए थे। उन्हें मेडिकल कॉलेज से पीजीआई लखनऊ रेफर किया गया था। उपचार के दौरान बुधवार को भोर में उनकी मौत हो गई। गांव के लोगों ने बताया कि रामजीवन सिंह के चार पुत्रों में कमलेश सिंह सबसे बड़े थे। बहन की शादी पहले काफी पहले हो गई थी।
दूसरे नंबर के भाई वीरेंद्र, तीसरे दिनेश और चौथे गोरख हैं। सभी भाई दस वर्षों से अलग-अलग रहते हैं। 84 वर्षीय बूढ़ी मां बइला देवी गांव में रहती हैं। उनके पिता की मृत्यु 10 वर्ष पूर्व हो गई थी। 20 वर्षों से कमलेश सिंह का परिवार गोरखपुर में रहता है। परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती देवी, चार पुत्रियां व एक पुत्र है। सबसे बड़ी पुत्री उषा और रिंकी की शादी हो चुकी है।
25 वर्षीय पुत्र राम सिंह शादीशुदा हैं और दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर हैं। जबकि 22 वर्षीय करिश्मा सिंह और 20 वर्षीय काजल सिंह की अभी शादी नहीं हुई है। बेटी करिश्मा निजी बैंक में काम करती है। जबकि बेटी काजल लेखपाल है। गांव के पूर्व प्रधान और दरोगा के मित्र विजय बहादुर सिंह ने बताया कि नौकरी के दौरान हर समय गांव की समस्या को दूर करने में कमलेश सिंह मदद करते थे। लोगों के सुख-दु:ख में उनकी सहभागिता थी। उनकी मौत से गांव के लोग गमगीन है।
उनके घर के बगल के रहने वाले वकील सिंह, रामजनम, रामानंद, श्रीभागवत सिंह, ध्रुव सिंह ने बताया कि गांव उनका आना जाना बहुत कम था, जब भी आते थे तो सबका हालचाल पूछते थे और लड़की-लड़के की शादी में पूरे गांव के लोगों को बुलाते थे। मृदुभाषी होने की वजह से सभी के चहेते थे।