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पुलिस भर्ती: साॅल्वर गैंग का सरगना फरार, सिर्फ मोहरे हुए गिरफ्तार
Sat, 17 Feb 2024 04:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 17 Feb 2024 04:03 AM IST
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पुलिस भर्ती परीक्षा में नकल कराने आए साल्वर गैंग के गिरफ्तार आरोपी। स्रोत:पुलिस मीडिया सेल
पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली कराने की फिराक में बृहस्पतिवार को पकड़े गए तीन आरोपियों के खिलाफ सदर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर शुक्रवार को चालान कर दिया।
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया वह सिर्फ गिरोह के मोहरे हैं। असल सरगना लखनऊ का रहने वाला है। मुकदमे में भले ही उसे नामजद नहीं किया गया, लेकिन फर्द के मजमून में इसका जिक्र है। आरोपियों की कुबूलदारी के बाद सरगना की तलाश में पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) व साइबर थाने की टीम ने बृहस्पतिवार रात ओसा चौराहे के समीप से कार सवार आयुष पांडेय निवासी बभनपुरा थाना रानीगंज जनपद मऊ, पुनीत सिंह निवासी जोगी नाका थाना गोपीगंज जनपद भदोही व नवीन सिंह निवासी हरपुर पोस्ट बगली पिजरा सरायखंसी जनपद मऊ को गिरफ्तार किया था।
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पकड़े गए सभी लोगों का एक गैंग है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लिया करता है। गैंग का सरगना लखनऊ में रहता है। पकड़े गए सभी लोग मोहरे मात्र हैं। पुलिस की छानबीन में पता चला कि आयुष कोचिंग संस्थान में पढ़ाता था जबकि, पुनीत व नवीन कोचिंग संचालकों से संपर्क में रहकर अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर धन उगाही करते थे। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चालान न्यायालय भेजा गया। कोर्ट ने सभी को जेल भेजने का निर्देश दिया है।
सरगना का नाम मुकदमे में कुछ गोपनीयता के तहत नहीं खोला गया है। आरोपियों के बयान पर वह भी नामजद होगा। सरगना की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें रवाना की गई हैं। कई जनपदों में छापामारी कराई जा रही है।
बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी
के ग्रुप की चैट से खुलेंगे अहम राज
पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन में एक के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना मिला। इस ग्रुप में चैटिंग करने वाले अभ्यर्थी जुड़े हैं। इसी ग्रुप के जरिये पेपर आउट किया जाता था। साॅल्वर पेपर को हल करने के बाद ग्रुप के जरिये ही अभ्यर्थी तक पहुंचाते थे। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है।
खंगाले जा रहे आरोपियों के बैंक खाते
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में पता चला कि आरोपियों के बैंक खाते में भी पैसों का लेनदेन हुआ है। कुछ पैसा नकद व कुछ चेक के जरिये ट्रांसफर हुआ है। यह पैसा किसने भेजा व मकसद क्या था? इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के मुताबिक तो रुपयों का लेनदेन करने वालों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
फर्जी दीवान निकला आरोपी पुनीत
साॅल्वर गैंग के सदस्य पुनीत के पास से पुलिस को एक आईडी कार्ड मिला। यह कार्ड कथित तौर पर आईजी प्रयागराज की तरफ से जारी हुआ था। जिसमें उसके पदनाम के आगे एचसीपी (दीवान) लिखा था। जांच में वह फर्जी दीवान निकला।
कहीं राहुल प्रकरण से तो नहीं जुड़ा था रैकेट
सैनी कोतवाली के कूरा निवासी राहुल कुमार प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था। काफी दिन पहले उसकी मुलाकात अवनीश कुमार पांडेय से हुई थी। अवनीश खुद को इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्रोफेसर बताकर झांसा देता था। वह कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर राहुल से 2.05 लाख रुपये झटक चुका है। सप्ताह भर पहले ठगी की शिकायत होने पर प्रयागराज के सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस ने उसे पकड़ा भी था।
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पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया वह सिर्फ गिरोह के मोहरे हैं। असल सरगना लखनऊ का रहने वाला है। मुकदमे में भले ही उसे नामजद नहीं किया गया, लेकिन फर्द के मजमून में इसका जिक्र है। आरोपियों की कुबूलदारी के बाद सरगना की तलाश में पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
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स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) व साइबर थाने की टीम ने बृहस्पतिवार रात ओसा चौराहे के समीप से कार सवार आयुष पांडेय निवासी बभनपुरा थाना रानीगंज जनपद मऊ, पुनीत सिंह निवासी जोगी नाका थाना गोपीगंज जनपद भदोही व नवीन सिंह निवासी हरपुर पोस्ट बगली पिजरा सरायखंसी जनपद मऊ को गिरफ्तार किया था।
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पकड़े गए सभी लोगों का एक गैंग है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लिया करता है। गैंग का सरगना लखनऊ में रहता है। पकड़े गए सभी लोग मोहरे मात्र हैं। पुलिस की छानबीन में पता चला कि आयुष कोचिंग संस्थान में पढ़ाता था जबकि, पुनीत व नवीन कोचिंग संचालकों से संपर्क में रहकर अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर धन उगाही करते थे। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चालान न्यायालय भेजा गया। कोर्ट ने सभी को जेल भेजने का निर्देश दिया है।
सरगना का नाम मुकदमे में कुछ गोपनीयता के तहत नहीं खोला गया है। आरोपियों के बयान पर वह भी नामजद होगा। सरगना की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें रवाना की गई हैं। कई जनपदों में छापामारी कराई जा रही है।
बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी
के ग्रुप की चैट से खुलेंगे अहम राज
पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन में एक के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना मिला। इस ग्रुप में चैटिंग करने वाले अभ्यर्थी जुड़े हैं। इसी ग्रुप के जरिये पेपर आउट किया जाता था। साॅल्वर पेपर को हल करने के बाद ग्रुप के जरिये ही अभ्यर्थी तक पहुंचाते थे। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है।
खंगाले जा रहे आरोपियों के बैंक खाते
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में पता चला कि आरोपियों के बैंक खाते में भी पैसों का लेनदेन हुआ है। कुछ पैसा नकद व कुछ चेक के जरिये ट्रांसफर हुआ है। यह पैसा किसने भेजा व मकसद क्या था? इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के मुताबिक तो रुपयों का लेनदेन करने वालों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
फर्जी दीवान निकला आरोपी पुनीत
साॅल्वर गैंग के सदस्य पुनीत के पास से पुलिस को एक आईडी कार्ड मिला। यह कार्ड कथित तौर पर आईजी प्रयागराज की तरफ से जारी हुआ था। जिसमें उसके पदनाम के आगे एचसीपी (दीवान) लिखा था। जांच में वह फर्जी दीवान निकला।
कहीं राहुल प्रकरण से तो नहीं जुड़ा था रैकेट
सैनी कोतवाली के कूरा निवासी राहुल कुमार प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था। काफी दिन पहले उसकी मुलाकात अवनीश कुमार पांडेय से हुई थी। अवनीश खुद को इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्रोफेसर बताकर झांसा देता था। वह कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर राहुल से 2.05 लाख रुपये झटक चुका है। सप्ताह भर पहले ठगी की शिकायत होने पर प्रयागराज के सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस ने उसे पकड़ा भी था।