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डेढ़ावल गांव में सात माह से विकास कार्य ठप
Sat, 15 Dec 2018 12:21 AM IST
shailendra Kumar
kaushambi
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Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 15 Dec 2018 12:21 AM IST
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मंझनपुर। सरसवां ब्लॉक के डेढ़ावल गांव का विकास सात महीने से ठप है। गबन के आरोपी ग्राम प्रधान के निलंबन के बाद गठित दोनों समिति के सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। इसके चलते गांव में समस्याओं का अंबार लग गया है। साथ ही ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
डेढ़ावल के ग्राम प्रधान गजानन सिंह पर हैंडपंप की रिबोरिंग व मरम्मत में 39,420 तथा सोलर लाइट में 24,620 रसमेत 64,070 रुपये का गबन कर कर लिया था। जांच के बाद आरोप की पुष्टि होने पर डीएम के निर्देंश पर तत्कालीन डीपीआरओ ने ग्राम प्रधान को मई 2018 में निलंबित कर दिया था। इसके बाद गांव में तीन सदस्यीय समिति का गठन कर विकास कार्य कराने का प्रयास हुआ। पर, समिति के सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। दूसरी मर्तबा फिर समिति का गठन हुआ। इस बार भी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। सदस्यों ने अपने इस्तीफे का तर्क दिया कि अनपढ़ होने की वजह से उन्हें डर लग रहा है। पर, सूत्रों की मानें तो कारण कुछ और है।
इसे लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चा है। बहरहाल जो भी हो इन हालात में समूचे गांव का विकास कार्य सात महीने से ठप है। गांव में जलनिकासी व साफ-सफाई भी नहीं हो पा रही है। चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं सरकार की अति महात्वकांक्षी योजना शौचलय, आवास आदि के लाभ से ग्रामीणों को वंचित होना पड़ रहा है। मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने बताया कि जल्द ही गांव में नई सदस्यीय समिति का गठन कर विकास कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
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डेढ़ावल के ग्राम प्रधान गजानन सिंह पर हैंडपंप की रिबोरिंग व मरम्मत में 39,420 तथा सोलर लाइट में 24,620 रसमेत 64,070 रुपये का गबन कर कर लिया था। जांच के बाद आरोप की पुष्टि होने पर डीएम के निर्देंश पर तत्कालीन डीपीआरओ ने ग्राम प्रधान को मई 2018 में निलंबित कर दिया था। इसके बाद गांव में तीन सदस्यीय समिति का गठन कर विकास कार्य कराने का प्रयास हुआ। पर, समिति के सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। दूसरी मर्तबा फिर समिति का गठन हुआ। इस बार भी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। सदस्यों ने अपने इस्तीफे का तर्क दिया कि अनपढ़ होने की वजह से उन्हें डर लग रहा है। पर, सूत्रों की मानें तो कारण कुछ और है।
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इसे लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चा है। बहरहाल जो भी हो इन हालात में समूचे गांव का विकास कार्य सात महीने से ठप है। गांव में जलनिकासी व साफ-सफाई भी नहीं हो पा रही है। चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं सरकार की अति महात्वकांक्षी योजना शौचलय, आवास आदि के लाभ से ग्रामीणों को वंचित होना पड़ रहा है। मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने बताया कि जल्द ही गांव में नई सदस्यीय समिति का गठन कर विकास कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
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