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Kanpur: खतरनाक बैक्टीरिया में ही खोजेंगे छुटकारे का नुस्खा, GSVM और आईआईटी के विशेषज्ञों ने मिलाया हाथ

Thu, 23 Jan 2025 10:34 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 23 Jan 2025 10:34 AM IST
सार

Kanpur News: डॉ. संजय काला ने बताया कि इस्केप पैथोजंस की वजह से अस्पतालों के आईसीयू और वार्ड में संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। इससे रोगियों को शारीरिक और आर्थिक नुकसान होता है।

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We will find the solution to the problem in dangerous bacteria itself experts from GSVM and IIT joined hands
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोगों के लिए खतरा बने छह बैक्टीरिया के समूह इस्केप से छुटकारे का नुस्खा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और आईआईटी के विशेषज्ञ मिलकर खोजेंगे। इसके लिए दोनों संस्थानों ने हाथ मिलाया है। बैक्टीरिया समूह का अध्ययन करके उन जीन को खोजा जाएगा, जिनके कारण दवाएं बेअसर हो जाती हैं। जीन का पता करने के बाद उन्हें बेअसर करने के लिए दवा के क्षेत्र में कार्य किया जाएगा।

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अभी इस्केप समूह पर बाजार में उपलब्ध एंटी बॉयोटिक दवाओं का असर होना लगभग बंद हो गया है। यह दवा रोधी समस्या लोगों के अंधाधुंध एंटी बॉयोटिक के इस्तेमाल से पैदा हुई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इस्केप पैथोजंस की वजह से अस्पतालों के आईसीयू और वार्ड में संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। इससे रोगियों को शारीरिक और आर्थिक नुकसान होता है।

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शोध कार्य के अनुबंध को लेकर भी चर्चा
इस समस्या का हल निकालने के लिए ही मेडिकल कॉलेज और आईआईटी मिलकर काम करेंगे। इस संबंध में एक बैठक हो गई है। इस में शोध कार्य के अनुबंध को लेकर भी चर्चा हुई। इस प्रोजेक्ट में मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग और आईआईटी का बॉयोलॉजिकल साइंसेस एंड इंजीनियरिंग विभाग शामिल है। उन्होंने बताया कि इस्केप के इलाज के लिए विश्व स्तर पर अभी सटीक दवा उपलब्ध नहीं है। जो एंटी बयोटिक उपलब्ध हैं, वे बेअसर साबित होती हैं।

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दवा तैयार करने में होगी आसानी
इस कारण मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही बैक्टीरिया की दवा प्रतिरोधी शक्ति बढ़ रही है। डॉ. काला ने बताया कि दवा रोधी जीन की पहचान करने के बाद बैक्टीरिया खत्म करने की दवा तैयार करने में आसानी होगी। इस संबंध में तीन जनवरी को हुई बैठक में आईआईटी की विजिटिंग फैकल्टी डॉ. सरोज चूड़ामणि, प्रोफेसर अशोक कुमार, डॉ. मातेश्वरम सर्मानंद, डॉ.राकेश कुमार मांझी, डॉ. एकता तथा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. काला, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. विकास मिश्रा मौजूद रहे थे।

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समूह में हैं ये बैक्टीरिया
इस्केप बैक्टीरिया समूह में एंटरोकोकस फेसियम, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, क्लेबसिएला न्यूमोनिया, एसिनेटोबैक्टर बाउमानी, स्यूडोमोनस एरुगिनोसा और एंटरोबैक्टर एसपीपी हैं।

फेफड़ों के कैंसर पर भी करेंगे काम
आईआईटी मेडिकल कॉलेज के रेस्पेरेटरी मेडिसिन और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर फेफड़ों के कैंसर पर भी काम करेगा। इथिकल कमेटी की अनुमति के बाद इसे इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के शोध प्रस्ताव के रूप में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही दोनों संस्थान स्टेम सेल के विभिन्न आयामों पर शोध करेंगे।

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