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‘बोलो भगवन! अभिमन्यु लौटेगा कि नहीं...’
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 22 Jan 2016 02:05 AM IST
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दि फिल्म एंड थियेटर सोसाइटी की ओर से गुरुवार को सिविल लाइंस के रागेंद्र स्वरूप परमफार्मिंग सेंटर में ‘चक्रव्यूह’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें कलाकारों ने अभिमन्यु की वीरगति को इस अंदाज में दर्शाया मानो सभागार नहीं बल्कि वह रणभूमि हो।
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बेहतरीन अभिनय और भावपूर्ण संवादों से कलाकारों ने दर्शकों को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। नाटक मंचन में दिखाया गया कि महाभारत के युद्ध के तेरहवें दिन दुर्योधन के साथ युद्ध में सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु की वीरगति होती है।
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दुर्योधन-अभिमन्यु, युधिष्ठिर-पितामह संवाद, अर्जुन, सुभद्रा, उत्तरा, कर्ण, धर्मराज युधिष्ठिर का श्रीकृष्ण से संवाद और फिर श्रीकृष्ण के धर्मज्ञान के लिए बोले गए संवादों ने नाटक में जान भर दी। अभिमन्यु की वीरगति के बाद अर्जुन ने पुत्र की जानकारी युधिष्ठिर से मांगी तो संवादों से पूरा हॉल गमगीन हो गया।
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सुभद्रा बोलती हैं, ‘मां के पेट से सीखी शिक्षा आज वो पूर्ण होगी’ और उत्तरा के संवाद ‘बोलो भगवन! लौटेगा कि नहीं अभिमन्यु लौटेगा कि नहीं...’ से हॉल में सन्नाटा छा जाता है। उत्तरा के हाथों की चूड़ियां तोड़ने और श्रीकृष्ण से पेट में पल रही अभिमन्यु की संतान के लालन-पालन के बारे में जवाब मांगती हैं तो लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
तब श्रीकृष्ण उत्तरा को कलियुग की उन मांओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हैं, जो बिना पति के अपने बच्चों का लालन पालन करती हैं। अर्जुन के उत्तेजित होकर दुर्योधन का अंत करने के शपथ लेने पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि वीर अभिमन्यु तो कब का दुर्योधन को मार देता लेकिन उसे अपने चाचा भीम की शपथ को पूरा करना होता है।
पांचाली के दुख पर भी बोलते हैं कि महाभारत का युद्ध शपथ और प्रतिज्ञाओं पर हुआ। संदेश देते हैं कि प्रतिज्ञाओं पर जीवन जीना बंद करो। अगर ऐसा न होता तो वह अवतार लेकर गाय न चराते और न ही अर्जुन का रथ खींचते। पूरे नाटक में चक्रव्यूह को आम आदमी की जिंदगी के चक्रव्यूह से मिलाया गया।
श्रीकृष्ण की भूमिका नीतीश भारद्वाज, अर्जुन की भानु प्रताप सिंह, युधिष्ठिर की गौरव जाजू, अभिमन्यु की ललित भारद्वाज, द्रौपदी की निष्ठा पालीवाल, उत्तरा की दीप्ति ग्रोवर, शकुनी की विवेक शर्मा, पितामह की सचिन जोशी, सुभद्रा की लतिका जैन, अभिमन्यु का सारथी फारूख खान ने निभाई। नाटक अतुल सत्य कौशिक ने लिखा। इसमें एसपी सिटी देवरंजन वर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
अध्यात्म की ओर लौट रहा इंसान : नीतीश भारद्वाज
भौतिकवाद में उलझा इंसान अध्यात्म, धर्म और अपने इतिहास की ओर लौट रहा है। यही वजह है कि दर्शक धार्मिक सीरियल पसंद कर रहे हंै। यह कहना है महाभारत में श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज का।
गुरुवार को कानपुर प्रेस क्लब में उन्होंने कहा कि दर्शकों ने उन्हें श्रीकृष्ण की भूमिका में स्वीकार किया है लेकिन वह इसे अपने फिल्मी कॅरियर में अड़चन नहीं मानते हैं।
पूर्व सांसद नीतीश ने कहा कि समाज के लिए कुछ करने का भाव राजनीति से जोड़ता है इसीलिए वह संसद पहुंचे लेकिन दर्शक उनसे कलाकार की भूमिका से ज्यादा जुड़े हैं और कला के क्षेत्र से भी वह सेवाभाव कर रहे हैं।
उन्होंने सिर्फ चुनाव लड़ना छोड़ा है, राजनीति नहीं। इंग्लैंड जाकर नाटक और रेडियो में काम करने के फैसले को गलत मानते हुए कहा कि निर्णय सही या गलत होना वक्त तय करता है।
श्रीकृष्ण की भूमिका के बाद भी उन्होंने फिल्म ‘नाचे नागिन गली गली’ में काम किया। बतौर निर्देशक मराठी फिल्म पितृरण में काम किया। इसी साल रिलीज होने वाली फिल्म यक्ष में भी उनका रोल है।
आज भी याद है कानपुर का आलोक तिवारी
नीतीश ने बताया कि कानपुर से उनकी यादें जुड़ी हैं। वह कई बार शहर आए। शहर में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव का काम करने वाले आलोक तिवारी ने चाणक्य की भूमिका में बेहद प्रभावित किया।
इस कारण वह उसे अपने साथ लेकर मुंबई चले गए। अपने कौशल से उसने सीरियल में काम किया और रेडियो जॉकी की दुनिया में बड़ा नाम कमाया। आज वह इस दुनिया में नहीं है लेकिन परिवार का हिस्सा हो चुका आलोक आज भी याद आता है। उन्होंने अपने सांसदी के दौर में मेयर जगतवीर सिंह द्रोण के साथ बिताए पलों को भी याद किया।