Exclusive: मार्च से तय रूट पर ई-रिक्शा चलवाने की तैयारी, टेंडर जारी…सॉफ्टवेयर में दर्ज होंगी समस्त जानकारियां
Kanpur News: पंजीकरण के दौरान रिक्शा मालिक से उनकी प्राथमिकता वाले तीन रूट पूछे जाएंगे। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर शुरुआत में पंजीकरण कराने वाले ई-रिक्शा मालिकों को रूट का आवंटन किया जाएगा।
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कानपुर में नगर निगम, पुलिस और आरटीओ ने नवीनतम तकनीक के जरिये एक मार्च से ई-रिक्शों की अराजकता पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। ई-रिक्शा वेब एप्लीकेशन मैनेजमेंट का प्रयोग कर ई-रिक्शों को तय संख्या और निर्धारित रूट पर चलवाया जाएगा। इसके लिए सोमवार को नगर निगम में टेंडर खोले गए। मानक पूरे करने वाली कंपनियों को एक हफ्ते में कार्यादेश जारी किए जाएंगे। शहर में करीब 90 हजार ई-रिक्शे चल रहे हैं, जबकि आरटीओ कार्यालय में 40,000 ही पंजीकृत हैं।
अधिकतर पंजीकृत रिक्शा में गाड़ी मालिक का ब्योरा अधूरा और चालक की जानकारी ही नहीं है। तमाम ई-रिक्शों का बीमा नहीं है। हजारों कंडम रिक्शे भी धड़ल्ले से सवारियां ढो रहे हैं। ये चौराहों से लेकर सड़कों तक पर अराजकता फैलाते हैं। इनकी वजह से चौराहों पर जाम भी लगता है, आए दिन हादसे भी होते हैं। वेब एप्लीकेशन मैनेजमेंट के अंतर्गत ई-रिक्शों की अराजकता पर अंकुश लगाने के लिए क्यूआर कोड और एप तैयार कराए जाएंगे। इनमें ई-रिक्शों का पंजीकरण, आरसी, मालिक, चालक, बीमा आदि ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।
आरटीओ के डाटा से लिंक होगा रिकॉर्ड
इसके लिए विशेष प्रपत्र तैयार किया जा रहा है। यदि चालक बदलेगा, तो पुराने के स्थान पर नए चालक का विवरण इसमें दर्ज कराना पड़ेगा। नगर निगम, पुलिस और आरटीओ संयुक्त रूप से यह ब्योरा संकलित करने के लिए जोनवार शिविर लगाएंगे। शिविरों में सभी ई-रिक्शा मालिकों, चालकों का कागजों सहित बुलाया जाएगा। कागजों की जांच कर नगर निगम के ई-रिक्शा मैनेजमेंट पोर्टल में फीडिंग की जाएगी। यदि कागजों में कुछ कमी होगी तो उन्हें दूर कराया जाएगा। यह रिकॉर्ड आरटीओ के डाटा से लिंक होगा।
ऐसे लगेगा अराजकता पर अंकुश
पंजीकरण होते ही प्रत्येक ई-रिक्शे को एक क्यूआर कोड दिया जाएगा, इसे ई-रिक्शे पर लगाना अनिवार्य होगा। इनमें रिक्शे की आरसी, परमिट, बीमा, मालिक, चालक का ब्योरा रहेगा। हर रूट के लिए ई-रिक्शों की संख्या तय होगी। उनमें जोनवार अलग-अलग रंग के क्यूआर कोड चिपकाए जाएंगे। पुलिस रंग देखकर और मोबाइल एप के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर पूरा ब्योरा जान सकेगी। यह भी पता चलेगा कि उक्त रिक्शा निर्धारित रूट में चल रहा है या इस नियम का उल्लंघन कर रहा है। गलत होने पर तत्काल चालान भी किया जा सकता है।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगा रूट
पंजीकरण के दौरान रिक्शा मालिक से उनकी प्राथमिकता वाले तीन रूट पूछे जाएंगे। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर शुरुआत में पंजीकरण कराने वाले ई-रिक्शा मालिकों को रूट का आवंटन किया जाएगा। जिस रूट पर जितनी संख्या में ई-रिक्शों के संचालन का फैसला होगा, उतने को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी। प्रत्येक रूट पर ट्रैफिक लोड, सड़क की चौड़ाई, यातायात के दबाव आदि के हिसाब से ही रिक्शों की संख्या तय होगी। यदि किसी रूट में पहली प्राथमिकता वाले ई-रिक्शों की संख्या निर्धारित से कम होगी तो उसमें दूसरी प्राथमिकता और उसके बाद तीसरी प्राथमिकता वालों को अनुमति दी जाएगी।
ई-रिक्शों की अराजकता पर अंकुश लगाने और उनके विधिवत संचालन के लिए बनाई गई कार्ययोजना के तहत एक मार्च से ई-रिक्शा संचालित होंगे। इसके लिए चार तरह के टेंडर फाइनल हो गए हैं। सॉफ्टवेयर तैयार कर रहे हैं। एक हफ्ते में ई-रिक्शों का पंजीकरण शुरू कर देंगे। इसके लिए प्रत्येक जोन में विशेष शिविर लगेंगे, जिनमें 25-30 कर्मी यह कार्य करेंगे। आरटीओ, पुलिस कर्मी भी रहेंगे। कागजों में कमी होने पर आरटीओ कर्मी उसे दूर करेंगे। शिविर में शुरुआत में आने वालों को मनचाहे रूट मिल सकेंगे। किसी भी रूट में तय संख्या से ज्यादा ई-रिक्शे चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बाद में आने वालों से पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा। -सुधीर कुमार, नगर आयुक्त