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Kanpur News: न मानक, न लाइसेंस... गड्ढ़ा खोदकर बना दिया स्वीमिंग पूल
Tue, 21 May 2024 10:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 21 May 2024 10:53 PM IST
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इटावा। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में करीब 20 स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। यहां न मानक पूरे हैं और न ही नियमों का पालन हो रहा है। ये सभी बिना पंजीकरण और प्रशिक्षक के अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अगर कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
जिले में तमाम स्विमिंग पूल (तरणताल) संचालित हो रहे हैं। इनमें मानकों को दरकिनार कर लोगों से सुविधाओं के नाम पर प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है। निजी स्विमिंग पूल में रोजाना सैकड़ों लोग स्विमिंग के लिए जाते हैं। स्विमिंग पूल में पानी की सफाई, लाइफ गार्ड और दुर्घटना होने पर उपचार की व्यवस्था भी नहीं है। बस गड्ढा खोदकर पानी भर दिया गया है।
लाइफ गार्ड तो छोड़िए, संचालकों ने अन्य मानकों को भी पूरा नहीं किया है। मोटी कमाई के लिए संचालक एक समय में तीस से 50 लोगों को एक साथ स्विमिंग पूल में भेज देते हैं। मजे की बात यह भी है कि खुलेआम संचालित हो रहे इन स्विमिंग पूलों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं है।
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बुकिंग पर तीन से चार हजार रुपये लेते हैं
स्विमिंग पूल संचालकों ने मोटी कमाई के लिए अपने नियम भी बना रखे हैं। इन नियमों में है कि अगर कोई ग्रुप आता है तो उसको छूट दे दी जाती है। बुकिंग के समय किसी भी अन्य व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। बुकिंग के दौरान तीन से चार हजार रुपये लिए जाते हैं और उसके लिए समय का भी निर्धारण होता है।
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पार्किंग की नहीं है व्यवस्था
जिले में कई ऐसे स्विमिंग पूल हैं जिनके बाहर अवैध पार्किंग भी चल रही हैं। संचालक स्विमिंग पूल के बाहर खाली जगह में रस्सियां बांधकर पार्किंग बना देते हैं और पार्किंग के नाम पर प्रति वाहन 10 से 30 रुपये भी वसूलते हैं।
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स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए लेनी होती एनओसी
स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए फायर ब्रिगेड व पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट स्टेडियम में संंबंधित विभाग को निर्धारित पंजीयन का शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है। जांच में सभी मानक पूर्ण पाए जाने पर अनुमति मिल जाती है।
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ये रहते हैं मानक
- खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
- स्विमिंग पूल में दो ऑक्सीजन सिलिंडर, दो कृत्रिम सांस यंत्र भी होने चाहिए।
- पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे चलाया जाए।
- स्विमिंग पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्विमिंग कोच जो राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय खिलाड़ी हो। उसकी जरूरत होती है।
- प्रत्येक स्विमिंग पूल के लिए दो लाइफ गार्ड, जो भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रमाणित हों।
- पानी को साफ रखने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बीमारियों से बचाव होता है।
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वर्जन
जिले में कितने स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अब तक किसी का आवेदन नहीं आया है। अगर स्विमिंग पूलाें का संचालन हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
- परमजीत सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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जिले में तमाम स्विमिंग पूल (तरणताल) संचालित हो रहे हैं। इनमें मानकों को दरकिनार कर लोगों से सुविधाओं के नाम पर प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है। निजी स्विमिंग पूल में रोजाना सैकड़ों लोग स्विमिंग के लिए जाते हैं। स्विमिंग पूल में पानी की सफाई, लाइफ गार्ड और दुर्घटना होने पर उपचार की व्यवस्था भी नहीं है। बस गड्ढा खोदकर पानी भर दिया गया है।
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लाइफ गार्ड तो छोड़िए, संचालकों ने अन्य मानकों को भी पूरा नहीं किया है। मोटी कमाई के लिए संचालक एक समय में तीस से 50 लोगों को एक साथ स्विमिंग पूल में भेज देते हैं। मजे की बात यह भी है कि खुलेआम संचालित हो रहे इन स्विमिंग पूलों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं है।
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बुकिंग पर तीन से चार हजार रुपये लेते हैं
स्विमिंग पूल संचालकों ने मोटी कमाई के लिए अपने नियम भी बना रखे हैं। इन नियमों में है कि अगर कोई ग्रुप आता है तो उसको छूट दे दी जाती है। बुकिंग के समय किसी भी अन्य व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। बुकिंग के दौरान तीन से चार हजार रुपये लिए जाते हैं और उसके लिए समय का भी निर्धारण होता है।
पार्किंग की नहीं है व्यवस्था
जिले में कई ऐसे स्विमिंग पूल हैं जिनके बाहर अवैध पार्किंग भी चल रही हैं। संचालक स्विमिंग पूल के बाहर खाली जगह में रस्सियां बांधकर पार्किंग बना देते हैं और पार्किंग के नाम पर प्रति वाहन 10 से 30 रुपये भी वसूलते हैं।
स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए लेनी होती एनओसी
स्विमिंग पूल संचालित करने के लिए फायर ब्रिगेड व पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट स्टेडियम में संंबंधित विभाग को निर्धारित पंजीयन का शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है। जांच में सभी मानक पूर्ण पाए जाने पर अनुमति मिल जाती है।
ये रहते हैं मानक
- खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
- स्विमिंग पूल में दो ऑक्सीजन सिलिंडर, दो कृत्रिम सांस यंत्र भी होने चाहिए।
- पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे चलाया जाए।
- स्विमिंग पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्विमिंग कोच जो राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय खिलाड़ी हो। उसकी जरूरत होती है।
- प्रत्येक स्विमिंग पूल के लिए दो लाइफ गार्ड, जो भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रमाणित हों।
- पानी को साफ रखने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बीमारियों से बचाव होता है।
वर्जन
जिले में कितने स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अब तक किसी का आवेदन नहीं आया है। अगर स्विमिंग पूलाें का संचालन हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
- परमजीत सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी