Exclusive: बंद मिलों की जमीन पर टेक्सटाइल या आईटी पार्क बनाने की कवायद, एनटीसी-बीआईसी की जमीनों का अध्ययन शुरू
Kanpur News: शहर में एनटीसी व बीआईसी की कुल जमीन ही सिर्फ 366 एकड़ है। वो भी अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई। वहीं, आईटी पार्क 50 एकड़ जमीन में भी बन सकता है। ऐसे में आईटी पार्क की स्थापित होने की संभावना ज्यादा है।
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कानपुर में नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) और ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) की 366 एकड़ जमीन पर आने वाले समय में आईटी या टेक्सटाइल पार्क बन सकता है। इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की संयुक्त टीम ने अध्ययन शुरू कर दिया है। कपड़ा मंत्रालय व प्रदेश सरकार के उच्च अधिकारियों की यह टीम जल्द ही शहर आकर स्थिति का आकलन करेगी। पिछले महीने सांसद रमेश अवस्थी ने इस संबंध में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को एक पत्र भी लिखा था।
एनटीसी और बीआईसी की जमीनें शहर के बीच में होने के कारण इन पर प्रदूषण रहित उद्योग की ही स्थापना हो सकेगी। ऐसे एनजीटी के निर्देश हैं। ऐसे में इन जमीनों पर आईटी पार्क या टेक्सटाइल के क्षेत्र में सिलाई, कढ़ाई से संबंधित उद्योग स्थापित किए जाने की संभावना ज्यादा है। शहर में प्रतिष्ठित आईआईटी का होना भी आईटी पार्क के दावे को मजबूत करता है। आईआईटी के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शहर में आकर्षित करना आसान भी होगा।
500 से एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत
दूसरी तरफ कानपुर की पहचान कपड़ा उद्योग से जुड़ी होने और यहां बड़ी मंडी होने के चलते टेक्सटाइल पार्क की मांग भी जा रही है, लेकिन कुल 366 एकड़ जमीन शहर के अलग-अलग हिस्सों में होने से इसकी स्थापना में सबसे बड़ी बाधा है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि एक टेक्सटाइल पार्क (प्रोसेसिंग इकाई सहित) की स्थापना के लिए 500 से एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है। राजधानी लखनऊ में ही एक हजार एकड़ में टेक्सटाइल पार्क बनाया जा रहा है।
इन जमीनों पर संभव है इनकी स्थापना
जबकि शहर में एनटीसी व बीआईसी की कुल जमीन ही सिर्फ 366 एकड़ है। वो भी अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई। वहीं, आईटी पार्क 50 एकड़ जमीन में भी बन सकता है। ऐसे में आईटी पार्क की स्थापित होने की संभावना ज्यादा है। क्योंकि, एनटीसी की हमीरपुर रोड स्थित स्वदेशी कॉटन मिल करीब 65 एकड़ में है। इसके अलावा म्योर मिल के पास 42, विक्टोरिया मिल के पास 31, अर्थटन मिल के पास 15 और लक्ष्मीरतन मिल के पास करीब 13 एकड़ जमीन है। ऐसे में आईटी पार्क के अलावा टेक्सटाइल के क्षेत्र में रेडिमेड उद्योग की स्थापना ही इन जमीनों पर संभव है।
एनटीसी की 300 एकड़ व बीआईसी की है 66 एकड़ जमीन
एनटीसी की कानपुर में परेड स्थित म्योर मिल, ग्वालटोली स्थित न्यू विक्टोरिया मिल, जूही हमीरपुर रोड स्थित स्वदेशी कॉटन मिल और जरीब चौकी के पास अथर्टन मिल है। दर्शनपुरवा-फजलगंज स्थित लक्ष्मीरतन कॉटन मिल सालों पहले बंद हो चुकी है। अथर्टन मिल के एक हिस्से में एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर बनाया गया है। एनटीसी की पूरे शहर में 300 एकड़ जमीन है। शेष 66 एकड़ जमीन बीआईसी की है, जिसमें लाल इमली, धारीवाल, कानपुर टेक्सटाइल और एल्गिन मिल एक और दो स्थित हैं।
राज्य सरकार को वापस की जाएंगी लीज होल्ड जमीनें
लाल इमली में 2013 से उत्पादन बंद है। नीति आयोग 2017 में बीआईसी की बंदी के लिए भी सिफारिश कर चुका है। बीआईसी की संपत्तियां शहर के बेहद पॉश इलाकों में हैं। सिविल लाइंस, मकरावटगंज, वीआईपी रोड, ग्वालटोली, खलासीलाइन में बीआईसी की मिलें और बंगले हैं। बीआईसी की ज्यादातर जमीनें नजूल की हैं, जो लीज पर दी गई हैं। लीज खत्म होने के साथ जिला प्रशासन उन पर कब्जा वापस ले रहा है। सूत्रों का कहना है कि लीज होल्ड जमीनें राज्य सरकार को वापस की जाएंगी।
एनटीसी और बीआईसी की जमीनों को लेकर पिछले महीने कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से दिल्ली में मिलकर उन्हें पत्र सौंपा था। उसके बाद कपड़ा मंत्रालय और प्रदेश सरकार के उच्च अधिकारियों में इस मसले पर वार्ता हुई है। जल्दी ही एक टीम कानपुर आकर इन जमीनों का आकलन करेगी। कपड़ा मंत्री ने आश्वासन दिया था कि अधिकारियों की रिपोर्ट को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी रखेंगे। -रमेश अवस्थी, सांसद, महानगर
शहर में टेक्सटाइल पार्क की मांग लंबे समय से की जा रही है। एनटीसी-बीआईसी की मिलों में कपड़ा और उसके उत्पाद तैयार होते थे। इन मिलों की जमीनों में टेक्सटाइल या आईटी पार्क बने तो शहर के लिए बहुत अच्छा होगा। -बलराम नरूला, एमडी, जेट निटवियर
एनटीसी-बीआईसी की जमीनों पर टेक्सटाइल या आईटी पार्क बनाने की बात हो रही है। इससे शहर में निवेश आएगा। आईआईए इसकी मांग कर चुका है। आईटी पार्क बनता है तो तकनीक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो सकेगा। -सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए