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कारोबार में भरा फर्राटा: कानपुर में सबसे तेजी से बढ़ीं नई इकाइयां, 72 फीसदी रही वृद्धि दर
Mon, 15 Apr 2024 11:06 AM IST
शिखा पांडेय
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 15 Apr 2024 11:06 AM IST
सार
कानपुर के कारोबार ने फर्राटा भरा है। नई इकाइयों की वृद्धि दर में लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद पीछे है। इकाइयों की कुल संख्या में आगरा को पीछे छोड़ कानपुर चौथे स्थान पर पहुंचा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कभी अपनी सूती मिलों के दम पर दुनिया भर में धमक जमाने वाले कानपुर ने एक बार फिर फर्राटा भरना शुरू कर दिया है। बीते वित्तीय वर्ष में शहर ने नई कारोबारी इकाइयों के खुलने के मामले में प्रदेश में सबसे तेज 72 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है। यह वृद्धि दर नोएडा, लखनऊ और गाजियाबाद से भी ज्यादा है। हालांकि कुल इकाइयों की संख्या में ये तीनो शहर अभी कानपुर से आगे हैं। लेकिन इकाइयां खुलने की ताजा रफ्तार से उम्मीद बंधी है कि एक बार फिर कानपुर अपना पुराना गौरव हासिल कर सकेगा।
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शहर में वित्तीय वर्ष 2023-24 में उत्पादन, सेवा और ट्रेडिंग की 41227 नई इकाइयां खुली हैं। इसके साथ ही शहर में कुल पंजीकृत इकाइयों की संख्या 98138 हो चुकी है। कुल पंजीकृत इकाइयों के लिहाज से कानपुर उत्तर प्रदेश में चौथे नंबर पर आ गया है। मार्च 2023 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में आगरा चौथे नंबर पर था। वहीं, पहले स्थान पर लखनऊ, दूसरे पर गाजियाबाद और तीसरे स्थान पर नोएडा (गौतमबुद्धनगर) है।
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कानपुर के बाद सर्वाधिक वृद्धि दर आगरा की 62 प्रतिशत से ज्यादा रही। वृद्धि दर के लिहाज से इसके बाद लखनऊ, गाजियाबाद और नोएडा आते हैं। कानपुर ने यह वृद्धि दर छोटी और मझोली इकाइयों की बदौलत हासिल की है। जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक इस साल होजरी और रेडीमेड की इकाइयां बड़ी संख्या में खुली हैं। इनकी संख्या 2116 है जबकि चर्म उद्योग से जुड़ी 1400 नई इकाइओं ने आकार लिया है। शहर की कुल 98138 इकाइयों में उत्पादन की 32200 और सेवा क्षेत्र की 66803 इकाइयां हैं। वहीं इस साल उत्पादन की 12645, सेवा क्षेत्र की 11973 और ट्रेडिंग की 16609 इकाइयां पंजीकृत हुई हैं। उत्पादन में भी होजरी की 1197, रेडीमेड की 919, चमड़े की 1400, सैडलरी-हारनेस की 172, सिविल इंजीनियरिंग की 369, फूड प्रोसेसिंग की 502, बेकरी प्रोसेसिंग की 495, 620 फ्लोर मिल, ट्रेडिंग में हार्डवेयर की 403 और फैब्रिकेशन की 369 इकाइयां हैं। सेवा क्षेत्र में ब्यूटी पार्लर की 258, 70 साइबर कैफे, कैटरिंग की 260 इकाइयों का पंजीकरण हुआ है।
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शहर में इस तरह बढ़ती गई इकाइयां
एक जुलाई 2020 से 31 मार्च 2021 तक- 10976
एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक -18756
एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक -27180
एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक -41226
कुल: 98138
सूक्ष्म इकाइयां सबसे ज्यादा
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सूक्ष्म की 94251, लघु की 3540, मध्यम की 347 इकाइयां पंजीकृत हैं।
एक जुलाई 2020 से 31 मार्च 2021 तक- 10976
एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक -18756
एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक -27180
एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक -41226
कुल: 98138
सूक्ष्म इकाइयां सबसे ज्यादा
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सूक्ष्म की 94251, लघु की 3540, मध्यम की 347 इकाइयां पंजीकृत हैं।
इसलिए बढ़ रहीं इकाइयां
प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग बीमा योजना शुरू की है। एक जिला एक उत्पाद योजना में चमड़ा, होजरी और रेडीमेड उद्योग को शामिल किया गया। इसमें कम ब्याज पर उद्योगों को लोन मिल जा रहा है। पीएमईजीपी, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लोन, सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश सरकार नई एमएसएमई नीति लाई है। अब एमएसएमई को भुगतान की भी नई व्यवस्था की गई है।
सर्वाधिक वृद्धि दर वाले टॉप-5 शहर
नोट-प्रदेश में कुल 23 लाख 71 हजार 447 इकाइयां पंजीकृत हैं।
प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग बीमा योजना शुरू की है। एक जिला एक उत्पाद योजना में चमड़ा, होजरी और रेडीमेड उद्योग को शामिल किया गया। इसमें कम ब्याज पर उद्योगों को लोन मिल जा रहा है। पीएमईजीपी, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लोन, सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश सरकार नई एमएसएमई नीति लाई है। अब एमएसएमई को भुगतान की भी नई व्यवस्था की गई है।
सर्वाधिक वृद्धि दर वाले टॉप-5 शहर
| शहर का नाम | 2023-24 में पंजीकरण | वृद्धि दर | कुल पंजीकरण |
| लखनऊ | 51203 | 60.23 | 136214 |
| गाजियाबाद | 45119 | 59.59 | 120831 |
| गौतमबुद्धनगर | 38836 | 56.77 | 107245 |
| कानपुर | 41227 | 72.56 | 98138 |
| आगरा | 36965 | 62.48 | 96124 |
सरकार उद्योग-व्यापार को कर रही प्रोत्साहित
शहर में उत्पादन, सेवा और ट्रेडिंग तीनों क्षेत्र में पंजीकरण बढ़ रहा है। सरकार उद्योग और व्यापार को प्रोत्साहित कर रही है। उद्यमी भी विस्तार भी कर रहे हैं। - सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र
एमएसएमई में सबसे ज्यादा लोगों को मिला रोजगार
चर्म क्षेत्र में नए-नए स्टार्टअप आ रहे हैं। जूता और उसके उत्पाद तेजी से बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में निर्यात की भी व्यापक संभावनाएं हैं। शहर से हो रहे निर्यात का 98 प्रतिशत एमएसएमई का है। एमएसएमई में ही सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। - राजेंद्र कुमार जालान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
इकाइयों का बढ़ना उद्योगों के लिए शुभ संकेत
इकाइयों का पंजीकरण बढ़ना शहर में उद्योग-व्यापार जगत के लिए शुभ संकेत हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना में होजरी, टेक्सटाइल, रेडीमेड शामिल है। इसी का परिणाम है कि इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पंजीकरण हुआ है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है। - बलराम नरूला, एमडी, जेट निटवियर
शहर के उद्यमी ही उद्योगों का कर रहे विस्तार
कानपुर सूक्ष्म, लघु उद्योगों का गढ़ है। यही क्षेत्र शहर को संभाले हुए है। बड़ा निवेश नहीं आ रहा है पर शहर के उद्यमी अपने उद्योगों का विस्तार कर रहे हैं। नए लोग भी उत्पादन इकाइयां शुरू कर रहे हैं। एमएसएमई को 15 से 45 दिन के भीतर भुगतान का भी असर दिख रहा है। - उमंग अग्रवाल, महासचिव, फीटा
शहर में उत्पादन, सेवा और ट्रेडिंग तीनों क्षेत्र में पंजीकरण बढ़ रहा है। सरकार उद्योग और व्यापार को प्रोत्साहित कर रही है। उद्यमी भी विस्तार भी कर रहे हैं। - सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र
एमएसएमई में सबसे ज्यादा लोगों को मिला रोजगार
चर्म क्षेत्र में नए-नए स्टार्टअप आ रहे हैं। जूता और उसके उत्पाद तेजी से बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में निर्यात की भी व्यापक संभावनाएं हैं। शहर से हो रहे निर्यात का 98 प्रतिशत एमएसएमई का है। एमएसएमई में ही सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। - राजेंद्र कुमार जालान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
इकाइयों का बढ़ना उद्योगों के लिए शुभ संकेत
इकाइयों का पंजीकरण बढ़ना शहर में उद्योग-व्यापार जगत के लिए शुभ संकेत हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना में होजरी, टेक्सटाइल, रेडीमेड शामिल है। इसी का परिणाम है कि इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पंजीकरण हुआ है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है। - बलराम नरूला, एमडी, जेट निटवियर
शहर के उद्यमी ही उद्योगों का कर रहे विस्तार
कानपुर सूक्ष्म, लघु उद्योगों का गढ़ है। यही क्षेत्र शहर को संभाले हुए है। बड़ा निवेश नहीं आ रहा है पर शहर के उद्यमी अपने उद्योगों का विस्तार कर रहे हैं। नए लोग भी उत्पादन इकाइयां शुरू कर रहे हैं। एमएसएमई को 15 से 45 दिन के भीतर भुगतान का भी असर दिख रहा है। - उमंग अग्रवाल, महासचिव, फीटा