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Kanpur News: जेके जूट मिल के लिए बिड खुली, बकायेदारी के लिए शासन को भेजा गया पत्र
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कानपुर। जेके जूट मिल की संपत्तियों की खरीद के लिए बिड खुलने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके लिए छह कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। इसमें सिंहानिया ग्रुप की यदु इंटरनेशनल समेत गोविंद सारडा के भाई घनश्याम सारडा की कंपनी भी रेस में शामिल थी। हालांकि बिड किस कंपनी के पक्ष में खुली है, इसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है। वहीं इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (आईआरपी) ने मिल से जुड़ी बकायेदारी के लिए उत्तर प्रदेश शासन के उच्च अफसरों को पत्र भेजा है। जल्द से जल्द देनदारियों के भुगतान कराने के लिए कहा गया है।
मार्च 2014 से मिल में तालाबंदी है। मिल की कानपुर और बिहार में संपत्तियां हैं। करीब 2000 के कर्मचारियों का 132 करोड़ का बकाया भुगतान होना है। मिल का मामला नेशनल कंपनी लाॅ अपीलेट ट्रिब्यूनल में चल रहा है। आईआरपी ने पिछले साल मिल की संपत्तियों पर कब्जा भी ले लिया था। 2007 से पहले तक मिल का प्रबंधन जेके ग्रुप करता था। यहां पर जूट के बोरों का उत्पादन किया जाता था। 2007 में सारडा ग्रुप ने इसका प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया। ग्रुप ने मिल आठ मार्च 2014 को बंद कर दी।
तत्कालीन राज्यपाल ने सितंबर 2016 में तालाबंदी को अवैध घोषित करते हुए 180 दिनों के लिए इसे अवैध घोषित करने का आदेश जारी किया था लेकिन इसका मिल प्रमोटर ने पालन नहीं किया। तब जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा कानपुर ने नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में अपील दाखिल की। इसके बाद एनसीएलटी से जनवरी 2024 में आईआरपी गठन का आदेश दिया गया था।
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मिल के प्रमोटर गोविंद शारडा ने नेशनल कंपनी लाॅ अपीलेट ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में एनसीएलटी इलाहाबाद के फैसले पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी जिस पर 30 अप्रैल 2025 को सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रमोटर की याचिका खारिज कर दी थी और आईआरपी दीपक कुमार अग्रवाल को नियुक्त कर दिया था। श्रमिकों का दावा स्वीकार करने की भी इजाजत दी गई थी।
जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा के महामंत्री राजू प्रसाद ने बताया कि 12 जनवरी को बिड खुली थी। छह कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। हालांकि किस कंपनी के पक्ष में बिड आई है। इसका खुलासा नहीं हो सका है। एनसीएलटी की ओर से नियुक्त आईआरपी ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजा है। राजू प्रसाद ने बताया कि मिल पर कई विभागों की बकायेदारी है। सबसे पहले मिल के श्रमिकों का बकाया वेतन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी का भुगतान कराया जाएगा।
10.50 एकड़ में फैली है मिल
राजू प्रसाद ने बताया कि मिल की संपत्तियां कानपुर और बिहार के अलग-अलग शहरों में हैं। शहर के कालपी रोड में मिल स्थित है। ये 10.50 एकड़ में फैली है। इसके अलावा 2700 वर्गमीटर के कई बंगले हैं। बिहार में भी मिल है। 2018 में आईडीबीआई बैंक ने इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 345 करोड़ रुपये आंकी थी। अब इसकी कीमत 700 करोड़ के करीब होने का अनुमान है। जिन कर्मचारियों ने अब तक अपना दावा नहीं किया है, वे दावा कर सकते हैं।
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मार्च 2014 से मिल में तालाबंदी है। मिल की कानपुर और बिहार में संपत्तियां हैं। करीब 2000 के कर्मचारियों का 132 करोड़ का बकाया भुगतान होना है। मिल का मामला नेशनल कंपनी लाॅ अपीलेट ट्रिब्यूनल में चल रहा है। आईआरपी ने पिछले साल मिल की संपत्तियों पर कब्जा भी ले लिया था। 2007 से पहले तक मिल का प्रबंधन जेके ग्रुप करता था। यहां पर जूट के बोरों का उत्पादन किया जाता था। 2007 में सारडा ग्रुप ने इसका प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया। ग्रुप ने मिल आठ मार्च 2014 को बंद कर दी।
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तत्कालीन राज्यपाल ने सितंबर 2016 में तालाबंदी को अवैध घोषित करते हुए 180 दिनों के लिए इसे अवैध घोषित करने का आदेश जारी किया था लेकिन इसका मिल प्रमोटर ने पालन नहीं किया। तब जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा कानपुर ने नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में अपील दाखिल की। इसके बाद एनसीएलटी से जनवरी 2024 में आईआरपी गठन का आदेश दिया गया था।
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मिल के प्रमोटर गोविंद शारडा ने नेशनल कंपनी लाॅ अपीलेट ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में एनसीएलटी इलाहाबाद के फैसले पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी जिस पर 30 अप्रैल 2025 को सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रमोटर की याचिका खारिज कर दी थी और आईआरपी दीपक कुमार अग्रवाल को नियुक्त कर दिया था। श्रमिकों का दावा स्वीकार करने की भी इजाजत दी गई थी।
जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा के महामंत्री राजू प्रसाद ने बताया कि 12 जनवरी को बिड खुली थी। छह कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। हालांकि किस कंपनी के पक्ष में बिड आई है। इसका खुलासा नहीं हो सका है। एनसीएलटी की ओर से नियुक्त आईआरपी ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजा है। राजू प्रसाद ने बताया कि मिल पर कई विभागों की बकायेदारी है। सबसे पहले मिल के श्रमिकों का बकाया वेतन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी का भुगतान कराया जाएगा।
10.50 एकड़ में फैली है मिल
राजू प्रसाद ने बताया कि मिल की संपत्तियां कानपुर और बिहार के अलग-अलग शहरों में हैं। शहर के कालपी रोड में मिल स्थित है। ये 10.50 एकड़ में फैली है। इसके अलावा 2700 वर्गमीटर के कई बंगले हैं। बिहार में भी मिल है। 2018 में आईडीबीआई बैंक ने इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 345 करोड़ रुपये आंकी थी। अब इसकी कीमत 700 करोड़ के करीब होने का अनुमान है। जिन कर्मचारियों ने अब तक अपना दावा नहीं किया है, वे दावा कर सकते हैं।