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‘सुन ले सरकार वर्ना होगी आर-पार’
Kanpur
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के विरोध में बंद के दौरान कोऑपरेटिव इस्टेट कार्यालय में एक सभा हुई। इसमें 200 से ज्यादा उद्यमी मौजूद रहे। सभी ने सरकार पर ज्यादती का आरोप लगाकर नारेबाजी की। उद्यमी नेताओं ने सपा मुखिया मुलायम सिंह के जन्मदिन के मौके पर बिजली दरें संशोधित करके उन्हें रिटर्न गिफ्ट देने की मांग की। यह भी कहा कि अगर बढ़ी दरें वापस न ली गईं तो इंडस्ट्री में बेमियादी बंदी की जाएगी।
कोपे स्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि एक तरफ सरकार औद्योगिक नीति लाकर उद्यमियों को रिझाने का काम करती है तो दूसरी तरफ बिजली की दरों में भारी बढ़ोत्तरी करके उन्हें तबाह करने का काम कर रही है। यह नजरिया उद्योग विरोधी है। सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। इस प्रकार का माहौल होगा तो निश्चित रूप से उद्योगों का पलायन आरंभ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार दरों में संशोधन नहीं करेगी, उद्यमी बिजली का बिल नहीं देंगे। वहीं आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तरुण खेत्रपाल ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली कंपनियों का कुल घाटा लगभग 24 हजार करोड़ रुपए है। वहीं प्रदेश के विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं पर बिजली कंपनियों का कुल बकाया 26000 करोड़ रुपए है। यदि इस राशि की सही प्रकार से वसूली की जाए तो दरों में बढ़ोत्तरी की नौबत ही न आए। प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष मनोज बंका ने कहा कि बिजली कंपनियों का लाइन लॉस प्रत्येक वर्ष घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2009-10 में विद्युत टैरिफ में लाइन लॉस को कम करके 21 प्रतिशत तक करने के निर्देश दिए थे, मगर इस बार नियामक आयोग के सामने इस बार कंपनियों ने 28 प्रतिशत तक लाइन लॉस की अनुमति मांगी है। व्यापारी नेता ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि उद्यमियों की इस लड़ाई में व्यापारी-कारोबारी भी साथ हैं। सभा में ममता शुक्ला, अतुल सेठ, सीपी पांडेय, अमित टुटेजा, शैलेंद्र सेठी, दिनेश आहूजा, अरुण जैन, भीमसेन, अशोक जुनेजा, सीता राम शुक्ला, राजेंद्र चौबे, पम्मी खन्ना, राजेंद्र गुप्ता, प्रेम राज, वीरेंद्र मिश्रा, एएस कोतवाल, मनमोहन राजपाल, बलराम नरूला आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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कोपे स्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि एक तरफ सरकार औद्योगिक नीति लाकर उद्यमियों को रिझाने का काम करती है तो दूसरी तरफ बिजली की दरों में भारी बढ़ोत्तरी करके उन्हें तबाह करने का काम कर रही है। यह नजरिया उद्योग विरोधी है। सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। इस प्रकार का माहौल होगा तो निश्चित रूप से उद्योगों का पलायन आरंभ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार दरों में संशोधन नहीं करेगी, उद्यमी बिजली का बिल नहीं देंगे। वहीं आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तरुण खेत्रपाल ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली कंपनियों का कुल घाटा लगभग 24 हजार करोड़ रुपए है। वहीं प्रदेश के विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं पर बिजली कंपनियों का कुल बकाया 26000 करोड़ रुपए है। यदि इस राशि की सही प्रकार से वसूली की जाए तो दरों में बढ़ोत्तरी की नौबत ही न आए। प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष मनोज बंका ने कहा कि बिजली कंपनियों का लाइन लॉस प्रत्येक वर्ष घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2009-10 में विद्युत टैरिफ में लाइन लॉस को कम करके 21 प्रतिशत तक करने के निर्देश दिए थे, मगर इस बार नियामक आयोग के सामने इस बार कंपनियों ने 28 प्रतिशत तक लाइन लॉस की अनुमति मांगी है। व्यापारी नेता ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि उद्यमियों की इस लड़ाई में व्यापारी-कारोबारी भी साथ हैं। सभा में ममता शुक्ला, अतुल सेठ, सीपी पांडेय, अमित टुटेजा, शैलेंद्र सेठी, दिनेश आहूजा, अरुण जैन, भीमसेन, अशोक जुनेजा, सीता राम शुक्ला, राजेंद्र चौबे, पम्मी खन्ना, राजेंद्र गुप्ता, प्रेम राज, वीरेंद्र मिश्रा, एएस कोतवाल, मनमोहन राजपाल, बलराम नरूला आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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