{"_id":"67e6f023f6b9457f340cfbe4","slug":"friday-prayers-were-offered-in-two-shifts-in-mosques-kannauj-news-c-214-1-knj1005-127662-2025-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: मस्जिदों में दो शिफ्टों में पढ़वाई गई जुमे की नमाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: मस्जिदों में दो शिफ्टों में पढ़वाई गई जुमे की नमाज
विज्ञापन
कन्नौज/तालग्राम। जुमे की नमाज को लेकर शुक्रवार को सभी मस्जिदों के बाहर पुलिस अलर्ट रही। मस्जिदों में भीड़ होने पर दो शिफ्टों मेें नमाज पढ़वाई गई। पीस कमेटी की बैठक में धर्मगुरुओं को मस्जिद के बाहर सड़क पर नमाज अदा करने के लिए प्रशासन ने पहले ही मना कर दिया था। मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमे की नमाज शुक्रवार को अदा की गई। मस्जिदों में पहुंचकर बड़े ही शिद्दत के साथ लोग नमाज में शामिल हुए। अकीदतमंदों ने नमाज अदा कर देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। नमाज-ए-अलविदा के बाद एक तरफ जहां पाक महीना रमजान के जाने का गम रोजेदार में दिखा। वहीं, दूसरी ओर ईद की खुशी के लिए उत्साह देखने को मिला।
नमाज के लिए दोपहर 12 बजे से ही पुलिस सभी मस्जिदों के बाहर पहुंच गई। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई। सीओ सिटी कमलेश कुमार, कोतवाल कपिल दुबे सहित सभी चौकी इंचार्ज अपने क्षेत्र में भ्रमण करते रहे। क्यूआरटी की टीमें भी नगर में गश्त पर रही। मस्जिदों के बाहर नगर पालिका के कर्मचारियों ने सुबह ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर दी थी।
मौलानाओं ने बताया कि अलविदा जुमे का दिन रोजेदारों के लिए खास माना जाता है। इस दिन रोजेदार खुदा से जो भी जायज दुआ मांगता है, वह कबूल हो जाती है। पूर्व जामा मस्जिद पेश इमाम मौलाना नईम अख्तर हस्मती ने कहा कि रमजान का आखिरी अशरा भी हम से जुदा होने को है। इस अशरा में शबे कदर की तलाश करना बहुत बड़ी इबादत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नमाज के लिए दोपहर 12 बजे से ही पुलिस सभी मस्जिदों के बाहर पहुंच गई। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई। सीओ सिटी कमलेश कुमार, कोतवाल कपिल दुबे सहित सभी चौकी इंचार्ज अपने क्षेत्र में भ्रमण करते रहे। क्यूआरटी की टीमें भी नगर में गश्त पर रही। मस्जिदों के बाहर नगर पालिका के कर्मचारियों ने सुबह ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर दी थी।
विज्ञापन
मौलानाओं ने बताया कि अलविदा जुमे का दिन रोजेदारों के लिए खास माना जाता है। इस दिन रोजेदार खुदा से जो भी जायज दुआ मांगता है, वह कबूल हो जाती है। पूर्व जामा मस्जिद पेश इमाम मौलाना नईम अख्तर हस्मती ने कहा कि रमजान का आखिरी अशरा भी हम से जुदा होने को है। इस अशरा में शबे कदर की तलाश करना बहुत बड़ी इबादत है।
विज्ञापन