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कुपोषित बच्चों को कुपोषण वार्ड में भर्ती कराएं
Kannauj
Updated Tue, 21 May 2013 05:30 AM IST
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कन्नौज। बाल स्वास्थ्य पोषण माह जून 2013 से शुरू होगा। इस दौरान कुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय के कुपोषित वार्ड में भर्ती कराया जाएगा। इसको लेकर यूनीसेफ के अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास के अधिकारियों की बैठक ली।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आयोजित बैठक में यूनीसेफ के मंडल कोआर्डिनेटर नीरज शर्मा व संजू कश्यप ने बताया कि बाल स्वास्थ्य पोषण माह पर 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक हर हाल में दी जाए। इससे बच्चे में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। रतौंधी रोग से बचाव होता है। साथ ही आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। ताकि बच्चों में मानसिक विकलांगता से बचाव हो सके। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण के दौरान बच्चों को खसरा रोग के टीके भी हर हाल में लगाए जाएं। प्रत्येक बच्चे का वजन किया जाए। यदि वह आयु के अनुसार निर्धारित वजन से कम है तो उन्हें जिला चिकित्सालय में बने कुपोषित वार्ड में भर्ती कराया जाए। 6 माह तक के बच्चे को मां का दूध दिया जाए। इसके बाद बच्चे को पूरक पोषाहार देना जरूरी है। बाल विकास के अधिकारी आंगनबाड़ी की कार्यकत्रियों को निर्देशित करें कि वह टीकाकरण केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों के टीकाकरण में सहयोग करें। जो बच्चे कुपोषित पाए जाएं उनका विशेष ध्यान रखा जाए। इस मौके पर डा. रमेशचंद्रा, विनोद दीक्षित चिकित्सालय के अधीक्षक डा. एसपी सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज राय, परियोजना निदेशक सुमन श्रीवास्तव, बालकृष्ण पांडेय के अलावा दर्जनों सुपरवाइजर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आयोजित बैठक में यूनीसेफ के मंडल कोआर्डिनेटर नीरज शर्मा व संजू कश्यप ने बताया कि बाल स्वास्थ्य पोषण माह पर 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक हर हाल में दी जाए। इससे बच्चे में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। रतौंधी रोग से बचाव होता है। साथ ही आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। ताकि बच्चों में मानसिक विकलांगता से बचाव हो सके। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण के दौरान बच्चों को खसरा रोग के टीके भी हर हाल में लगाए जाएं। प्रत्येक बच्चे का वजन किया जाए। यदि वह आयु के अनुसार निर्धारित वजन से कम है तो उन्हें जिला चिकित्सालय में बने कुपोषित वार्ड में भर्ती कराया जाए। 6 माह तक के बच्चे को मां का दूध दिया जाए। इसके बाद बच्चे को पूरक पोषाहार देना जरूरी है। बाल विकास के अधिकारी आंगनबाड़ी की कार्यकत्रियों को निर्देशित करें कि वह टीकाकरण केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों के टीकाकरण में सहयोग करें। जो बच्चे कुपोषित पाए जाएं उनका विशेष ध्यान रखा जाए। इस मौके पर डा. रमेशचंद्रा, विनोद दीक्षित चिकित्सालय के अधीक्षक डा. एसपी सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज राय, परियोजना निदेशक सुमन श्रीवास्तव, बालकृष्ण पांडेय के अलावा दर्जनों सुपरवाइजर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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