{"_id":"588ba79e4f1c1b165dcf4789","slug":"northwest-winds-chill-returned-with-a-cold","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तर-पश्चिम सर्द हवाओं के साथ लौटी ठंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तर-पश्चिम सर्द हवाओं के साथ लौटी ठंड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jan 2017 01:33 AM IST
विज्ञापन
winter jhansi
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बृहस्पतिवार देर रात आए पश्चिमी विक्षोभ ने एक बार फिर मौसम का नजारा एकदम से बदल दिया। रात को आई तेज आंधी के बाद बारिश और कई स्थानों पर ओले गिरने से ठंड वापस लौट आई। शुक्रवार को बादल घिरे रहे। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि अब बारिश और ओलावृष्टि नहीं होगी। सिर्फ हल्की बूंदाबांदी की ही संभावना है।
गणतंत्र दिवस की रात अचानक से मौसम का रुख बदल गया। पश्चिमी विक्षोभ आने से देर रात तेज आंधी चली। बादल गरजने के साथ ही तेज बारिश शुरू हो गई। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हुई। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। इसमें लकारा, बेहटा, पालर, बडगड़, मोंठ के कुछ गांवों शामिल हैं। यहां ओले गिरने से सरसों, मटर, खीरा, लौकी आदि की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस था लेकिन बरसात के बाद न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि आगे के दिनों में तेज बारिश और ओले गिरने की संभावना नहीं है। सिर्फ बूंदाबांदी हो सकती है। बादल जरूर घिरे रह सकते हैं।
जहां ओले नहीं गिरे, वहां फायदा
मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि जहां ओले नहीं गिरे हैं, वहां फसलों को काफी फायदा होगा। चना, मटर, मशहूर, गेहूं समेत सभी फसलों के लिए बारिश फायदेमंद है।
जनवरी से मार्च के बीच विक्षोभ
हिमालय के उत्तर-पश्चिमी इलाके में बर्फबारी के बाद जब मौसम खुलता है, तो बर्फ पिघलती है। इससे ठंड बढ़ जाती है। हवा का दबाव और तापमान में उतार चढ़ाव आने से उत्तर-पश्चिम की तरफ से आने वाली तेज हवाओं को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे अचानक तेज हवाएं चलती हैं और ओले भी गिरते हैं। ठंड वापस आ जाती है। जनवरी से मार्च के बीच एक या दो बार पश्चिमी विक्षोभ आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गणतंत्र दिवस की रात अचानक से मौसम का रुख बदल गया। पश्चिमी विक्षोभ आने से देर रात तेज आंधी चली। बादल गरजने के साथ ही तेज बारिश शुरू हो गई। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हुई। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। इसमें लकारा, बेहटा, पालर, बडगड़, मोंठ के कुछ गांवों शामिल हैं। यहां ओले गिरने से सरसों, मटर, खीरा, लौकी आदि की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस था लेकिन बरसात के बाद न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि आगे के दिनों में तेज बारिश और ओले गिरने की संभावना नहीं है। सिर्फ बूंदाबांदी हो सकती है। बादल जरूर घिरे रह सकते हैं।
विज्ञापन
जहां ओले नहीं गिरे, वहां फायदा
मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि जहां ओले नहीं गिरे हैं, वहां फसलों को काफी फायदा होगा। चना, मटर, मशहूर, गेहूं समेत सभी फसलों के लिए बारिश फायदेमंद है।
जनवरी से मार्च के बीच विक्षोभ
हिमालय के उत्तर-पश्चिमी इलाके में बर्फबारी के बाद जब मौसम खुलता है, तो बर्फ पिघलती है। इससे ठंड बढ़ जाती है। हवा का दबाव और तापमान में उतार चढ़ाव आने से उत्तर-पश्चिम की तरफ से आने वाली तेज हवाओं को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे अचानक तेज हवाएं चलती हैं और ओले भी गिरते हैं। ठंड वापस आ जाती है। जनवरी से मार्च के बीच एक या दो बार पश्चिमी विक्षोभ आता है।
विज्ञापन