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केन-बेतवा जल परियोजनाः यूपी और एमपी में पानी बंटवारे को लेकर फंसा नया पेच

महत्वाकांक्षी केन-बेतवा जल परियोजना में पानी बंटवारे को लेकर इन दिनों नया पेच फंसा हुआ है। पानी की मात्रा तय हो गई, लेकिन दोनों राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) और मध्य प्रदेश (एमपी) के बीच पानी लेने की समय अवधि को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। मध्य प्रदेश जहां मानसूनी सीजन में अधिकांश पानी देने पर जोर दे रहा। वहीं, यूपी इसके लिए तैयार नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है नई दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस पर बीच की राह निकालने की कोशिश होगी। 

बुंदेलखंड, खासतौर से झांसी के लिए यह जल परियोजना काफी अहम है। इसके जरिए बुंदेलखंड के करीब 13695 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसमें अधिकांश हिस्सा झांसी का है। वर्ष 2005 में एमओयू में हस्ताक्षर होने के बाद भी जल बंटवारे को लेकर मप्र-उप्र के बीच विवाद चल रहा है। लेकिन, सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तकरीबन सुलझ चुका। दोनों ही राज्य 1700-1700 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी पर राजी हो गए। लेकिन, अब नया पेच फंस गया। 

मप्र शासन बारिश के दिनों में ही पानी आगे छोड़ने को राजी है। जबकि उप्र उसकी यह शर्त मानने को राजी नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है बारिश में यूपी के पास भी पानी भरपूर रहता है, ऐसे में यह शर्त मानने पर नुकसान होगा। इसी बात को लेकर पिछले काफी समय से दोनों प्रदेशों के बीच गतिरोध चल रहा है। पिछले दिनों दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई लेकिन, निर्णय नहीं हो सका। अब बृहस्पतिवार को होने वाली सालाना उच्च स्तरीय बैठक में इस पर चर्चा होने की उम्मीद है। स्थानीय सिंचाई अफसर बैठक की तैयारियों में जुटे रहे।     
 
बरुआसागर में आकर मिलेगी मुख्य नहर
केन-बेतवा जलपरियोजना झांसी के लिहाज से काफी अहम परियोजना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में देश की 37 नदियों को आपस में जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। उसमें इस परियोजना को सबसे पहले आरंभ करने निर्णय लिया गया था। करीब छह हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य बांध पन्ना के टाइगर रिजर्व के डोंदन गांव पर बनाया जाना है। इसके जरिए चार बांध बनाए जाने हैं। यह सभी बांध मप्र में ही बनाए जाने हैं। 218 किमी लंबी मुख्य नहर झांसी के बरुआसागर में लाकर मिलाने का प्रस्ताव है। इससे झांसी के सूखा ग्रस्त इलाकों तक भी आसानी से पानी पहुंच सकता है। लेकिन, पिछले 15 साल से उप्र एवं मप्र के बीच पानी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
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केन-बेतवा केन-बेतवा

लौट आओ, दिवाली संग मनाएंगे ...मजदूरों को एसी कोच का टिकट भेजकर बुला रहे उद्योगपति

इनमें कोई जून में घर लौटा था कोई जुलाई में। एक लंबा समय अपने गांव और कस्बे में मजदूरी करके बिता दिया। लेकिन अब इन मजदूरों को वापस बुलाया जा रहा है। बुलाने के लिए भी खास ऑफर दिए जा रहे हैं। ट्रेन के एसी कोच का टिकट भेजा जा रहा है। रहने और खाने की अच्छी व्यवस्था के दावे हो रहे हैं। इन सभी से कहा गया है कि अगर दिवाली से पहले आएंगे तो त्योहार साथ मनाएंगे। त्योहारों का गिफ्ट भी मिलेगा। रविवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर मिले प्रवासी मजदूरों से जब अमर उजाला ने बातचीत की तो महाराष्ट्र और गुजरात के उद्योगपतियों के बड़े बड़े सुनहरे त्योहारी ऑफर जानने को मिले।

कोराना संकट में लॉकडाउन के चलते जब सभी फैक्टरी और कारखाने बंद हो गए तो मजदूर अपने गांव को लौट आए। उत्तर प्रदेश की अगर बात करें तो झांसी, ललितपुर, महोबा, गोंडा, बहराइच, कुशीनगर, बस्ती, गोरखपुर, संतकबीरनगर और बलिया में सबसे ज्यादा मजदूरों की वापसी हुई थी। आहिस्ता आहिस्ता जब कारोबार पटरी पर आने लगा तो मजदूरों ने भी वापसी शुरू कर दी। लेकिन एक बड़ी संख्या ऐसे प्रवासी मजदूरों की भी है जो फिलहाल जा नहीं रहे हैं। लिहाजा इन लोगों को बुलाने के लिए कारोबारी पूरी ताकत लगा रहे हैं। इन लोगों को बेहतर सुविधा देने की बात की जा रही है। 

झांसी रेलवे स्टेशन पर मिले कुशीनगर के मंजूर आलम ने बताया कि वह केरल में एक फैक्टरी में काम करता था। काफी समय से गांव में था लेकिन अब ठेकेदार ने एसी कोच का टिकट भेजा और रहने की व्यवस्था करने की बात की है तो आज वापस जा रहा है। संतकबीरनगर के धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि वह 20 लोग वापस आए थे। अब सभी से कहा जा रहा है कि दीपावली से पहले आएंगे तो बोनस भी मिलेगा। कपड़े भी मिलेंगे। बच्चों को गिफ्ट दिए जाएंगे। लिहाजा परिवार के साथ वापसी कर रहे हैं। 

गोरखपुर के अमन कुमार का कहना है कि अब कारोबारियों को भी पता चल गया है कि मजदूर के बिना कुछ हो नहीं सकता। कपड़ा मिल में वह 20 साल से काम कर रहा है। एक्सपर्ट मजदूर मिलने आसान नहीं हैं लिहाजा मालिक बार-बार फोन कर रहे हैं। बहराइच के लालचरन ने बताया कि पहले उसने सोचा था कि अब लौटेगा नहीं। लेकिन काम तो करना ही है। वेतन बढ़ाने की बात ठेकेदार कर रहा है तो जाकर देख लेते हैं। बस्ती के अजय ने बताया कि वह गुजरात में सोने की पॉलिश का काम कर रहा था। जुलाई में आ गया था लेकिन अब बार बार फोन आ रहे हैं तो वापसी की जा रही है।

ये दिए जा रहे हैं ऑफर...
  • रहने की अच्छी व्यवस्था

  • वेतन में की जा रही बढ़ोत्तरी

  • बोनस की भी व्यवस्था कर रहे

  • च्चों की पढ़ाई की व्यवस्था

  • दीपावली पर परिवार को गिफ्ट
     

  • बसें भी भेजी जा रही हैं मजदूरों के लिएकेवल ट्रेन से ही नहीं बल्कि बसों से भी मजदूरों को बुलाया जा रहा है। झांसी, ललितपुर, दतिया, टीकमगढ़ में भी मजदूरों को लाने के लिए बसें पहुंच रही हैं। सभी की कोशिश है कि दीपावली से पहले ही मजदूर आ जाएं तो बेहतर है। ताकि से उद्योग रफ्तार पकड़ सकें।    

    यात्री शेड में उमड़ रही भीड़
    झांसी रेलवे स्टेशन के यात्री शेड में इन दिनों भीड़ उमड़ रही है। इसमें सबसे ज्यादा तादाद प्रवासी मजदूरों की है। अपने जिले से सुबह मजदूर ट्रेन पकड़ने के लिए झांसी स्टेशन पहुंचते हैं। वहीं पहली बार एसी कोच में सफर करने को लेकर मजदूरों में उत्साह नजर आता है।

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