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कोर्ट ने दिया राज्यमंत्री पंथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में गवाह को धमकाने की शिकायत पर न्यायालय ने प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोह लाल पंथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश कर दिया है। इससे अब राज्यमंत्री की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

22 अक्तूबर को गवाही देने पहुंचे वन अधिकारी की शिकायत पर न्यायालय ने राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ मन्नू कोरी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न आपकी जमानत रद्द कर दी जाए। न्यायालय ने इस मामले में राज्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने के भी आदेश दिए हैं। 

विशेष न्यायाधीश एमएलए/एमपी उमेश कुमार सिरोही की अदालत में राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ मन्नू कोरी के खिलाफ तीन वर्ष पूर्व का चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला विचाराधीन है। इसमें गवाही के लिए बीते 22 अक्तूबर की तारीख थी। 

गवाही के लिए वन क्षेत्राधिकारी सुनील भारद्वाज उपस्थित हुए और उन्होंने न्यायालय के समक्ष एक प्रार्थना पत्र देकर बताया कि इस मामले में आरोपी मन्नू कोरी द्वारा अपने पीए सोनू चौबे के मोबाइल से उसके मोबाइल पर फोन करके यह कहा गया कि यदि खिलाफ में गवाही दी तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस कारण वह भयभीत हैं। 

प्रार्थना पत्र के आधार पर न्यायाधीश ने गवाह को सुरक्षा प्रदान किए जाने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। इसके साथ ही आदेश दिया गया कि धारा 195 आईपीसी के अंतर्गत अभियुक्त मन्नू कोरी के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया जाए। इस धारा में सात साल तक की सजा का प्रावधान है। 

ये है मामला
तीन वर्ष पूर्व विधानसभा चुनाव के समय 17 फरवरी 2017 को उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट महरौनी व सोजना द्वारा थाना कोतवाली महरौनी में तहरीर देकर बताया था कि शाम करीब पांच बजे महरौनी स्थित पेट्रोल पंप प्रशांत सर्विस स्टेशन ललितपुर रोड पर जाम लगा था। पेट्रोल पंप पर ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व चार पहिया वाहन कतार लगाए खड़े थे। वहां पर उपस्थित व्यक्तियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि वे लोग भाजपा प्रत्याशी मन्नू कोरी और ललितपुर विधानसभा प्रत्याशी रामरतन कुशवाहा की जनसभा में आए थे। 

इन प्रत्याशियों ने पर्ची दीं थीं, जिससे वे लोग पेट्रोल व डीजल ले रहे हैं। उपस्थित लोगों से पेट्रोल व डीजल की पर्ची जमा की गई व वीडियो बनाई गई। निर्वाचन को प्रभावित करने के लिए नकदी व घूस की कोई भी वस्तु का वितरण या बाहुबल का इस्तेमाल करना अपराध है। इस मामले में महरौनी कोतवाली पुलिस ने उक्त प्रत्याशियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। विवेचना के बाद इस मामले में न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई, लेकिन बीते वर्ष न्यायालय ने यह अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए मामला तलब किया था। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आचार संहिता के मामले में गवाह क्षेत्रीय वनाधिकारी सुनील भारद्वाज द्वारा न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें मन्नू कोरी पर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में न्यायालय ने मन्नू कोरी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस व धारा 195 आईपीसी के तहत परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
खुशीलाल लोधी, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता

हमारी आरोप लगाने वाले व्यक्ति से कोई बात नहीं हुई है और यदि फोन लगाना होता तो हम अपने खुद के फोन से लगाते। 
मनोहरलाल पंथ, मन्नू कोरी, राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन
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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

केन-बेतवा जल परियोजनाः यूपी और एमपी में पानी बंटवारे को लेकर फंसा नया पेच

महत्वाकांक्षी केन-बेतवा जल परियोजना में पानी बंटवारे को लेकर इन दिनों नया पेच फंसा हुआ है। पानी की मात्रा तय हो गई, लेकिन दोनों राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) और मध्य प्रदेश (एमपी) के बीच पानी लेने की समय अवधि को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। मध्य प्रदेश जहां मानसूनी सीजन में अधिकांश पानी देने पर जोर दे रहा। वहीं, यूपी इसके लिए तैयार नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है नई दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस पर बीच की राह निकालने की कोशिश होगी। 

बुंदेलखंड, खासतौर से झांसी के लिए यह जल परियोजना काफी अहम है। इसके जरिए बुंदेलखंड के करीब 13695 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसमें अधिकांश हिस्सा झांसी का है। वर्ष 2005 में एमओयू में हस्ताक्षर होने के बाद भी जल बंटवारे को लेकर मप्र-उप्र के बीच विवाद चल रहा है। लेकिन, सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तकरीबन सुलझ चुका। दोनों ही राज्य 1700-1700 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी पर राजी हो गए। लेकिन, अब नया पेच फंस गया। 

मप्र शासन बारिश के दिनों में ही पानी आगे छोड़ने को राजी है। जबकि उप्र उसकी यह शर्त मानने को राजी नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है बारिश में यूपी के पास भी पानी भरपूर रहता है, ऐसे में यह शर्त मानने पर नुकसान होगा। इसी बात को लेकर पिछले काफी समय से दोनों प्रदेशों के बीच गतिरोध चल रहा है। पिछले दिनों दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई लेकिन, निर्णय नहीं हो सका। अब बृहस्पतिवार को होने वाली सालाना उच्च स्तरीय बैठक में इस पर चर्चा होने की उम्मीद है। स्थानीय सिंचाई अफसर बैठक की तैयारियों में जुटे रहे।     
 
बरुआसागर में आकर मिलेगी मुख्य नहर
केन-बेतवा जलपरियोजना झांसी के लिहाज से काफी अहम परियोजना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में देश की 37 नदियों को आपस में जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। उसमें इस परियोजना को सबसे पहले आरंभ करने निर्णय लिया गया था। करीब छह हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य बांध पन्ना के टाइगर रिजर्व के डोंदन गांव पर बनाया जाना है। इसके जरिए चार बांध बनाए जाने हैं। यह सभी बांध मप्र में ही बनाए जाने हैं। 218 किमी लंबी मुख्य नहर झांसी के बरुआसागर में लाकर मिलाने का प्रस्ताव है। इससे झांसी के सूखा ग्रस्त इलाकों तक भी आसानी से पानी पहुंच सकता है। लेकिन, पिछले 15 साल से उप्र एवं मप्र के बीच पानी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
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