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बीकेडी के दो शिक्षकों की नियुक्ति अवैध -City
Updated Tue, 11 Jul 2017 08:31 PM IST
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बीकेडी के दो शिक्षकों की नियुक्ति अवैध
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड महाविद्यालय के दो शिक्षकों की नियुक्ति को शासन ने अवैध करार दिया है। शिक्षकों पर फर्जी तरीके से पिछड़ा वर्ग का लाभ लेकर आयोग से नियुक्ति कराने का आरोप था। मामले की जांच कर रहे उच्च शिक्षा निदेशक ने सोमवार को जारी पत्र में कहा किया कि दोनों शिक्षकों की नियुक्ति सामान्य श्रेणी में ही हो सकती है।
बीकेडी के कार्यवाहक अध्यक्ष केशभान सिंह ने 19 अगस्त 2015 को उच्च शिक्षा निदेशक को प्रत्यावेदन देकर आरोप लगाया था कि मूलरूप से मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ निवासी महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. किशन यादव और डॉ. उमारतन यादव ने सन् 1996 में फर्जी तरीके से पिछड़ा वर्ग का लाभ लेकर आयोग से नियुक्ति करा ली। जबकि, इनकी नियुक्ति सामान्य श्रेणी में होनी चाहिए थी। इस संबंध में उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की गई। छह जुलाई 2015 को निदेशालय स्तर पर हुई सुनवाई के बाद हुए आदेश से क्षुब्ध होकर प्रबंध समिति ने कोर्ट मेें दूसरी याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने निदेशक को जांचकर पुन: प्रकरण निस्तारण के आदेश दिए। निदेशालय स्तर पर सुनवाई चलती रही। सभी पक्षों को मौखिक, लिखित प्रपत्र उपलब्ध कराने को कहा गया। सुनवाई के दौरान डॉ. किशन और डॉ. उमारतन यादव ने कहा कि आयोग में दिए गए आवेदन पत्र की प्रति उनके पास नहीं है। इसलिए उन्हें याद नहीं है कि उनके द्वारा कौन-कौन से प्रपत्र दिए गए थे। मगर शिक्षकों ने हायर सेकेंडरी की अंक सूची व प्रमाण पत्र, बीए, एमए व एमफिल की अंक तालिका उपलब्ध कराने के साथ-साथ बताया कि नियुक्ति के समय उन्होंने न तो कोई तथ्य छुपाए और न ही धोखाधड़ी की। कॉलेज प्राचार्य ने शासन को बताया कि दूसरे प्रांत के पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी को उत्तर प्रदेश में ओबीसी कैटेगरी का लाभ नहीं दिया जा सकता है। यूपी में दोनों शिक्षकों का चयन सामान्य वर्ग में होना चाहिए था। कई पक्षों के जवाब सुनने के बाद सोमवार को जारी पत्र में निदेशक ने कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है कि दोनों प्रवक्ता मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं। आयोग द्वारा इनका चयन सामान्य श्रेणी में ही हो सकता है। ऐसी स्थिति में निदेशालय द्वारा 24 फरवरी 2016 को जारी आदेश को निरस्त किया जाता है। साथ ही आयोग के सचिव को आदेश के क्रम में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
वर्जन..
मिला गया है पत्र
उच्च शिक्षा निदेशक का पत्र मिला है। शासन ने बीकेडी के प्रवक्ता डॉ. किशन यादव और डॉ. उमारतन यादव की नियुक्ति को अवैध माना है।
- डॉ. संध्या रानी, उच्च शिक्षा अधिकारी।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड महाविद्यालय के दो शिक्षकों की नियुक्ति को शासन ने अवैध करार दिया है। शिक्षकों पर फर्जी तरीके से पिछड़ा वर्ग का लाभ लेकर आयोग से नियुक्ति कराने का आरोप था। मामले की जांच कर रहे उच्च शिक्षा निदेशक ने सोमवार को जारी पत्र में कहा किया कि दोनों शिक्षकों की नियुक्ति सामान्य श्रेणी में ही हो सकती है।
बीकेडी के कार्यवाहक अध्यक्ष केशभान सिंह ने 19 अगस्त 2015 को उच्च शिक्षा निदेशक को प्रत्यावेदन देकर आरोप लगाया था कि मूलरूप से मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ निवासी महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. किशन यादव और डॉ. उमारतन यादव ने सन् 1996 में फर्जी तरीके से पिछड़ा वर्ग का लाभ लेकर आयोग से नियुक्ति करा ली। जबकि, इनकी नियुक्ति सामान्य श्रेणी में होनी चाहिए थी। इस संबंध में उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की गई। छह जुलाई 2015 को निदेशालय स्तर पर हुई सुनवाई के बाद हुए आदेश से क्षुब्ध होकर प्रबंध समिति ने कोर्ट मेें दूसरी याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने निदेशक को जांचकर पुन: प्रकरण निस्तारण के आदेश दिए। निदेशालय स्तर पर सुनवाई चलती रही। सभी पक्षों को मौखिक, लिखित प्रपत्र उपलब्ध कराने को कहा गया। सुनवाई के दौरान डॉ. किशन और डॉ. उमारतन यादव ने कहा कि आयोग में दिए गए आवेदन पत्र की प्रति उनके पास नहीं है। इसलिए उन्हें याद नहीं है कि उनके द्वारा कौन-कौन से प्रपत्र दिए गए थे। मगर शिक्षकों ने हायर सेकेंडरी की अंक सूची व प्रमाण पत्र, बीए, एमए व एमफिल की अंक तालिका उपलब्ध कराने के साथ-साथ बताया कि नियुक्ति के समय उन्होंने न तो कोई तथ्य छुपाए और न ही धोखाधड़ी की। कॉलेज प्राचार्य ने शासन को बताया कि दूसरे प्रांत के पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी को उत्तर प्रदेश में ओबीसी कैटेगरी का लाभ नहीं दिया जा सकता है। यूपी में दोनों शिक्षकों का चयन सामान्य वर्ग में होना चाहिए था। कई पक्षों के जवाब सुनने के बाद सोमवार को जारी पत्र में निदेशक ने कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है कि दोनों प्रवक्ता मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं। आयोग द्वारा इनका चयन सामान्य श्रेणी में ही हो सकता है। ऐसी स्थिति में निदेशालय द्वारा 24 फरवरी 2016 को जारी आदेश को निरस्त किया जाता है। साथ ही आयोग के सचिव को आदेश के क्रम में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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मिला गया है पत्र
उच्च शिक्षा निदेशक का पत्र मिला है। शासन ने बीकेडी के प्रवक्ता डॉ. किशन यादव और डॉ. उमारतन यादव की नियुक्ति को अवैध माना है।
- डॉ. संध्या रानी, उच्च शिक्षा अधिकारी।