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नाबालिग का अपहरण व दुष्कर्म में सात वर्ष की सजा

Thu, 09 May 2019 02:43 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 May 2019 02:43 AM IST
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नाबालिग का अपहरण व दुष्कर्म में सात वर्ष की सजा
नाबालिग का अपहरण व दुष्कर्म में साल साल की सजा
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झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) संजय कुमार सिंह की अदालत ने अपहरण कर दुष्कर्म व जान से मारने की धमकी का दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय कुमार पांडेय के अनुसार 26 जून 2012 को थाना बड़ागांव इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने तहरीर देते हुये बताया था कि उसके ही गांव व बिरादरी के मोहन, लक्ष्मन व बनमाली उसके परिवार से रंजिश मानते हैं। मोहन की ससुराल दानीपुरा बरुआसागर में है। उसका सगा साला कलूटा उर्फ ओम प्रकाश लगभग एक साल से मोहन के घर ग्राम बावल ढिमरपुरा में रह रहा था। कभी-कभी लक्ष्मन व बनमाली के घर भी रूक जाता था। रमेश का मकान भी उक्त लोगों के मकान के पास है। उसकी 13 वर्षीय पुत्री कक्षा छह में पढती थी। वह 11 अप्रैल 2012 को स्कूल गई थी। इसी बीच कलूटा ने उसे बहला फुसला कर किसी बहाने से अपने बहनोई की साईकिल पर बैठाकर स्कूल से भगा ले गया है। काफी तलाश के बाद भी पुत्री का पता नहीं चला। कलूटा भी उसी दिन से घर से गायब है।
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थाना बड़ागांव में शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर डीआईजी व एसएसपी से शिकायत कर पत्र भेजा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। पुत्री की हत्या की आशंका जताते हुये बताया कि उसे जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने कलूटा, मोहन, लक्ष्मन व बनमाली ढीमर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना उपरांत कलूटा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। बुधवार को आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय ने अभियुक्त कलूटा उर्फ ओम प्रकाश को धारा 376 के अपराध में सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 366 के अपराध में पांच वर्ष का कारावास, पांच हजार रुपये अर्थदण्ड, अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसी तरह, धारा 363 में चार वर्ष का कारावास, पांच हजार रुपये अर्थदंड, अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 506 के अपराध में एक वर्ष के कारावास, एक हजार रुपये अर्थदंड, अदा न करने पर 15 दिन के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। जमा अर्थदंड राशि में से पीड़िता को पचास प्रतिशत धनराशि प्रदान की जायेगी।
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