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यहां गायें मरतीं रहीं, वहां क्लेम के फार्म भरते रहे
ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2016 01:29 AM IST
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झांसी। गायों की मौत के मामले में कर्मचारियों पर गड़बड़ी का ठीकरा फोड़ने वाले शाहजहांपुर स्थित शिखर दुग्ध डेयरी फार्म के संचालकों का षड्यंत्र उजागर हुआ है। गायों की लगातार हो रही मौत के बाद भी व्यवस्थाएं न सुधार कर कंपनी बीमा क्लेम वसूलने की कोशिश में रही। हालांकि, उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी। फाइल किए गए तीन दर्जन क्लेम पर सर्वेयर ने आपत्ति लगा दी, जिससे अब तक क्लेम नहीं मिल सका है।
शिखर डेयरी के संचालकों ने गायों का न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की नई दिल्ली स्थित एक शाखा से बीमा कराया था। डेयरी में एक साल में हुई 99 गायों की मौत के मामले में करीब साठ गायों का पोस्टमार्टम कराया गया था।
झांसी में स्थित न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की शाखा में नई दिल्ली ब्रांच से गायों की मौत के क्लेम का सर्वे करने के लिए करीब तीन दर्जन मामले शिखर डेयरी के आए थे। कंपनी की ओर से सर्वे करने वाले अधिवक्ताओं ने सभी क्लेम पर आपत्ति लगादी गई।
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विभागीय प्रक्रिया के अनुसार जिन पशुओं का बीमा किया जाता है, उसके कान में बीमा कंपनी का एक टैग लगाया जाता है, जिससे यह तय हो कि मरने वाला पशु बीमित था। क्लेम लेने के लिए मृत पशु का फोटो एवं टैग लगे कान को काट कर लगाया जाता है।
कंपनी की ओर से जितनी भी गायों की मौत का क्लेम किया गया था, उनमें से एक भी गाय के कान में टैग नहीं लगा था। वहीं कई क्लेम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं लगाई गई थी। यही वजह रही कि सभी सर्वे रिपोर्ट में नो क्लेम लिख कर यहां से भेजा गया है।
दो और गायों ने तोड़ा दम
मोंठ (झांसी)। शाहजहांपुर दुग्ध डेयरी में गायों की मौतों का सिलसिला जारी है। बुधवार को दो और गाय ने दम तोड़ दिया। डेयरी में भीषण सर्दी के बीच गायों का बुरा हाल है।
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शिखर डेयरी के संचालकों ने गायों का न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की नई दिल्ली स्थित एक शाखा से बीमा कराया था। डेयरी में एक साल में हुई 99 गायों की मौत के मामले में करीब साठ गायों का पोस्टमार्टम कराया गया था।
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झांसी में स्थित न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की शाखा में नई दिल्ली ब्रांच से गायों की मौत के क्लेम का सर्वे करने के लिए करीब तीन दर्जन मामले शिखर डेयरी के आए थे। कंपनी की ओर से सर्वे करने वाले अधिवक्ताओं ने सभी क्लेम पर आपत्ति लगादी गई।
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विभागीय प्रक्रिया के अनुसार जिन पशुओं का बीमा किया जाता है, उसके कान में बीमा कंपनी का एक टैग लगाया जाता है, जिससे यह तय हो कि मरने वाला पशु बीमित था। क्लेम लेने के लिए मृत पशु का फोटो एवं टैग लगे कान को काट कर लगाया जाता है।
कंपनी की ओर से जितनी भी गायों की मौत का क्लेम किया गया था, उनमें से एक भी गाय के कान में टैग नहीं लगा था। वहीं कई क्लेम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं लगाई गई थी। यही वजह रही कि सभी सर्वे रिपोर्ट में नो क्लेम लिख कर यहां से भेजा गया है।
दो और गायों ने तोड़ा दम
मोंठ (झांसी)। शाहजहांपुर दुग्ध डेयरी में गायों की मौतों का सिलसिला जारी है। बुधवार को दो और गाय ने दम तोड़ दिया। डेयरी में भीषण सर्दी के बीच गायों का बुरा हाल है।