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जगह-जगह लंगर और फातिहा का दौर
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रात में रापटगंज में अपने स्थान पर रखा अलम।
- फोटो : ORAI
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जालौन। मुहर्रम के त्योहार में मंगलवार की रात में अलम रखे गए। इसके बाद बुधवार को दिन में छड़ें रखी गई। स्थानीय प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था से सभी कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुए। कोविड के चलते अलम व छड़ों को उठाया नहीं गया अैर न ही जूलूस निकला फिर भी लोगों की अकीदत कम नहीं हुईं। जगह-जगह लंगर और फातिहा का दौर चला।
मुहर्रम के त्योहार में ताजिए से दो दिन पहले रात में अलम व उसके अगले दिन छड़ों को निकाला जाता है। नगर में सात स्थानों पर अलम रखे गए और 16 स्थानों पर छड़ें रखी गई। रात में अलम और दिन में छड़ों का जुलूस निकाला जाता था। लेकिन इस बार कोविड प्रोटोकाल के चलते अलम और छड़ों को उठाने की अनुमति नहीं दी गई थी। साथ ही जुलूस पर भी प्रतिबंध था। यही कारण रहा था कि अलमेेेेेेेेेेेेे और छड़ें जिन स्थानों पर रखी गई थीं, वहां से उन्हें नहीं उठाया गया।
रापटगंज में जायदा बेगम समेत सभी स्थानों पर अलम को सजाकर रखा गया। अकीदतमंदों ने मंगलवार की रात वहीं पहुंचकर फातिहा पढ़ी। इसके बाद बुधवार की दोपहर कल्लू व मल्लू पठान के अलावा अजमेरी, अख्तर, छोटे खां, इस्माईल, ख्वाजू, शहाबुद्दीन के यहां रखी गई छड़ों पर महिलाओं और अकीदतमंदों ने दुपट्टा बांधकर अपनी मुराद पूरी होने की कामना की। इस दौरान अकीदतमंद इमाम हसन व इमाम हुसैन के नारों लगा रहे थे। अकीदतमंदों द्वारा जगह-जगह लंगर का भी आयोजन किया गया। घरों पर फातिहा का दौर चला और इमाम हसन व इमाम हुसैन को याद किया गया। अलम और छड़ों में कहीं कोई अव्यवस्था न हो इसके लिए स्थानीय पुलिस फोर्स के अलावा बाहर की भी पुलिस फोर्स तैनात रही। एसडीएम मीनू राणा, सीओ विजय आनंद, कोतवाल सुनील सिंह भ्रमण कर पल-पल की खबर लेते रहे।
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मुहर्रम के त्योहार में ताजिए से दो दिन पहले रात में अलम व उसके अगले दिन छड़ों को निकाला जाता है। नगर में सात स्थानों पर अलम रखे गए और 16 स्थानों पर छड़ें रखी गई। रात में अलम और दिन में छड़ों का जुलूस निकाला जाता था। लेकिन इस बार कोविड प्रोटोकाल के चलते अलम और छड़ों को उठाने की अनुमति नहीं दी गई थी। साथ ही जुलूस पर भी प्रतिबंध था। यही कारण रहा था कि अलमेेेेेेेेेेेेे और छड़ें जिन स्थानों पर रखी गई थीं, वहां से उन्हें नहीं उठाया गया।
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रापटगंज में जायदा बेगम समेत सभी स्थानों पर अलम को सजाकर रखा गया। अकीदतमंदों ने मंगलवार की रात वहीं पहुंचकर फातिहा पढ़ी। इसके बाद बुधवार की दोपहर कल्लू व मल्लू पठान के अलावा अजमेरी, अख्तर, छोटे खां, इस्माईल, ख्वाजू, शहाबुद्दीन के यहां रखी गई छड़ों पर महिलाओं और अकीदतमंदों ने दुपट्टा बांधकर अपनी मुराद पूरी होने की कामना की। इस दौरान अकीदतमंद इमाम हसन व इमाम हुसैन के नारों लगा रहे थे। अकीदतमंदों द्वारा जगह-जगह लंगर का भी आयोजन किया गया। घरों पर फातिहा का दौर चला और इमाम हसन व इमाम हुसैन को याद किया गया। अलम और छड़ों में कहीं कोई अव्यवस्था न हो इसके लिए स्थानीय पुलिस फोर्स के अलावा बाहर की भी पुलिस फोर्स तैनात रही। एसडीएम मीनू राणा, सीओ विजय आनंद, कोतवाल सुनील सिंह भ्रमण कर पल-पल की खबर लेते रहे।
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