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Jalaun News: 20 साल का इंतजार खत्म, तीन गांवों को मिलेगी सड़क

Sat, 29 Aug 2026 12:40 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:40 AM IST
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20-year wait ends; three villages to get a road.
फोटो - 02 गालमपुरा की बदहाल सड़क। संवाद
फोटो - 02 गालमपुरा की बदहाल सड़क। संवाद
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3.23 करोड़ से बनेगी 2.45 किमी सड़क, बारिश में 20 किमी घूमकर माधौगढ़ पहुंचते थे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
माधौगढ़। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत गालमपुरा से गीधन की खोड़ तक सड़क निर्माण को मंजूरी मिल गई है। करीब 3.23 करोड़ रुपये की लागत से 2.45 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया जाएगा। सड़क बनने से असहना ग्राम पंचायत के मजरा गीधन की खोड़, मचकछा समेत तीन गांवों की करीब तीन हजार आबादी को आवागमन में राहत मिलेगी।

माधौगढ़ के असहना ग्राम पंचायत के मजरा गीधन की खोड़ और मचकछा के ग्रामीणों को गालमपुरा होकर माधौगढ़ आना-जाना पड़ता है। गालमपुरा से गीधन की खोड़ तक करीब 2.45 किलोमीटर रास्ता लंबे समय से कच्चा था। इसमें करीब एक किलोमीटर हिस्सा वन विभाग की भूमि में आता है। बारिश के दिनों में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से आवागमन मुश्किल हो जाता था।
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ग्रामीणों छोटे पाल, थान सिंह, पृथ्वीराज सिंह और सुनील सिंह ने बताया कि गीधन की खोड़ से माधौगढ़ की दूरी करीब 10 किलोमीटर है, लेकिन बारिश में रास्ता खराब होने के कारण मींगनी होकर करीब 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले 20 वर्षों से करीब तीन किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग की जा रही थी। विधायक, सांसद, विधान परिषद सदस्य और जिलाधिकारी तक से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।
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चारपाई पर मरीज को ले जाना पड़ा था

ग्रामीण संजू पाल, भारत सिंह, ज्ञान पाल और रामकरन पाल ने बताया कि बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होती थी। गीधन की खोड़ निवासी सुमेर पाल की तबीयत खराब होने पर रास्ता खराब होने के कारण उन्हें माधौगढ़ पहुंचाना मुश्किल हो गया था। परिजन उन्हें चारपाई पर रखकर गालमपुरा तक ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण ऐसे कई मामलों में लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा।


आधा-अधूरा पुल और वन भूमि बनी बाधा

मचकछा निवासी बलवीर पाल ने बताया कि रास्ते में करीब एक किलोमीटर हिस्सा वन विभाग की भूमि में है। गीधन नाले पर बना आधा-अधूरा पुल भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। बारिश के दौरान बीमार लोगों और बच्चों को माधौगढ़ पहुंचाना मुश्किल हो जाता था।
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