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हाथरस : गोवंश की दुर्दशा की खबरों पर गोशाला में प्रवेश रोका
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हाथरस : पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में मौजूद गोवंश। संवाद
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में चारे पानी की कमी से गोवंश के मरने और उनकी दुर्दशा की खबरें प्रशासन के गले की फांस बन गई हैं। प्रशासन ने कमियां छिपाने के लिए मीडिया कर्मियों के अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। गोशाला में ठंड से गोवंश के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। गोवंश अब भी चारे-पानी के लिए मोहताज है, लेकिन बजाय इस पर ध्यान देने के प्रशासन कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटा है।
दरअसल, शासन से अस्थायी गोशाला में गोवंश की देखरेख के लिए मिलने वाला बजट नाकाफी साबित हो रहा है। एक गोवंश के ढाई किलो चारे के लिए 30 रुपये मिलते हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व शासन द्वारा बनाई गई अस्थायी गोशाला की स्थापना की गई थी। इसमें लाचार गोवंश को कैद किया गया था, लेकिन आज भी किसान रात को खेतों पर पहरा देकर आवारा पशुओं से खेतों की रखवाली कर रहे हैं।
अहम सवाल यह है कि शासन द्वारा गोशालाओं के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई संसाधन गोशाला में उपलब्ध नहीं हैं। प्रशासन की टैगिंग के हिसाब से यहां करीब 1,400 गोवंश मौजूद हैं। बीमार और लाचार गोवंश के लिए चारे-पानी एवं दवाओं का संकट है। इस कारण गोवंश रोजाना सिसक-सिसककर दम तोड़ता जा रहा है। गोवंश के शवों को बिना पोस्टमार्टम के ही दफना दिया जाता है। संवाद
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पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में चारे पानी की कमी से गोवंश के मरने और उनकी दुर्दशा की खबरें प्रशासन के गले की फांस बन गई हैं। प्रशासन ने कमियां छिपाने के लिए मीडिया कर्मियों के अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। गोशाला में ठंड से गोवंश के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। गोवंश अब भी चारे-पानी के लिए मोहताज है, लेकिन बजाय इस पर ध्यान देने के प्रशासन कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटा है।
दरअसल, शासन से अस्थायी गोशाला में गोवंश की देखरेख के लिए मिलने वाला बजट नाकाफी साबित हो रहा है। एक गोवंश के ढाई किलो चारे के लिए 30 रुपये मिलते हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व शासन द्वारा बनाई गई अस्थायी गोशाला की स्थापना की गई थी। इसमें लाचार गोवंश को कैद किया गया था, लेकिन आज भी किसान रात को खेतों पर पहरा देकर आवारा पशुओं से खेतों की रखवाली कर रहे हैं।
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अहम सवाल यह है कि शासन द्वारा गोशालाओं के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई संसाधन गोशाला में उपलब्ध नहीं हैं। प्रशासन की टैगिंग के हिसाब से यहां करीब 1,400 गोवंश मौजूद हैं। बीमार और लाचार गोवंश के लिए चारे-पानी एवं दवाओं का संकट है। इस कारण गोवंश रोजाना सिसक-सिसककर दम तोड़ता जा रहा है। गोवंश के शवों को बिना पोस्टमार्टम के ही दफना दिया जाता है। संवाद
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