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हाथरस : ई-रिक्शा चालक की हत्या करने वाले को सुनाई उम्रकैद की सजा
सार
अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।अभियोजन पक्ष के अनुसार 24 जनवरी 2019 को थाना हाथरस गेट क्षेत्र में हतीसा पुल के पास एक शव गड्ढे में मिला था। पुलिस ने इस मामले में दीपक उर्फ दीपू पुत्र हरीशंकर निवासी नगला चिंरजी थाना जमुनापार जिला मथुरा को गिरफ्तार किया था। यदि इस व्यक्ति को मृत जीशान के ई-रिक्शा और उसके शव के बारे में जानकारी थी तो यह निष्कर्ष निकला कि उसी के द्वारा जीशान की हत्या की गई थी।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
एक ई-रिक्शा चालक की हत्या के मामले में एडीजे द्वितीय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 24 जनवरी 2019 को थाना हाथरस गेट क्षेत्र में हतीसा पुल के पास एक शव गड्ढे में मिला था। मृतक की पहचान जीशान पुत्र कल्लू खां निवासी कैमार थाना चंदपा के रूप में हुई थी। शव की बरामदगी की सूचना एक अनजान व्यक्ति ने मृतक के मोबाइल फोन से उसके पिता कल्लू खां को दी थी। परिजनों ने शव की शिनाख्त की थी।
पुलिस ने शव का का पोस्टमार्टम कराया था। इसमें यह पाया गया था कि जीशान की हत्या गला दबाकर की गई थी। इस मामले में थाने में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस मामले में दीपक उर्फ दीपू पुत्र हरीशंकर निवासी नगला चिंरजी थाना जमुनापार जिला मथुरा को गिरफ्तार किया था। उससे मृतक का मोबाइल फोन भी मिला था। इस मामले में पुलिस ने दीपक के विरुद्ध आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया।
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मामले की सुनवाई अपर जिला जज द्वितीय विनीत चौधरी के न्यायालय में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दीपक को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने पैरवी की। संवाद
मोबाइल फोन ने सजा दिलाने में निभाई अहम भूमिका
हाथरस। इस हत्याकांड में अभियुक्त को सजा दिलाने में मोबाइल फोन ने अहम भूमिका निभाई। इस हत्याकांड का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था। पूरा मामला अभियुक्त दीपक से मृत जीशान के मोबाइल की बरामदगी पर आधारित था। यह पाया गया कि घटना वाले दिन समय शाम छह बजकर 22 मिनट से छह बजकर 23 मिनट तक मृतक जीशान के मोबाइल फोन की लोकेशन इगलास अड्डा हाथरस पर थी। सात बजकर 56 मिनट पर जीशान के मोबाइल फोन की लोकेशन अलीगढ़ ग्रामीण बैंक मुरसान पाई गई। एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने बताया कि हतीसा पुल के नीचे कोई बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन भी नहीं है। तालाब चौराहे से हतीसा पुलिस की दूरी करीब ढाई किमी है। यह भी पाया गया कि अनजान व्यक्ति द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर मृतक के ई-रिक्शा की उसी स्थान से बरामदगी हुई, जहां उसके द्वारा बताई गई थी। दूसरे दिन मृतक का शव भी वहीं से एक गड्ढे से बरामद हुआ। इससे यह साबित हुआ कि जिस व्यक्ति से जीशान के पिता कल्लू की बातचीत हो रही थी, उसे जीशान की हत्या के मामले में पूरी जानकारी थी। उसी व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर अहम तथ्य प्रकाश में आए। यदि इस व्यक्ति को मृत जीशान के ई-रिक्शा और उसके शव के बारे में जानकारी थी तो यह निष्कर्ष निकला कि उसी के द्वारा जीशान की हत्या की गई थी। मोबाइल फोन चूंकि दीपक से बरामद हुआ था, ऐसे में दीपक द्वारा ही जीशान की हत्या की गई थी। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से 13 दस्तावेजी साक्ष्य व सात गवाहों को प्रस्तुत कर मामले को साबित किया गया।
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एक ई-रिक्शा चालक की हत्या के मामले में एडीजे द्वितीय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 24 जनवरी 2019 को थाना हाथरस गेट क्षेत्र में हतीसा पुल के पास एक शव गड्ढे में मिला था। मृतक की पहचान जीशान पुत्र कल्लू खां निवासी कैमार थाना चंदपा के रूप में हुई थी। शव की बरामदगी की सूचना एक अनजान व्यक्ति ने मृतक के मोबाइल फोन से उसके पिता कल्लू खां को दी थी। परिजनों ने शव की शिनाख्त की थी।
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पुलिस ने शव का का पोस्टमार्टम कराया था। इसमें यह पाया गया था कि जीशान की हत्या गला दबाकर की गई थी। इस मामले में थाने में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस मामले में दीपक उर्फ दीपू पुत्र हरीशंकर निवासी नगला चिंरजी थाना जमुनापार जिला मथुरा को गिरफ्तार किया था। उससे मृतक का मोबाइल फोन भी मिला था। इस मामले में पुलिस ने दीपक के विरुद्ध आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया।
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मामले की सुनवाई अपर जिला जज द्वितीय विनीत चौधरी के न्यायालय में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दीपक को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने पैरवी की। संवाद
मोबाइल फोन ने सजा दिलाने में निभाई अहम भूमिका
हाथरस। इस हत्याकांड में अभियुक्त को सजा दिलाने में मोबाइल फोन ने अहम भूमिका निभाई। इस हत्याकांड का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था। पूरा मामला अभियुक्त दीपक से मृत जीशान के मोबाइल की बरामदगी पर आधारित था। यह पाया गया कि घटना वाले दिन समय शाम छह बजकर 22 मिनट से छह बजकर 23 मिनट तक मृतक जीशान के मोबाइल फोन की लोकेशन इगलास अड्डा हाथरस पर थी। सात बजकर 56 मिनट पर जीशान के मोबाइल फोन की लोकेशन अलीगढ़ ग्रामीण बैंक मुरसान पाई गई। एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने बताया कि हतीसा पुल के नीचे कोई बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन भी नहीं है। तालाब चौराहे से हतीसा पुलिस की दूरी करीब ढाई किमी है। यह भी पाया गया कि अनजान व्यक्ति द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर मृतक के ई-रिक्शा की उसी स्थान से बरामदगी हुई, जहां उसके द्वारा बताई गई थी। दूसरे दिन मृतक का शव भी वहीं से एक गड्ढे से बरामद हुआ। इससे यह साबित हुआ कि जिस व्यक्ति से जीशान के पिता कल्लू की बातचीत हो रही थी, उसे जीशान की हत्या के मामले में पूरी जानकारी थी। उसी व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर अहम तथ्य प्रकाश में आए। यदि इस व्यक्ति को मृत जीशान के ई-रिक्शा और उसके शव के बारे में जानकारी थी तो यह निष्कर्ष निकला कि उसी के द्वारा जीशान की हत्या की गई थी। मोबाइल फोन चूंकि दीपक से बरामद हुआ था, ऐसे में दीपक द्वारा ही जीशान की हत्या की गई थी। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से 13 दस्तावेजी साक्ष्य व सात गवाहों को प्रस्तुत कर मामले को साबित किया गया।