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हाथरस : रोमानिया एवं पोलैंड के रास्ते स्वदेश पहुंचीं अनुष्का और लिपि
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मां से गले मिलती लिपि उपाध्याय। संवाद
- फोटो : SHAPHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ/सादाबाद।
रूस के साथ चल रहे युद्ध के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के परिजनों की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। इधर, एक-एक करके भारतीय छात्र घर पहुंचने लगे हैं। अपने बच्चों के घर पहुंचने के बाद परिजन राहत महसूस कर रहे हैं। कस्बे के कई छात्र-छात्राएं अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं और लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं।
पंजाब नेशनल बैंक के सामने हाथरस रोड निवासी अनिल गौतम की बेटी अनुष्का गौतम मंगलवार देर रात सुरक्षित घर पहुंच गई है। कई दिनों के संघर्ष और जानलेवा स्थितियों से निकलने के बाद घर पहुंचीं अनुष्का के परिजनों की आंखें भर्र आइं। अनुष्का गौतम ने बताया कि वह टारनोपिल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की चौथे वर्ष में अध्ययनरत हैं।
21 फरवरी से ही यूक्रेन में हालात खराब होने लगे थे। यूनिवर्सिटी ग्रुप से मिले निर्देशों के अनुसार उन्हें 25 फरवरी तक शेल्टर होम में रुकना पड़ा। यहां खाने-पीने और रहने की ज्यादा बेहतर व्यवस्था नहीं थी। अनुष्का 26 फरवरी को शेल्टर होम से रोमानिया सीमा के लिए रवाना हुई। रोमानिया में प्रवेश के लिए भी अनुष्का को काफी कुछ सहना पड़ा।
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24 घंटे इंतजार के बाद यूक्रेन से अनुष्का को रोमानिया में एंट्री मिल सकी। रोमानिया में प्रवेश के बाद एंबेसी ऑफ इंडिया इन रोमानिया की टीम द्वारा उन्हें पूरी मदद की गई। खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ उन्हें यह विश्वास भी दिलाया गया कि जल्द ही उन्हें घर वापस भेज दिया जाएगा। इस तरह के आश्वासन के बाद अनुष्का और अन्य छात्र-छात्राओं ने राहत की सांस ली।
अनुष्का ने बताया उनकी दोस्त लिपि उपाध्याय सहित करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राएं शेल्टर होम में रुके हुए थे। यह सभी यूक्रेन में खराब होते हालातों के बीच अलग-अलग सीमा के लिए रवाना हुए थे। संघर्ष के इन दिनों में यूक्रेन की सरकारी एजेंसी, यूक्रेन के योद्धाओं का व्यवहार बहुत ज्यादा अच्छा नहीं था।
खाना बहुत कम मात्रा में मिल रहा था। इसमें भी खाना मांसाहारी होता था। जो लोग शाकाहारी खाने वाले थे, उन्हें चाय और बिस्किट से काम चलाना पड़ रहा था। रोमानिया से भारतीय दूतावास ने अनुष्का को मंगलवार को इंडिया के लिए रवाना किया था। देर रात अनुष्का के पिता अनिल गौतम उन्हें लेकर घर पहुंचे तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।
अनुष्का के घर वापसी से दादी प्रकाशवती गौतम, पिता अनिल गौतम, मां बृजेश देवी, भाई आकाश, अभय और अजय बेहद खुश हैं। अनुष्का ने सरकार को धन्यवाद देते हुए अपील की है कि अन्य छात्र-छात्राओं को भी जल्द घर लाया जाए।
इधर, बुधवार की दोपहर को यूक्रेन में कई दिन के संघर्ष के बाद घर लौटीं लिपि उपाध्याय ने भारत सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि चाहे जो कुछ भी हुआ, हमें राजनीतिक हथकंडों नहीं पड़ना। हमारी तो सरकार ने मदद की है। हम कितनी मुश्किलों में फंस गए थे। वहां खाना तक नसीब नहीं था।
यूक्रेन सरकार हमारी कोई मदद नहीं कर रही थी। उनकी सेना ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। हमारी सरकार ने यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं की मदद की है। इस तरह की कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शिक्षा और हौसला बनाए रखने की सीख उसे परिवार से मिली है।
अगर वह आज सुरक्षित घर लौट पाई है तो इसमें परिजनों की अहम भूमिका है। लिपि ने यह भी कहा है कि भारत सरकार इस तरह की हेल्पलाइन शुरू करें, जिससे विदेशों में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं किसी तरह की परेशानी और समस्या की शिकायत कर सकें।
हेल्पलाइन के जरिये उन्हें तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं को कभी ईमेल, कभी सोशल मीडिया, कभी ट्वीट के जरिये भारत सरकार से मदद मांगी पड़ी। विदेश में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की मदद के लिए सरकार कोई बेहतर व्यवस्था करे।
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रूस के साथ चल रहे युद्ध के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के परिजनों की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। इधर, एक-एक करके भारतीय छात्र घर पहुंचने लगे हैं। अपने बच्चों के घर पहुंचने के बाद परिजन राहत महसूस कर रहे हैं। कस्बे के कई छात्र-छात्राएं अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं और लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं।
पंजाब नेशनल बैंक के सामने हाथरस रोड निवासी अनिल गौतम की बेटी अनुष्का गौतम मंगलवार देर रात सुरक्षित घर पहुंच गई है। कई दिनों के संघर्ष और जानलेवा स्थितियों से निकलने के बाद घर पहुंचीं अनुष्का के परिजनों की आंखें भर्र आइं। अनुष्का गौतम ने बताया कि वह टारनोपिल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की चौथे वर्ष में अध्ययनरत हैं।
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21 फरवरी से ही यूक्रेन में हालात खराब होने लगे थे। यूनिवर्सिटी ग्रुप से मिले निर्देशों के अनुसार उन्हें 25 फरवरी तक शेल्टर होम में रुकना पड़ा। यहां खाने-पीने और रहने की ज्यादा बेहतर व्यवस्था नहीं थी। अनुष्का 26 फरवरी को शेल्टर होम से रोमानिया सीमा के लिए रवाना हुई। रोमानिया में प्रवेश के लिए भी अनुष्का को काफी कुछ सहना पड़ा।
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24 घंटे इंतजार के बाद यूक्रेन से अनुष्का को रोमानिया में एंट्री मिल सकी। रोमानिया में प्रवेश के बाद एंबेसी ऑफ इंडिया इन रोमानिया की टीम द्वारा उन्हें पूरी मदद की गई। खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ उन्हें यह विश्वास भी दिलाया गया कि जल्द ही उन्हें घर वापस भेज दिया जाएगा। इस तरह के आश्वासन के बाद अनुष्का और अन्य छात्र-छात्राओं ने राहत की सांस ली।
अनुष्का ने बताया उनकी दोस्त लिपि उपाध्याय सहित करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राएं शेल्टर होम में रुके हुए थे। यह सभी यूक्रेन में खराब होते हालातों के बीच अलग-अलग सीमा के लिए रवाना हुए थे। संघर्ष के इन दिनों में यूक्रेन की सरकारी एजेंसी, यूक्रेन के योद्धाओं का व्यवहार बहुत ज्यादा अच्छा नहीं था।
खाना बहुत कम मात्रा में मिल रहा था। इसमें भी खाना मांसाहारी होता था। जो लोग शाकाहारी खाने वाले थे, उन्हें चाय और बिस्किट से काम चलाना पड़ रहा था। रोमानिया से भारतीय दूतावास ने अनुष्का को मंगलवार को इंडिया के लिए रवाना किया था। देर रात अनुष्का के पिता अनिल गौतम उन्हें लेकर घर पहुंचे तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।
अनुष्का के घर वापसी से दादी प्रकाशवती गौतम, पिता अनिल गौतम, मां बृजेश देवी, भाई आकाश, अभय और अजय बेहद खुश हैं। अनुष्का ने सरकार को धन्यवाद देते हुए अपील की है कि अन्य छात्र-छात्राओं को भी जल्द घर लाया जाए।
इधर, बुधवार की दोपहर को यूक्रेन में कई दिन के संघर्ष के बाद घर लौटीं लिपि उपाध्याय ने भारत सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि चाहे जो कुछ भी हुआ, हमें राजनीतिक हथकंडों नहीं पड़ना। हमारी तो सरकार ने मदद की है। हम कितनी मुश्किलों में फंस गए थे। वहां खाना तक नसीब नहीं था।
यूक्रेन सरकार हमारी कोई मदद नहीं कर रही थी। उनकी सेना ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। हमारी सरकार ने यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं की मदद की है। इस तरह की कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शिक्षा और हौसला बनाए रखने की सीख उसे परिवार से मिली है।
अगर वह आज सुरक्षित घर लौट पाई है तो इसमें परिजनों की अहम भूमिका है। लिपि ने यह भी कहा है कि भारत सरकार इस तरह की हेल्पलाइन शुरू करें, जिससे विदेशों में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं किसी तरह की परेशानी और समस्या की शिकायत कर सकें।
हेल्पलाइन के जरिये उन्हें तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं को कभी ईमेल, कभी सोशल मीडिया, कभी ट्वीट के जरिये भारत सरकार से मदद मांगी पड़ी। विदेश में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की मदद के लिए सरकार कोई बेहतर व्यवस्था करे।