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Hathras News: पांच गांवों में सात गोवंश की मौत, किसान बोले-लंपी का कहर, विभाग ने कहा-जांच होगी
Thu, 10 Sep 2026 02:23 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 10 Sep 2026 02:23 AM IST
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गांव एदलपुर में लंपी जैसी बीमारी से पीड़ित गोवंश। संवाद
- फोटो : Samvad
श्री कृष्णा चौधरी
बिसावर। क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में पांच गांवों में सात गोवंश की मौत होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशुपालकों का कहना है कि पशु लंपी के कहर के शिकार हो रहे हैं, जबकि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दुधारू मवेशियों की अचानक हो रही मौत से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि कागजों में बीमारियों की रोकथाम का दावा करने वाले विभाग का कोई भी अधिकारी या पशु चिकित्सकों की टीम शिकायतों के बावजूद उनके गांवों में नहीं पहुंची हे। गरीब पशुपालक भारी-भरकम फीस चुकाकर निजी डॉक्टरों से इलाज कराने पर मजबूर हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। संवाद
केस 1--
एदलपुर : गांव पहुंचने पर पशुपालकों ने रुंधे गले से अपनी आपबीती सुनाई। रामवीर सिंह उर्फ सर्रे, सुनील सिंह उर्फ अवतार और ममता देवी ने बताया कि उनकी गायों की मौत हो चुकी है। यह स्थिति लंपी के कारण बनी है। वहीं रणवीर सिंह, महाशय शर्मा, यादराम, भगीरथ सिंह, धर्मपाल सिंह और माधुरी देवी के गोवंश भी गंभीर अवस्था में बीमार हैं। यहां पशुपालक सरकारी महकमे के पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
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केस 2-
पोदा : मुकेश डीलर ने बताया कि उनकी गाय की मौत 08 सितंबर को हुई है। उनकी गाय लंपी से ग्रस्त थी। गांव के राकेश कुमार की गाय मरणासन्न अवस्था में है। भूपेंद्र सिंह, प्रमोद फौजी और प्रेमपाल सिंह का कहना है कि पशु लंपी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। संक्रमण इतना खतरनाक है कि प्रमोद फौजी को अपनी गाय के घावों को मक्खी-मच्छरों से बचाने के लिए उन पर कपड़ा बांधना पड़ रहा है।
केस 3 -
मोनिया एवं बिचपुरी : मोनिया निवासी भूरी सिंह और नागा सिंह का कहना है कि उनके पशुओं में लंपी फैला हुआ है। सरकारी चिकित्सक की टीम अभी तक गांव में पशुओं को देखने तक नहीं आई है। वहीं बिचपुरी में कप्तान सिंह और करूआ ठेनुआं की गायें भी गंभीर रूप से संक्रमित मिलीं।
केस 4-
मीरपुर : गांव में केवल दो दिनों के भीतर दिगंबर सिंह, लालता प्रसाद और हरिराम की दुधारू गायों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। पशुपालकों का कहना है कि लंपी वायरस से गोवंश की मौत हुई है। अभी तक गांव में पशु चिकित्सा विभाग की कोई टीम नहीं आई है। अन्य पशुओं में भी बीमारी तेजी से फैल रही है।
बृहस्पतिवार की सुबह पशु चिकित्सा विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में जाकर बीमार पशुओं की जांच करेंगी और उन्हें समुचित उपचार भी मुहैया कराएंगीं। लंपी वायरस से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। जांच के बाद स्पष्ट होगा कि ऐसा लंपी के कारण हो रहा है या फिर किसी और बीमारी की वजह से।
-डाॅ.सुनील तोमर, उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी
ऐसे करें बचाव
-संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और उनके आवागमन पर रोक लगाएं।
-पशुबाड़े में साफ-सफाई और कीटाणुनाशक का छिड़काव करें।
-मक्खी, मच्छर और किलनी से बचाव के लिए आवश्यक कीटनाशक का प्रयोग करें।
-पहले स्वस्थ और बाद में बीमार पशुओं को चारा-पानी देने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।
यह होते हैं लंपी के लक्षण
यह विषाणुजनित रोग है। संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना, पैरों में सूजन और शरीर पर कठोर एवं चपटी गांठें पड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में पशु के कमजोर होने के साथ उसका वजन और दूध उत्पादन भी कम हो सकता है।
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बिसावर। क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में पांच गांवों में सात गोवंश की मौत होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशुपालकों का कहना है कि पशु लंपी के कहर के शिकार हो रहे हैं, जबकि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दुधारू मवेशियों की अचानक हो रही मौत से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि कागजों में बीमारियों की रोकथाम का दावा करने वाले विभाग का कोई भी अधिकारी या पशु चिकित्सकों की टीम शिकायतों के बावजूद उनके गांवों में नहीं पहुंची हे। गरीब पशुपालक भारी-भरकम फीस चुकाकर निजी डॉक्टरों से इलाज कराने पर मजबूर हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। संवाद
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केस 1
एदलपुर : गांव पहुंचने पर पशुपालकों ने रुंधे गले से अपनी आपबीती सुनाई। रामवीर सिंह उर्फ सर्रे, सुनील सिंह उर्फ अवतार और ममता देवी ने बताया कि उनकी गायों की मौत हो चुकी है। यह स्थिति लंपी के कारण बनी है। वहीं रणवीर सिंह, महाशय शर्मा, यादराम, भगीरथ सिंह, धर्मपाल सिंह और माधुरी देवी के गोवंश भी गंभीर अवस्था में बीमार हैं। यहां पशुपालक सरकारी महकमे के पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
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केस 2-
पोदा : मुकेश डीलर ने बताया कि उनकी गाय की मौत 08 सितंबर को हुई है। उनकी गाय लंपी से ग्रस्त थी। गांव के राकेश कुमार की गाय मरणासन्न अवस्था में है। भूपेंद्र सिंह, प्रमोद फौजी और प्रेमपाल सिंह का कहना है कि पशु लंपी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। संक्रमण इतना खतरनाक है कि प्रमोद फौजी को अपनी गाय के घावों को मक्खी-मच्छरों से बचाने के लिए उन पर कपड़ा बांधना पड़ रहा है।
केस 3 -
मोनिया एवं बिचपुरी : मोनिया निवासी भूरी सिंह और नागा सिंह का कहना है कि उनके पशुओं में लंपी फैला हुआ है। सरकारी चिकित्सक की टीम अभी तक गांव में पशुओं को देखने तक नहीं आई है। वहीं बिचपुरी में कप्तान सिंह और करूआ ठेनुआं की गायें भी गंभीर रूप से संक्रमित मिलीं।
केस 4-
मीरपुर : गांव में केवल दो दिनों के भीतर दिगंबर सिंह, लालता प्रसाद और हरिराम की दुधारू गायों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। पशुपालकों का कहना है कि लंपी वायरस से गोवंश की मौत हुई है। अभी तक गांव में पशु चिकित्सा विभाग की कोई टीम नहीं आई है। अन्य पशुओं में भी बीमारी तेजी से फैल रही है।
बृहस्पतिवार की सुबह पशु चिकित्सा विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में जाकर बीमार पशुओं की जांच करेंगी और उन्हें समुचित उपचार भी मुहैया कराएंगीं। लंपी वायरस से बचाव के लिए पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। जांच के बाद स्पष्ट होगा कि ऐसा लंपी के कारण हो रहा है या फिर किसी और बीमारी की वजह से।
-डाॅ.सुनील तोमर, उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी
ऐसे करें बचाव
-संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और उनके आवागमन पर रोक लगाएं।
-पशुबाड़े में साफ-सफाई और कीटाणुनाशक का छिड़काव करें।
-मक्खी, मच्छर और किलनी से बचाव के लिए आवश्यक कीटनाशक का प्रयोग करें।
-पहले स्वस्थ और बाद में बीमार पशुओं को चारा-पानी देने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।
यह होते हैं लंपी के लक्षण
यह विषाणुजनित रोग है। संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना, पैरों में सूजन और शरीर पर कठोर एवं चपटी गांठें पड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में पशु के कमजोर होने के साथ उसका वजन और दूध उत्पादन भी कम हो सकता है।