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साले ने जीजा को 16 दिन तक बंधक बनाया
Thu, 31 Jan 2019 12:16 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Thu, 31 Jan 2019 12:16 AM IST
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कोतवाल को आपबीती बताता पीड़ित राजेंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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सिकंदराराऊ। पति-पत्नी के विवाद के चलते साले ने जीजा को एटा के एक नलकूप पर 16 दिन तक लगातार बंधक बनाकर रखा। बुधवार को किसी तरह जीजा ट्यूबवेल से भागकर कोतवाली पहुंचा और आपबीती बताई। पुलिस ने पीड़ित के परिजनों को कोतवाली पर बुलाया है।
बेचावली बुलंदशहर निवासी राजेंद्र प्रजापति पुत्र जसवंत ने कोतवाल मनोज कुमार शर्मा को बताया कि उसका अपनी पत्नी पुष्पा पुत्री मुन्नीलाल से विवाद हो गया था। विवाद के चलते भरण-पोषण का मामला अदालत में चल रहा है। 14 जनवरी को उसके साले राकेश निवासी जहांगीराबाद ने उसे समझौता करने के बहाने सुसराल बुलाया। वह अपनी बाइक पर गया था। साले ने उसकी बाइक और जेब में रखे दो हजार तीन सौ रुपये छीन लिए। एटा के गांव जिसका वो नाम नहीं जानता है, वहां एक नलकूप पर बंधक बनाकर डाल दिया।
उससे कहा जाता था कि जब तक वो उसे अपने परिवार वालों से 50 हजार रुपये नहीं दिला देता, तब तक उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उसे दिन में एक वक्त खाना दिया जाता था। 16 दिन लगातार वहां बंधक रहने के बाद 30 जनवरी को जब वह शराब के नशे में थे तो वो नलकूप से किसी तरह भाग आया। पैदल और वाहनों के माध्यम से वह कोतवाली तक आया है। राजेंद्र की बात सुनकर कोतवाल ने उसके घर पता किया तो मालूम हुआ कि वह 14 जनवरी से वास्तव में लापता था और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट चोला थाने में दर्ज हुई थी। कोतवाल ने उसके परिजनों को कोतवाली पर बुलाया है।
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बेचावली बुलंदशहर निवासी राजेंद्र प्रजापति पुत्र जसवंत ने कोतवाल मनोज कुमार शर्मा को बताया कि उसका अपनी पत्नी पुष्पा पुत्री मुन्नीलाल से विवाद हो गया था। विवाद के चलते भरण-पोषण का मामला अदालत में चल रहा है। 14 जनवरी को उसके साले राकेश निवासी जहांगीराबाद ने उसे समझौता करने के बहाने सुसराल बुलाया। वह अपनी बाइक पर गया था। साले ने उसकी बाइक और जेब में रखे दो हजार तीन सौ रुपये छीन लिए। एटा के गांव जिसका वो नाम नहीं जानता है, वहां एक नलकूप पर बंधक बनाकर डाल दिया।
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उससे कहा जाता था कि जब तक वो उसे अपने परिवार वालों से 50 हजार रुपये नहीं दिला देता, तब तक उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उसे दिन में एक वक्त खाना दिया जाता था। 16 दिन लगातार वहां बंधक रहने के बाद 30 जनवरी को जब वह शराब के नशे में थे तो वो नलकूप से किसी तरह भाग आया। पैदल और वाहनों के माध्यम से वह कोतवाली तक आया है। राजेंद्र की बात सुनकर कोतवाल ने उसके घर पता किया तो मालूम हुआ कि वह 14 जनवरी से वास्तव में लापता था और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट चोला थाने में दर्ज हुई थी। कोतवाल ने उसके परिजनों को कोतवाली पर बुलाया है।
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