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हत्या व बलवे में आठ दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हत्या और बलवे के आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इनको अर्थदंड भी देना होगा। मुरसान कस्बे में 17 साल पहले हुई की घटना में कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार भूप सिंह पुत्र मेवाराम निवासी मोहल्ला गड़रियान मुरसान ने थाना मुरसान में यह तहरीर देते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई कि एक अप्रैल 2002 को शाम सात बजे उसकी मां मोहरश्री के नौहरे से महावीर पुत्र मोहन लाल और बाबूलाल पुत्र मोहनलाल अवैध रूप से बिजली का तार डाल रहे थे।
भूप सिंह की मां ने जब उनसे मना किया तो अभियुक्त महावीर, बाबूलाल, वैजयंती, डालचंद्र, वीरबल, जस्सू, लेखराज, उदयवीर, राजवीर व दीपू निवासीगण मोहल्ला गड़रियान थाना मुरसान एकराय होकर लाठी डंडा आदि से लैस होकर घर में घुस आए। इन लोगों ने भूप सिंह के भाई गंगा प्रसाद के अलावा मोहरश्री पत्नी प्यारे लाल, गोपाल पुत्र मेवाराम, शिव सिंह पुत्र प्रसादी, हरचरन पुत्र प्यारेलाल, रामकुमार पुत्र गोपाल को बुरी तरह से मारापीटा शोर गुल की आवाज सुनकर गांव के कुछ लोग आ गए, जिन्होंने उन्हें बचाया।
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अभियुक्तों ने भूप सिंह के मामा थान सिंह के छप्पर में आग लगा दी और जाते समय जान से मारने की धमकी दे गए। जस्सू ने भागते समय जान से मारने की नीयत से फायर भी किए। भूप सिंह की यह रिपोर्ट विभिन्न धाराओं के तहत थाना मुरसान में दर्ज की गई। सभी घायलों का उपचार कराया गया। उपचार के दौरान आगरा में गंगा प्रसाद की मौत हो गई।
इस मामले की विवेचना पुलिस ने की और विवेचना के बाद विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों डालचंद्र और दीपू की मौत हो गई।
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र के न्यायालय में हुई। विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद महावीर, बाबूलाल, वैजयंती, वीरबल, जस्सू, लेखराज, उदयवीर और राजवीर को आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अनुराग शर्मा व एडीजीसी मुकेश कुमार ने पैरवी की।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हत्या और बलवे के आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इनको अर्थदंड भी देना होगा। मुरसान कस्बे में 17 साल पहले हुई की घटना में कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार भूप सिंह पुत्र मेवाराम निवासी मोहल्ला गड़रियान मुरसान ने थाना मुरसान में यह तहरीर देते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई कि एक अप्रैल 2002 को शाम सात बजे उसकी मां मोहरश्री के नौहरे से महावीर पुत्र मोहन लाल और बाबूलाल पुत्र मोहनलाल अवैध रूप से बिजली का तार डाल रहे थे।
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भूप सिंह की मां ने जब उनसे मना किया तो अभियुक्त महावीर, बाबूलाल, वैजयंती, डालचंद्र, वीरबल, जस्सू, लेखराज, उदयवीर, राजवीर व दीपू निवासीगण मोहल्ला गड़रियान थाना मुरसान एकराय होकर लाठी डंडा आदि से लैस होकर घर में घुस आए। इन लोगों ने भूप सिंह के भाई गंगा प्रसाद के अलावा मोहरश्री पत्नी प्यारे लाल, गोपाल पुत्र मेवाराम, शिव सिंह पुत्र प्रसादी, हरचरन पुत्र प्यारेलाल, रामकुमार पुत्र गोपाल को बुरी तरह से मारापीटा शोर गुल की आवाज सुनकर गांव के कुछ लोग आ गए, जिन्होंने उन्हें बचाया।
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अभियुक्तों ने भूप सिंह के मामा थान सिंह के छप्पर में आग लगा दी और जाते समय जान से मारने की धमकी दे गए। जस्सू ने भागते समय जान से मारने की नीयत से फायर भी किए। भूप सिंह की यह रिपोर्ट विभिन्न धाराओं के तहत थाना मुरसान में दर्ज की गई। सभी घायलों का उपचार कराया गया। उपचार के दौरान आगरा में गंगा प्रसाद की मौत हो गई।
इस मामले की विवेचना पुलिस ने की और विवेचना के बाद विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों डालचंद्र और दीपू की मौत हो गई।
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र के न्यायालय में हुई। विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद महावीर, बाबूलाल, वैजयंती, वीरबल, जस्सू, लेखराज, उदयवीर और राजवीर को आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी अनुराग शर्मा व एडीजीसी मुकेश कुमार ने पैरवी की।