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बांसों पर दौड़ रहा करंट
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:14 AM IST
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रुपये अभी तक व्यय किए जा चुके हैं, पर लोगों को अपने घरों तक आपूर्ति
पहुंचाने के लिए अभी भी बांस और बल्लियों का सहारा लेना पड़ता है। शहर के
तमाम मोहल्लों में अभी भी विद्युत खंभे नहीं लगे हैं और न ही लाइन बिछाई गई
है।
सीमित संसाधनों से जैसे तैसे लोगों ने अपने घरों तक केबिल पहुंचाई है, जिनसे हादसे का डर बना रहता है। बरसात के दिनों में यह हादसे का सबब भी बन जाते हैं। पावर कारपोरेशन ने लोगों की सुरक्षा और विद्युत चोरी पर लगाम लगाने को एरियर बंच कंडक्टर लाइन भी बिछाने के निर्देश दिए थे, लेकिन शहर में कुछ मोहल्लों में अभी भी एबीसी लाइन नहीं बिछी।
जिस वजह से जमीन और इमारतों से सटे तारों से लोग झटके खाने को मजबूर हैं। जर्जर विद्युत लाइन और उपकरण बदलने के लिए शासन ने आरएपीडीआरपी योजना संचालित की। योजना के अंतर्गत जनपद में हरदोई शहर समेत मल्लावां, संडीला व शाहाबाद के नगर क्षेत्र शामिल किया गया।
जिनमें लाइन बदलने, ट्रांसफार्मरों की स्थापना व कार्य क्षमता में वृद्धि और विद्युत पोलों की स्थापना कराई जानी थी। जिसके लिए शासन ने करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि भी दी। हरदोई शहर में योजना के अंतर्गत कार्य तो कराया गया, लेकिन कई मोहल्ले और स्थान अभी भी अछूते हैं।
उधर, बिजली विभाग ने शहर की विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था अब पूरी तरह प्राइवेट कर्मियों के भरोसे कर दी है, जो कार्यों को पूरा करने में सिर्फ खानापूरी करते हैं। इतना ही नहीं उपकेंद्र की जिम्मेदारी भी कुछ अनुभवहीन अवर अभियंता और बिजली कर्मचारियों को मिल गई है, जिससे लोकल फाल्ट तो बढ़े हैं, साथ ही विद्युत व्यवस्था भी लचर हुई है। फाल्ट होने के बाद दुरुस्त होने में घंटों का समय भी लग जाता है।
सीमित संसाधनों से जैसे तैसे लोगों ने अपने घरों तक केबिल पहुंचाई है, जिनसे हादसे का डर बना रहता है। बरसात के दिनों में यह हादसे का सबब भी बन जाते हैं। पावर कारपोरेशन ने लोगों की सुरक्षा और विद्युत चोरी पर लगाम लगाने को एरियर बंच कंडक्टर लाइन भी बिछाने के निर्देश दिए थे, लेकिन शहर में कुछ मोहल्लों में अभी भी एबीसी लाइन नहीं बिछी।
जिस वजह से जमीन और इमारतों से सटे तारों से लोग झटके खाने को मजबूर हैं। जर्जर विद्युत लाइन और उपकरण बदलने के लिए शासन ने आरएपीडीआरपी योजना संचालित की। योजना के अंतर्गत जनपद में हरदोई शहर समेत मल्लावां, संडीला व शाहाबाद के नगर क्षेत्र शामिल किया गया।
जिनमें लाइन बदलने, ट्रांसफार्मरों की स्थापना व कार्य क्षमता में वृद्धि और विद्युत पोलों की स्थापना कराई जानी थी। जिसके लिए शासन ने करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि भी दी। हरदोई शहर में योजना के अंतर्गत कार्य तो कराया गया, लेकिन कई मोहल्ले और स्थान अभी भी अछूते हैं।
उधर, बिजली विभाग ने शहर की विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था अब पूरी तरह प्राइवेट कर्मियों के भरोसे कर दी है, जो कार्यों को पूरा करने में सिर्फ खानापूरी करते हैं। इतना ही नहीं उपकेंद्र की जिम्मेदारी भी कुछ अनुभवहीन अवर अभियंता और बिजली कर्मचारियों को मिल गई है, जिससे लोकल फाल्ट तो बढ़े हैं, साथ ही विद्युत व्यवस्था भी लचर हुई है। फाल्ट होने के बाद दुरुस्त होने में घंटों का समय भी लग जाता है।