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Hardoi News: गैंगस्टर एक्ट के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। गैंगस्टर एक्ट के मामले में अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट) शैलेंद्र यादव ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। उसे जमानत पर छोड़े जाने से पुनः अपराध करने तथा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शाहाबाद कोतवाल अरविंद राय ने 26 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि कोतवाली शहर के रोशन नगर गांव निवासी राहुल वर्मा एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। इसका नेतृत्व रामलखन वर्मा करता है। गिरोह पर आर्थिक लाभ के लिए चोरी, नकबजनी समेत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप है। पुलिस ने गैंग चार्ट में राहुल वर्मा समेत कई लोगों को गिरोह का सक्रिय सदस्य दर्शाया है। विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय में कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आरोप पत्र भी दाखिल हो चुके हैं। पुलिस का दावा है कि गिरोह के आतंक के कारण आम लोग इनके खिलाफ गवाही देने से भी कतराते हैं।
आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह किसी गिरोह का सदस्य नहीं है। कहा कि जिन मूल मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है, उनमें आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गैंग चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट में आरोपी का नाम सक्रिय सदस्य के रूप में दर्ज हैं। उसके विरुद्ध दर्ज तीनों मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं। केवल मूल मुकदमों में जमानत मिल जाना गैंगस्टर एक्ट में राहत का आधार नहीं माना जा सकता। यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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शाहाबाद कोतवाल अरविंद राय ने 26 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि कोतवाली शहर के रोशन नगर गांव निवासी राहुल वर्मा एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। इसका नेतृत्व रामलखन वर्मा करता है। गिरोह पर आर्थिक लाभ के लिए चोरी, नकबजनी समेत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप है। पुलिस ने गैंग चार्ट में राहुल वर्मा समेत कई लोगों को गिरोह का सक्रिय सदस्य दर्शाया है। विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय में कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आरोप पत्र भी दाखिल हो चुके हैं। पुलिस का दावा है कि गिरोह के आतंक के कारण आम लोग इनके खिलाफ गवाही देने से भी कतराते हैं।
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आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह किसी गिरोह का सदस्य नहीं है। कहा कि जिन मूल मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है, उनमें आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गैंग चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट में आरोपी का नाम सक्रिय सदस्य के रूप में दर्ज हैं। उसके विरुद्ध दर्ज तीनों मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं। केवल मूल मुकदमों में जमानत मिल जाना गैंगस्टर एक्ट में राहत का आधार नहीं माना जा सकता। यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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