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Hindi News ›   India News ›   AI-Generated Fake PMO ID Card: What Was the Motive and What Did Police Tell the Court? Full Case Explained

एआई से बनाया पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: क्या था मकसद, पुलिस ने कोर्ट में क्या दावा किया? जानें पूरा मामला

Fri, 11 Sep 2026 08:15 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 11 Sep 2026 08:15 PM IST
सार

मुंबई के एक लग्जरी मॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से एक दिन पहले फर्जी पीएमओ पहचान पत्र के साथ पकड़े गए 24 वर्षीय रोहन पारिख को लेकर पुलिस ने कोर्ट में बड़ा दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, उसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए फर्जी पीएमओ दस्तावेज तैयार किए थे। उसके साथ मौजूद पूर्व सेना कर्मी दिलीप कुंडे से रिवॉल्वर भी मिली। फर्जी दस्तावेज क्यों बनाए गए और इनका इस्तेमाल कहां हुआ?

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AI-Generated Fake PMO ID Card: What Was the Motive and What Did Police Tell the Court? Full Case Explained
फर्जी पीएमओ के दस्तावेज - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से एक दिन पहले हुए मामले में पुलिस ने कोर्ट के सामने फर्जी पीएमओ दस्तावेज तैयार करने को लेकर बड़ा दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार 24 वर्षीय रोहन पारिख ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एक उपकरण चैटजीपीटी की मदद से फर्जी पीएमओ पहचान पत्र और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार किए थे। पुलिस ने कहा कि पारिख ने ये दस्तावेज वर्ष 2025 से तैयार करने की बात कबूल की है। उसका मकसद सामाजिक पहचान बढ़ाना और परिवार तथा सामाजिक दायरे में अपना आत्मविश्वास बढ़ाना था।
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क्या चैटजीपीटी की मदद से तैयार किए गए थे फर्जी पीएमओ दस्तावेज?

पुलिस ने कोर्ट में बताया कि पारिख के घर की तलाशी के दौरान पीएमओ से जुड़े कई फर्जी अंग्रेजी दस्तावेज मिले। पुलिस के अनुसार, उसके फोन के आंकड़ों की जांच में पीएमओ से जुड़े पत्र तैयार करने से संबंधित खोज इतिहास भी मिला। पुलिस ने दावा किया कि पारिख ने फर्जी पीएमओ पहचान पत्र और दूसरे आधिकारिक दस्तावेज चैटजीपीटी का इस्तेमाल करके तैयार किए थे। पुलिस ने यह भी कहा कि पारिख ने पूछताछ में वर्ष 2025 से ऐसा करने की बात कबूल की है। पुलिस आगे यह जांच करना चाहती थी कि इन फर्जी दस्तावेजों या पहचान पत्र का इस्तेमाल उसने किसी दूसरी जगह भी किया था या नहीं।
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मॉल में आखिर पूरा मामला कैसे सामने आया?

यह घटना 7 सितंबर को मुंबई के बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा मॉल में हुई थी। अगले दिन पास के नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में वैश्विक फिनटेक उत्सव 2026 के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम था। पारिख अपने साथी दिलीप कुंडे के साथ मॉल पहुंचा था। कुंडे के पास एक हथियार मिला। इसके बाद दोनों और मॉल के सुरक्षा कर्मचारियों के बीच बहस हुई। इसी दौरान पारिख ने कथित तौर पर खुद को पीएमओ का अधिकारी बताया। बाद में पारिख को फर्जी पीएमओ कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बाद में साफ किया कि यह घटना अगले दिन होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ी नहीं थी।
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रोहन पारिख के साथ पकड़े गए दिलीप कुंडे पर क्या आरोप है?

पुलिस ने बताया कि पारिख के साथ मौजूद दिलीप कुंडे पूर्व सेना कर्मी है और उसके पास से रिवॉल्वर बरामद हुई थी। पुलिस के मुताबिक, कुंडे ने स्वीकार किया कि उसके निजी इस्तेमाल के लिए रखा गया हथियार पारिख के लिए पेशेवर अंगरक्षक के रूप में व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। दोनों के पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डीएस खेडकर की अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने आगे हिरासत में पूछताछ की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

बचाव पक्ष ने पुलिस की आगे की हिरासत का विरोध क्यों किया?

दोनों आरोपियों की ओर से वकील सतीश मानेशिंदे ने कहा कि आरोपियों ने खुद दस्तावेज तैयार करने की बात स्वीकार की है और इसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे दस्तावेज पहले ही जब्त कर चुकी है। ऐसे में आरोपियों से अब और कुछ बरामद नहीं होना है। कोर्ट ने भी माना कि पुलिस की ओर से बताई गई वजह आगे की पुलिस हिरासत को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जमानत के लिए रोहन पारिख ने अपनी सेहत को लेकर क्या कहा?

  • न्यायिक हिरासत के बाद दोनों आरोपियों ने जमानत के लिए आवेदन किया। पारिख ने कहा कि वह मॉल में केवल निजी काम से गया था और उसे प्रधानमंत्री के आने या नए प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी नहीं थी। उसकी याचिका में घटना को ऐसा अपराध बताया गया जिसमें किसी व्यक्ति को नुकसान या चोट नहीं पहुंची। 
  • उसने कहा कि वह छात्र से पेशेवर जीवन में जाने के दौर में है और लंबे समय तक हिरासत में रहने से उसके मानसिक स्वास्थ्य और शुरुआती करियर पर असर पड़ सकता है। आवेदन में कहा गया कि वह समय से पहले पैदा हुआ था और जन्म से उसकी बाईं आंख की रोशनी कम है। 
  • वर्ष 2026 की शुरुआत में उसे गंभीर स्लिप डिस्क की चोट भी हुई, जिसके कारण उसकी आवाजाही सीमित है और उसे पूरी तरह बिस्तर पर आराम की जरूरत है। अभियोजन पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। दोनों की जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
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