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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Could there be a revolt in the BSP over Akash Anand? Meetings continue amid fears of a reversal.

यूपी: आकाश आनंद को लेकर क्या हो सकता है बसपा में विद्रोह?, उलटफेर की आशंका में होती रही बैठकें

Fri, 11 Sep 2026 09:04 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 11 Sep 2026 09:04 PM IST
सार

Akash Anand: बहुजन समाज पार्टी लगातार विवादों में बनी हुई है। आकाश आनंद को पार्टी से निकाले जाने के बाद मुख्यालय में गतिविधियां बनीं रहीं। 

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UP: Could there be a revolt in the BSP over Akash Anand? Meetings continue amid fears of a reversal.
आकाश आनंद को लेकर चल रही हैं अटकलें। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत हैं। राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद समेत कई पुराने निष्ठावान नेताओं की वापसी को लेकर शुक्रवार को पार्टी प्रदेश मुख्यालय में दिनभर मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मायावती कुछ बड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं। आकाश के समर्थक भी उनकी पार्टी में वापसी की मुहिम में जुटे हैं।

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मायावती ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि निष्कासन के बाद दूसरे दलों में जाने वाले नेताओं की वापसी नहीं होगी। हालांकि, निष्कासन के बावजूद पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखने और बहुजन समाज के हित में काम करने वालों की वापसी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। आकाश और अशोक सिद्धार्थ पर हुई कार्रवाई के पांच राज्यों के आगामी चुनावों पर असर को लेकर भी चर्चा हुई। उधर, ससुर के साथ पार्टी से अलग किए जाने के बाद आकाश ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने पांच दिन से मायावती की सोशल मीडिया पोस्ट रिपोस्ट नहीं की और कांग्रेस, निषाद पार्टी व सपा के प्रस्तावों पर भी प्रतिक्रिया नहीं दी। समर्थक उनकी वापसी के लिए सक्रिय हैं और कुछ ने इसके लिए रामजी गौतम को जिम्मेदार ठहराया है।

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आकाश के निष्कासन के बाद बसपा में निचले स्तर पर हलचल

UP: Could there be a revolt in the BSP over Akash Anand? Meetings continue amid fears of a reversal.
मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया है। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

 बसपा में शीर्ष स्तर पर चल रही उठापटक का असर अब निचले पायदान पर भी दिखाई देने लगा है। आकाश आनंद को बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद बसपा के पुराने नेताओं -कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है। इस बीच मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से बसपा के पूर्व प्रत्याशी रहे देववृत्त त्यागी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को भेजा है।

उधर, मेरठ में नाराज कई पुराने बसपाइयों के भी पार्टी छोड़ने की चर्चा है। देववृत्त त्यागी का कहना है कि आगामी विस चुनाव की तैयारियों के समय संगठन को मजबूत करने की बजाय लगातार फेरबदल किए जाने से कार्यकर्ताओं में असमंजस और अविश्वास की स्थिति पैदा हो रही है। उनका आरोप है कि पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ लोग ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जिससे संगठन कमजोर हो रहा है।

देववृत्त का कहना है कि विस चुनाव का बिगुल बजने के बाद बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति बनाने पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन, पार्टी में लगातार उठापटक चल रही है। आकाश आनंद को चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी से बाहर किया जाना उचित नहीं है। इससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा रहा है। देववृत्त के मुताबिक सिर्फ आकाश ही नहीं, बल्कि जिला अध्यक्ष, मंडल प्रभारी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक पदाधिकारियों में बार-बार बदलाव से संगठन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि मेरठ में कई पुराने बसपाई पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली से नाराज हैं और पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। जल्द ही उनके भी इस्तीफे भी सामने आ सकते हैं।

अशोक ने फैसला टलवाने के लिए अपनाए हथकंडे : मायावती

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अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद और मायावती - फोटो : अमर उजाला

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा टलवाने के लिए हथकंडे अपनाए। मायावती ने विपक्षी दलों द्वारा बसपा का नीला रंग अपनाने पर भी तंज कसा।

बसपा प्रमुख ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि बसपा की सलाह के बावजूद अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत संन्यास की घोषणा नहीं की। वह पूरी रात इसे रुकवाने की कोशिश करते रहे। कामयाबी न मिलने पर अगले दिन मजबूरी में ''किंतु-परंतु'' वाली घोषणा की। उन्होंने कहा कि अधिक देरी से बड़ा नुकसान हो सकता था। इस बारे में सही समय पर पार्टी के लोगों को और जानकारी दी जाएगी। मायावती ने बसपा से निष्कासित लोगों को स्वार्थी और अवसरवादी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग कई पार्टियां बदल चुके हैं। वे किसी भी पार्टी के हितैषी नहीं हो सकते।

विपक्षी दलों पर कसा तंज
मायावती ने सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियों पर भी तंज कसा। ये दल बसपा के पारंपरिक नीले रंग को गमछे, कपड़े और मंच में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदलेगी। ये दिल से आंबेडकरवादी नहीं हो सकते हैं। मायावती ने सपा के पीडीए के मामले में उनकी सोच, चाल, चरित्र और चेहरे को दोगला व बेईमान बताया।

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