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हेपेटाइटिस-सी से दो दिन में तीन की मौत
अमर उजाला, गढ़
Updated Fri, 11 Dec 2015 09:07 PM IST
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गढ़ और सिंभावली में दूषित पानी लोगों के लिए जानलेवा बना हुआ है। सिंभावली तहसील में दो दिनों में हेपेटाइटिस सी से पशु व्यापारी और दो महिलाओं की मौत हो गई। कई ग्रामीण हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं।
सिंभावली के रतूपुरा गांव में इज्जत अली की पत्नी हुस्न जहां (38), गंदूनंगला गांव में केहर सिंह की पत्नी तारादेवी (48) और गांव मुरादपुर में पशु व्यापारी इकरार खां (32) की मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार ये लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थे और इनके लीवर ने काम करना बंद कर दिया था। सिंभावली डिस्टलरी समेत स्याना के दूध प्लांटों का दूषित पानी गंगा समेत भूजल को दूषित कर रहा है।
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दूषित भूजल के कारण ही ग्रामीणों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ये पीलिया के शिकार हैं और इनके लीवर डैमेज हो रहे हैं।
दूषित भूजल के उपयोग से बहादुरगढ़ के गांव लहडरा में पिछले साल महज डेढ़ माह में चंद्रपाल, बालकृष्ण, जगत सिंह, करतारी, सुरेश, दलपत, रमेश, चंदकिरण, संजीव, मंगत सिंह की मौत हो गई थी। दर्जनों ग्रामीण बीमारी की चपेट में हैं। मेडिकल चेकअप में सभी लोग हेपेटाइटिस ए, बी और सी से पीड़ित पाए गए थे।
डॉ. पीके शुक्ला का कहना है कि हेपेटाइटिस सी में पीलिया, कमजोरी, जोड़ों में दर्द रहता है। ज्यादा हेपेटाइटिस बढ़ने मरीज का लीवर डैमेज हो जाता है या काम करना बंद कर देता है। जिसके बाद उसकी मौत हो जाती है।
पर्यावरणविद् प्रो. अब्बास अली का कहना है कि सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों से होकर गंगा में गिर रहे दूषित पानी में तेजाब होता है।
इस वेस्ट से भूजल में शीशा, कोबाल्ट और ऑर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है। इस पानी के सेवन से हेपेटाइटिस, पीलिया, लीवर में कैंसर और आंतों में गंभीर संक्रमण हो जाता है। प्रशासन को जानकारी के बाद भी प्रदूषण फैला रहीं फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
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सिंभावली के रतूपुरा गांव में इज्जत अली की पत्नी हुस्न जहां (38), गंदूनंगला गांव में केहर सिंह की पत्नी तारादेवी (48) और गांव मुरादपुर में पशु व्यापारी इकरार खां (32) की मौत हो गई।
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परिजनों के अनुसार ये लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थे और इनके लीवर ने काम करना बंद कर दिया था। सिंभावली डिस्टलरी समेत स्याना के दूध प्लांटों का दूषित पानी गंगा समेत भूजल को दूषित कर रहा है।
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दूषित भूजल के कारण ही ग्रामीणों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ये पीलिया के शिकार हैं और इनके लीवर डैमेज हो रहे हैं।
दूषित भूजल के उपयोग से बहादुरगढ़ के गांव लहडरा में पिछले साल महज डेढ़ माह में चंद्रपाल, बालकृष्ण, जगत सिंह, करतारी, सुरेश, दलपत, रमेश, चंदकिरण, संजीव, मंगत सिंह की मौत हो गई थी। दर्जनों ग्रामीण बीमारी की चपेट में हैं। मेडिकल चेकअप में सभी लोग हेपेटाइटिस ए, बी और सी से पीड़ित पाए गए थे।
डॉ. पीके शुक्ला का कहना है कि हेपेटाइटिस सी में पीलिया, कमजोरी, जोड़ों में दर्द रहता है। ज्यादा हेपेटाइटिस बढ़ने मरीज का लीवर डैमेज हो जाता है या काम करना बंद कर देता है। जिसके बाद उसकी मौत हो जाती है।
पर्यावरणविद् प्रो. अब्बास अली का कहना है कि सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों से होकर गंगा में गिर रहे दूषित पानी में तेजाब होता है।
इस वेस्ट से भूजल में शीशा, कोबाल्ट और ऑर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है। इस पानी के सेवन से हेपेटाइटिस, पीलिया, लीवर में कैंसर और आंतों में गंभीर संक्रमण हो जाता है। प्रशासन को जानकारी के बाद भी प्रदूषण फैला रहीं फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।