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संसद में उठेगा इंसेटिव मुद्दा
Hapur
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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अमर उजाला में खबर पढ़ने के बाद बोले सांसद, सीबीआई जांच जरूरी
हापुड़। भाजपा के क्षेत्रीय संासद राजेन्द्र अग्रवाल ने एफसीआई में इंसेटिव के नाम पर होने वाले भुगतान के खेल को संसद में रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ हापुड़ ही नहीं देश के अन्य डिपो में भी इंसेटिव के नाम पर अरबों के घालमेल की आशंका है। राष्ट्रहित में इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
अमर उजाला ने सात मई के अंक में एफसीआई के इंसेटिव को लेकर खबर प्रकाशित की थी। दरअसल एफसीआई के पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि उसके 98 लेबरों ने छह घंटे में 50 हजार बोरे तक उतार लिए जबकि उनकी अधिकतम क्षमता 18000 बोरे उठाने की ही है। ऐसा लेबरों की कमी की आड़ में पल्लेदारों से काम लेने के कारण हुआ। जबकि नियमानुसार बाहरी मजदूर एफसीआई में नहीं आ सकते। एफसीआई मजदूर निजी तौर पर पल्लेदारों से काम करवा कर अच्छा इंसेटिव हासिल कर लेते हैं जबकि वे बाहरी मजदूर को तीन से चार रुपये प्रति बोरा ही मजदूरी देते हैं। सांसद अग्रवाल ने कहा कि यह गंभीर मसला है। इसे संसद में उठाया जाएगा ताकि सीबीआई जांच कराई जा सके।
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हापुड़। भाजपा के क्षेत्रीय संासद राजेन्द्र अग्रवाल ने एफसीआई में इंसेटिव के नाम पर होने वाले भुगतान के खेल को संसद में रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ हापुड़ ही नहीं देश के अन्य डिपो में भी इंसेटिव के नाम पर अरबों के घालमेल की आशंका है। राष्ट्रहित में इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
अमर उजाला ने सात मई के अंक में एफसीआई के इंसेटिव को लेकर खबर प्रकाशित की थी। दरअसल एफसीआई के पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि उसके 98 लेबरों ने छह घंटे में 50 हजार बोरे तक उतार लिए जबकि उनकी अधिकतम क्षमता 18000 बोरे उठाने की ही है। ऐसा लेबरों की कमी की आड़ में पल्लेदारों से काम लेने के कारण हुआ। जबकि नियमानुसार बाहरी मजदूर एफसीआई में नहीं आ सकते। एफसीआई मजदूर निजी तौर पर पल्लेदारों से काम करवा कर अच्छा इंसेटिव हासिल कर लेते हैं जबकि वे बाहरी मजदूर को तीन से चार रुपये प्रति बोरा ही मजदूरी देते हैं। सांसद अग्रवाल ने कहा कि यह गंभीर मसला है। इसे संसद में उठाया जाएगा ताकि सीबीआई जांच कराई जा सके।
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