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6 घंटे तक दहशत में रहे हापुड़ के लाखों नागरिक
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:32 AM IST
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6 घंटे तक दहशत में रहे हापुड़ के लाखों नागरिक
हापुड़। वाह ! राजनीति, अपने ही शहर के अपने लोगों को ही एक दूसरे का दुश्मन बना दिया। नतीजा यह निकला कि 6 घंटे तक लाखों नागरिक दहशत के माहौल में रहे तथा अफवाहों को सुन-सुन कर कांपते रहे।
जिला प्रशासन भले ही यह दम भर रहा हो कि कम पुलिस बल के बावजूद बिना किसी जनहानि के स्थिति को कंट्रोल कर लिया। लेकिन अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके खुफिया तंत्र की विफलता के कारण इस शहर के कारोबारियों और दलित समाज के लोगों के बीच वर्षों से बने भरोसे में ऐसी दरार पड़ गयी है जिसे भरने में लंबा समय लगेगा।
सोमवार की सुबह आठ बजे तक हापुड़ शहर में लगभग सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। इतना जरूर था कि दलित समुदाय के लोग घरों से निकलकर अपने अधिकारों की मांग को लेकर आयोजित भारत बंद को सफल बनाने के लिए एकत्रित हो रहे थे। तभी अचानक नवीन मंडी के पास गढ़ रोड पर एक रोडवेज बस के शीशे तोड़ दिये गए और तहसील की ओर बढ़ती भीड़ ने आर्यनगर के बाहर पेट्रोल पंप तोड़फोड़ की।
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बताया जा रहा है कि यहीं से माहौल बिगड़ता गया। फिर जो कुछ हुआ, उसपर राजनीति हावी होती गई। नतीजा यह निकला कि अपने शहर में, हमेशा अपने रहे लोग एक दूसरे को क्षति पहुंचाने में अपनी बहादुरी दिखा रहे थे। कुछ स्थानों पर उपद्रवियों ने महिलाओं से भी अभद्रता की।
नतीजा यह था कि जगह जगह आगजनी पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं तेजी से फैल गईं। पुलिस बल नदारत नजर आने लगा और हालात बेकाबू होने लगे।
तीन लाख से अधिक आबादी के इस शहर में बेशक उपद्रव करने वाले दलित समाज के लोग रहे हों। लेकिन स्कूलों में पढ़ने तो उनके परिवारों के मासूम बच्चे भी गये होंगे। ऐसे में उन नौनिहालों की माताओं पर क्या बीच रही होगी, इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर 6 घंटे में हालात पर काबू तो पा लिया गया लेकिन इस दौरान लाखों लोगों को बेचैनी और दहशत में गुजारनी पड़ेगी।
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मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक रामकुमार ने कहा है कि कानून व्यवस्था से किसी को खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि उपद्रव करने में जिन लोगों के नाम सामने आयेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी। जहां दलित समाज के लोगों को उनके अधिकारों का सवाल है, उस पर उन्हें किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए क्योंकि सरकार ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी है।
उधर जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्यक्ष ने लोगों से अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोली लगने से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।
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हापुड़। वाह ! राजनीति, अपने ही शहर के अपने लोगों को ही एक दूसरे का दुश्मन बना दिया। नतीजा यह निकला कि 6 घंटे तक लाखों नागरिक दहशत के माहौल में रहे तथा अफवाहों को सुन-सुन कर कांपते रहे।
जिला प्रशासन भले ही यह दम भर रहा हो कि कम पुलिस बल के बावजूद बिना किसी जनहानि के स्थिति को कंट्रोल कर लिया। लेकिन अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके खुफिया तंत्र की विफलता के कारण इस शहर के कारोबारियों और दलित समाज के लोगों के बीच वर्षों से बने भरोसे में ऐसी दरार पड़ गयी है जिसे भरने में लंबा समय लगेगा।
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सोमवार की सुबह आठ बजे तक हापुड़ शहर में लगभग सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। इतना जरूर था कि दलित समुदाय के लोग घरों से निकलकर अपने अधिकारों की मांग को लेकर आयोजित भारत बंद को सफल बनाने के लिए एकत्रित हो रहे थे। तभी अचानक नवीन मंडी के पास गढ़ रोड पर एक रोडवेज बस के शीशे तोड़ दिये गए और तहसील की ओर बढ़ती भीड़ ने आर्यनगर के बाहर पेट्रोल पंप तोड़फोड़ की।
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बताया जा रहा है कि यहीं से माहौल बिगड़ता गया। फिर जो कुछ हुआ, उसपर राजनीति हावी होती गई। नतीजा यह निकला कि अपने शहर में, हमेशा अपने रहे लोग एक दूसरे को क्षति पहुंचाने में अपनी बहादुरी दिखा रहे थे। कुछ स्थानों पर उपद्रवियों ने महिलाओं से भी अभद्रता की।
नतीजा यह था कि जगह जगह आगजनी पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं तेजी से फैल गईं। पुलिस बल नदारत नजर आने लगा और हालात बेकाबू होने लगे।
तीन लाख से अधिक आबादी के इस शहर में बेशक उपद्रव करने वाले दलित समाज के लोग रहे हों। लेकिन स्कूलों में पढ़ने तो उनके परिवारों के मासूम बच्चे भी गये होंगे। ऐसे में उन नौनिहालों की माताओं पर क्या बीच रही होगी, इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर 6 घंटे में हालात पर काबू तो पा लिया गया लेकिन इस दौरान लाखों लोगों को बेचैनी और दहशत में गुजारनी पड़ेगी।
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मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक रामकुमार ने कहा है कि कानून व्यवस्था से किसी को खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि उपद्रव करने में जिन लोगों के नाम सामने आयेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी। जहां दलित समाज के लोगों को उनके अधिकारों का सवाल है, उस पर उन्हें किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए क्योंकि सरकार ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी है।
उधर जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्यक्ष ने लोगों से अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोली लगने से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।