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Hamirpur News: खुद मुक्ति को तरस रहा मोक्ष देने वाला धाम
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गहरौली (हमीरपुर)। कस्बे में श्मशान घाटों की दुर्दशा सरकारी उपेक्षा की पोल खोल रही है। मझाई तालाब किनारे बने एकमात्र मोक्षधाम की हालत भी बदतर है। कंटीली झाड़ियों से घिरा मोक्षधाम खुद अपनी मुक्ति का इंतजार कर रहा है। यहां बैठने तक के लिए जगह नहीं है। गांव के पांच चिह्नित स्थानों पर श्मशान घाट नहीं बने हैं।
मुस्करा विकास खंड के गहरौली गांव की आबादी करीब 20 हजार है। यहां मझाई तालाब किनारे एकमात्र मोक्षधाम बना है। यहां टिनशेड और चबूतरे के चारों ओर बड़ी-बड़ी कंटीली झाड़ियां और घास उग आई है। इसकी वजह से मोक्षधाम तक पहुंचना मुश्किल होता है। परिक्रमा स्थल कीचड़ और गंदगी से भरा है। वहीं तालाब के घाट टूटे पड़े हैं जिससे मिट्टी फैलती है और कीचड़ हो जाता है। सड़क से श्मशान घाट के लिए जाने वाली सीसी सड़क भी मोक्षधाम से 10 मीटर पहले ही अधूरी छोड़ दी गई। इस रास्ते पर भी कीचड़ बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए मझाई तालाब, ढलत तालाब, मुहाल, खरेला रोड स्थित ढीमर बस्ती सहित छह स्थल चिह्नित हैं। अभी तक पांच स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण नहीं कराया गया है। किसी की मृत्यु होने पर खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार मांग करने के बावजूद ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से चिह्नित स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण कराने की मांग की है। वहीं मुस्करा के पंचायत सहायक विकास अधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि मोक्षधामों को कार्य योजना में शामिल करके क्रमशः इनका निर्माण कराया जाएगा। साथ ही मझाई तालाब किनारे बने मोक्षधाम के आासपास कंटीली झाड़ियों की सफाई कराई जाएगी।
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मोक्षधाम में टिनशेड है लेकिन बैठने की जगह नहीं
फोटो 12 एचएएमपी 12- राजू तिवारी
गांव के राजू तिवारी ने बताया कि मझाई तालाब के मोक्षधाम में टिनशेड है लेकिन बैठने की जगह नहीं है। पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऊपर से हाईटेंशन लाइन निकली है जिससे खतरा बना रहता है। मोक्षधाम परिसर में झाड़ियों की सफाई भी नहीं कराई जा रही है।
फोटो 12 एचएएमपी 13- भूप सिंह राजपूत
गांव के भूप सिंह राजपूत ने बताया कि पांच स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण न होने पर खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में शव रखकर बारिश थमने का इंतजार किया जाता है। रास्ते में कीचड़ के चलते शव को लेकर पहुंचना भी कठिन होता है।
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मुस्करा विकास खंड के गहरौली गांव की आबादी करीब 20 हजार है। यहां मझाई तालाब किनारे एकमात्र मोक्षधाम बना है। यहां टिनशेड और चबूतरे के चारों ओर बड़ी-बड़ी कंटीली झाड़ियां और घास उग आई है। इसकी वजह से मोक्षधाम तक पहुंचना मुश्किल होता है। परिक्रमा स्थल कीचड़ और गंदगी से भरा है। वहीं तालाब के घाट टूटे पड़े हैं जिससे मिट्टी फैलती है और कीचड़ हो जाता है। सड़क से श्मशान घाट के लिए जाने वाली सीसी सड़क भी मोक्षधाम से 10 मीटर पहले ही अधूरी छोड़ दी गई। इस रास्ते पर भी कीचड़ बना रहता है।
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ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए मझाई तालाब, ढलत तालाब, मुहाल, खरेला रोड स्थित ढीमर बस्ती सहित छह स्थल चिह्नित हैं। अभी तक पांच स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण नहीं कराया गया है। किसी की मृत्यु होने पर खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार मांग करने के बावजूद ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से चिह्नित स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण कराने की मांग की है। वहीं मुस्करा के पंचायत सहायक विकास अधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि मोक्षधामों को कार्य योजना में शामिल करके क्रमशः इनका निर्माण कराया जाएगा। साथ ही मझाई तालाब किनारे बने मोक्षधाम के आासपास कंटीली झाड़ियों की सफाई कराई जाएगी।
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मोक्षधाम में टिनशेड है लेकिन बैठने की जगह नहीं
फोटो 12 एचएएमपी 12- राजू तिवारी
गांव के राजू तिवारी ने बताया कि मझाई तालाब के मोक्षधाम में टिनशेड है लेकिन बैठने की जगह नहीं है। पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऊपर से हाईटेंशन लाइन निकली है जिससे खतरा बना रहता है। मोक्षधाम परिसर में झाड़ियों की सफाई भी नहीं कराई जा रही है।
फोटो 12 एचएएमपी 13- भूप सिंह राजपूत
गांव के भूप सिंह राजपूत ने बताया कि पांच स्थानों पर मोक्षधाम का निर्माण न होने पर खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में शव रखकर बारिश थमने का इंतजार किया जाता है। रास्ते में कीचड़ के चलते शव को लेकर पहुंचना भी कठिन होता है।