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नामोनिशान खो चुकी सड़कें चलने लायक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Tue, 13 Jan 2015 12:45 AM IST
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जिले में हर गांव और मजरे को सड़क से जोड़ने का क ाफी कुछ काम हुआ है। अभी
भी तमाम गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
देखा जाए तो जनपद में कुल मिलाकर 1902 किमी लंबी सड़कों का निर्माण विभिन्न कार्यदाई संस्थाओं ने कराया है। जिले में 627 गांवों में से 497 आबाद है। फिलहाल सरकारी आंकड़ों के अनुसार 26 गांव अभी भी पक्की सड़क के लिए तरस रहे है। जिन गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है।
उनकी वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। ऐसे में तमाम गांवों की सड़कें नष्ट हो जाने पर आवागमन की समस्या पैदा हो रही है। कहीं रास्तों की पुलिया टूटने से वाहन नहीं गुजर पा रहे है तो कहीं सड़कों पर बने गड्ढ़े तालाब का रुप ले चुके है। फिलहाल बेतवा नदी के किनारे बसे गांवों की सड़क ों को मौरंग भरे ट्रकों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया है। साथ ही अन्य संपर्क मार्ग भी चलने लायक नहीं है।
कार्यदाई संस्थाएं इन सड़कों की मरम्मत तो करा रही है। लेकिन धरातल पर इनका काम नहीं दिख रहा है, होने वाला काम सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गया है।
देखा जाए तो जनपद में कुल मिलाकर 1902 किमी लंबी सड़कों का निर्माण विभिन्न कार्यदाई संस्थाओं ने कराया है। जिले में 627 गांवों में से 497 आबाद है। फिलहाल सरकारी आंकड़ों के अनुसार 26 गांव अभी भी पक्की सड़क के लिए तरस रहे है। जिन गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है।
उनकी वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। ऐसे में तमाम गांवों की सड़कें नष्ट हो जाने पर आवागमन की समस्या पैदा हो रही है। कहीं रास्तों की पुलिया टूटने से वाहन नहीं गुजर पा रहे है तो कहीं सड़कों पर बने गड्ढ़े तालाब का रुप ले चुके है। फिलहाल बेतवा नदी के किनारे बसे गांवों की सड़क ों को मौरंग भरे ट्रकों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया है। साथ ही अन्य संपर्क मार्ग भी चलने लायक नहीं है।
कार्यदाई संस्थाएं इन सड़कों की मरम्मत तो करा रही है। लेकिन धरातल पर इनका काम नहीं दिख रहा है, होने वाला काम सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गया है।