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मोर मोरनी नृत्य पर झूम उठे दर्शक
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Fri, 29 May 2015 12:17 AM IST
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ब्रह्मलीन संत ध्यानीदास महाराज की तपोस्थली में चल रहे विष्णु महायज्ञ में रात को आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वैष्णवी जागरण परिवार के कलाकारों ने मोर मोरनी के प्रेरणात्मक चरित्र से संबंधित गीत मोहे ऐसो बनाइए मोरना मैं नाचूं ता ता थइया पर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।
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महंत श्याम तिवारी ने मोर को एक कामहीन पवित्र पक्षी बताया, जो नृत्य के समय मुख से निकले श्वेत आंख से वंशावली बढ़ाता है। बताया कि मयूर की पवित्रता के कारण ही कृष्ण ने मोर मुकुट धारण किया।
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इसके बाद त्रिदेव नृत्य नाटिका ग्रुप के कलाकारों ने उज्जैन के महाकालेश्वर की भस्म आरती व कलकत्ता कालीघाट में होने वाले मसाने की होली का सजीव चित्रण किया तो रजत शर्मा व हिमांशु गुप्ता ने पूरे शरीर में मिट्टी का तेल डालने के बाद आग लगाकर नृत्य किया।
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उधर दिन में बनारस से आए आचार्यों ने वैदिक रीति रिवाज से महायज्ञ संपन्न कराया। आचार्य प.चंद्रभूषण ने भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान कृष्ण के दिव्य अवतार व अवतार वाद के रहस्य की मार्मिक व अध्यात्मिक विवेचना की।
संत सम्मेलन के चौथे दिन प्रभात ब्रह्मचारी के मधुर स्वर में गुरु महिमा का भजन सुन श्रोता मुग्ध हो गए।
आचार्य देवीप्रसाद ने मानव जीवन की सार्थकता पर प्रकाश डाला। संत सम्मेलन कार्यक्रम का संचालन जगदेवानंद महाराज ने किया। इस दौरान राजा निगम, प्रेमशंकर आनंद, अशोक सचान, रघुवीर आदि मौजूद रहे।