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Gonda News: साकीपुर व ब्यौंदा माझा में कटान से सहमे ग्रामीण

Sun, 07 Sep 2025 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 07 Sep 2025 12:00 AM IST
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Villagers are scared of erosion in Sakipur and Byonda Majha
नवाबगंज के गोकुला गांव में बाढ़ के पानी से ​घिरे घर से चारपाई लेकर जाता ग्रामीण। - संवाद
विश्नोहरपुर। सरयू नदी के जलस्तर में शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। धीरे-धीरे पानी घटने से क्षेत्र के कई गांव के लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन साकीपुर और ब्यौंदा माझा में कटान तेज हो गया है। खेतों के किनारे पानी टकराने से किसान सहमे हैं।
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साकीपुर चहलवा के रामदीन ने बताया कि पानी घटने के साथ सरयू की लहरें खेतों के पास टकरा रही हैं। बिचला माझा और ब्यौंदा माझा में धान और हरे चारे की फसलें पानी में डूबकर खराब हो रही हैं। कई खेतों में फसल अब सूखने लगी है। पशुपालन विभाग की ओर से समुचित टीकाकरण नहीं कराए जाने से पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति से लोगों में आक्रोश है। प्रभावित लोग मवेशियों के साथ सड़क किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं।
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गोकुला के हरीश शुक्ल ने कहा कि हरा चारा मिलना मुश्किल है। भूसा उपलब्ध होने से राहत मिलेगी। ढेमवा घाट पुल के पास पक्की सड़क पर तेज लहरें कटान कर रही हैं।
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ब्यौंदा माझा में नाव के साथ ही एक स्टीमर की व्यवस्था की गई है, लेकिन उस पर लाइफ जैकेट और रस्सी जैसी जरूरी सुरक्षा सामग्री नहीं है। यही हाल दत्तनगर के ढेमवा में चल रहे दो स्टीमरों का भी है। ग्रामीणों ने कहा कि गहरे पानी और तेज धारा में दुर्घटना की स्थिति में बिना सुरक्षा उपकरणों के बचना मुश्किल होगा।
बाढ़ प्रभावित इलाकों की हालत जस की तस
करनैलगंज। क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी हुई है। गांवों में पानी आना बंद हो गया है, लेकिन जो पानी भर गया था वह अब तक कम नहीं हुआ है। गांवों में संक्रामक रोग भी पांव पसारने लगे हैं। नदी के किनारे कटान शुरू होने से लोग दहशत में हैं। पानी में डूबकर बर्बाद हुई फसल को किसान जानवरों का चारा बना रहे हैं।
ग्राम नकहरा के सभी दस मजरे, चंदापुर किटौली के सात मजरे और पसका के तीन मजरे अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को समुचित सहायता उपलब्ध कराने का दावा किया है। लोग सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, खुजली, पैरों में सड़न और शरीर पर दाने निकलने की समस्या से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य टीम ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में दवाएं वितरित कीं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौम्या श्रीवास्तव ने बताया कि टीमें लगातार गांवों का भ्रमण कर रही हैं। स्वास्थ्य शिविर भी चालू है। उधर ग्राम बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा और घरकुइयां के सामने कटान तेज हो गया है। आज भी सैकड़ों बीघा जमीन नदी में समाहित हो गई।
करनैलगंज एसडीएम जितेंद्र गौतम ने बताया कि बाढ़ की स्थिति सामान्य हो रही है। पानी और डिस्चार्ज दोनों घट रहे हैं। पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य टीमों को अलर्ट किया गया है।


बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिले लंच पैकेट
विश्नोहरपुर। बाढ़ प्रभावित ब्यौंदा माझा में तीन दिन से बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट दिए जा रहे थे। शनिवार को इस व्यवस्था पर विराम लग गया। ठेकेदार बृजकिशोर ने बताया कि तहसील प्रशासन ने लंच पैकेट वितरित करने के लिए हल्का लेखपाल को जिम्मेदारी सौंपी है। उनके कहने पर वह कारीगरों से लंच पैकेट तैयार कराते हैं। जिन कारीगरों को लगाया है, भुगतान न मिलने के कारण वह शनिवार को लंच पैकेट बनाने नहीं आए। भोजन बनाने के लिए आलू उबाले गए, तभी गैस खत्म हो गई। सिलिंडर रिफिल कराने के भी पैसे नहीं बचे हैं। इस वजह से लंच पैकेट नहीं बनवाए जा सके। (संवाद)
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