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Gonda News: जीपीएफ भुगतान में गड़बड़ी, पांच अफसरों से जवाब तलब
Sun, 20 Sep 2026 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 20 Sep 2026 12:34 AM IST
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गोंडा। स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों से भुगतान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), प्रयागराज की ऑडिट रिपोर्ट में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कर्मचारियों के खातों में उपलब्ध राशि से अधिक जीपीएफ एडवांस का भुगतान कर दिया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला कुष्ठ अधिकारी समेत पांच अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सीएचसी खरगूपुर में तैनात श्यामलाल गौतम के जीपीएफ खाते में अप्रैल 2026 तक सिर्फ 36,877 रुपये शेष थे। इसके बावजूद मई 2026 में उनके खाते से 4.50 लाख रुपये का जीपीएफ एडवांस भुगतान कर दिया गया। सीएचसी मुजेहना में तैनात शारदानंद पांडेय के जीपीएफ खाते में मार्च 2026 तक 1,78,314 रुपये जमा थे। इसके बावजूद अप्रैल 2026 में उन्हें दो लाख रुपये का एडवांस स्वीकृत कर दिया गया। ऑडिट में भुगतान से पहले खाते में उपलब्ध राशि और अभिलेखों के सत्यापन पर सवाल उठाया गया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की क्लोजिंग रिपोर्ट के अनुसार श्याम नारायण वर्मा, राजेश कुमार पांडेय, सुशील कुमार श्रीवास्तव, राघवेंद्र प्रताप सिंह, प्रदीप कुमार चौधरी और मुक्तनाथ के जीपीएफ खाते ऋणात्मक यानी माइनस बैलेंस में चल रहे हैं। इन खातों में माइनस बैलेंस होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी, इसे लेकर भी ऑडिट में आपत्ति दर्ज की गई है।
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इसके आधार पर सीएमओ ने जिला कुष्ठ अधिकारी समेत नवाबगंज, इटियाथोक, मनकापुर और छपिया के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। जिन कर्मचारियों के खाते माइनस में हैं, उनके तत्काल आहरण पर रोक लगाने के साथ ही पहले किए गए अतिरिक्त भुगतान की समीक्षा करने को कहा गया है। अधिक भुगतान की पुष्टि होने पर संबंधित राशि की वसूली और खातों में समायोजन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पासबुक और वार्षिक लेखा पर्ची से सत्यापन जरूरी
मामला सामने आने के बाद अब व्यवस्था में बदलाव किया गया है। निर्देश दिया गया है कि जीपीएफ से किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले कर्मचारी की जीपीएफ पासबुक और महालेखाकार कार्यालय की वार्षिक लेखा पर्ची का मिलान कर सत्यापन किया जाए। बिना सत्यापन के भुगतान नहीं करने की हिदायत दी गई है।
जवाब के बाद तय होगी जिम्मेदारी
सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों के जवाब और अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि भुगतान किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में स्वीकृत किए गए। ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए विभागीय स्तर पर अभिलेखों की जांच भी की जा रही है।
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सीएचसी खरगूपुर में तैनात श्यामलाल गौतम के जीपीएफ खाते में अप्रैल 2026 तक सिर्फ 36,877 रुपये शेष थे। इसके बावजूद मई 2026 में उनके खाते से 4.50 लाख रुपये का जीपीएफ एडवांस भुगतान कर दिया गया। सीएचसी मुजेहना में तैनात शारदानंद पांडेय के जीपीएफ खाते में मार्च 2026 तक 1,78,314 रुपये जमा थे। इसके बावजूद अप्रैल 2026 में उन्हें दो लाख रुपये का एडवांस स्वीकृत कर दिया गया। ऑडिट में भुगतान से पहले खाते में उपलब्ध राशि और अभिलेखों के सत्यापन पर सवाल उठाया गया है।
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वित्तीय वर्ष 2025-26 की क्लोजिंग रिपोर्ट के अनुसार श्याम नारायण वर्मा, राजेश कुमार पांडेय, सुशील कुमार श्रीवास्तव, राघवेंद्र प्रताप सिंह, प्रदीप कुमार चौधरी और मुक्तनाथ के जीपीएफ खाते ऋणात्मक यानी माइनस बैलेंस में चल रहे हैं। इन खातों में माइनस बैलेंस होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी, इसे लेकर भी ऑडिट में आपत्ति दर्ज की गई है।
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इसके आधार पर सीएमओ ने जिला कुष्ठ अधिकारी समेत नवाबगंज, इटियाथोक, मनकापुर और छपिया के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। जिन कर्मचारियों के खाते माइनस में हैं, उनके तत्काल आहरण पर रोक लगाने के साथ ही पहले किए गए अतिरिक्त भुगतान की समीक्षा करने को कहा गया है। अधिक भुगतान की पुष्टि होने पर संबंधित राशि की वसूली और खातों में समायोजन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पासबुक और वार्षिक लेखा पर्ची से सत्यापन जरूरी
मामला सामने आने के बाद अब व्यवस्था में बदलाव किया गया है। निर्देश दिया गया है कि जीपीएफ से किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले कर्मचारी की जीपीएफ पासबुक और महालेखाकार कार्यालय की वार्षिक लेखा पर्ची का मिलान कर सत्यापन किया जाए। बिना सत्यापन के भुगतान नहीं करने की हिदायत दी गई है।
जवाब के बाद तय होगी जिम्मेदारी
सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों के जवाब और अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि भुगतान किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में स्वीकृत किए गए। ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए विभागीय स्तर पर अभिलेखों की जांच भी की जा रही है।