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Gonda News: नियम विरुद्ध समूह का पैसा कार कंपनी और निजी खातों में भेजा
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रुपईडीह/गोंडा। रुपईडीह ब्लॉक मिशन मैनेजर और बैंक के अधिकारियों ने मिलीभगत कर समूह के पैसे को नियम के विरुद्ध कार कंपनी और निजी खातों में भुगतान किया। इसकी पुष्टि जांच कमेटी ने बैंकों से वाउचर मिलने के बाद की है। आरोप है कि बड़े पैमाने पर समूह के पैसे का बंदरबांट किया गया है। जांच पूरी होने के बाद कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को छोटे-छोटे काम करने के लिए पैसे दिए गए थे। मगर इन समूह के खाते में पैसा न भेजकर सीधे कार की कंपनी के खाते में भुगतान किया गया। समूह के पैसे से कार खरीदी गई। बैंक से वाउचर मिलने के बाद अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
नियम विरुद्ध समूह के पैसे को चेक के जरिये भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, सभी को नियमानुसार पैसा देने के बजाय खास समूहों पर मेहरबानी दिखाई गई। कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को आगे किया गया। जिन समूहों को पैसे दिए गए, अधिकतर ने कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि पैसे से जमीन तो किसी ने गाड़ी तक खरीद ली। आरोप है कि सरकारी धन की निगरानी के लिए लगाए गए ब्लॉक के लेकर जिला तक के अधिकारी सिर्फ निजी लाभ की तलाश करते रहे। शिकायतों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की। कुछ अच्छा काम कर रहीं समूहों को आगे कर घोटाले किया गया।
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सीडीओ अंकिता जैन ने शिकायत के बाद जांच कराई तो घोटाले की परत खुल सकी। खरगूपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपियों के रसूख के आगे खरगूपुर पुलिस भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए प्रयासरत रही, फिर उच्चाधिकारियों की फटकार के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की जांच कर रहे डीडीओ सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वाउचर मिलने के बाद लगभग जांच पूरी हो चुकी है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
...तब उपलब्ध कराया घोटाले का वाउचर
30 सितंबर को जांच अधिकारियों ने संबंधित बैंकों से भुगतान का वाउचर मांगा था। मगर करीब 15 दिन बीतने के बावजूद भी बैंकों ने वाउचर नहीं उपलब्ध कराया। 19 अक्तूबर को अमर उजाला में खबर प्रकाशित की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि बैंक ने वाउचर उपलब्ध करा दिया। इसके बाद जांच आगे बढ़ सकी।
ग्राम्य विकास आयुक्त के निर्देश पर हो रही जांच
अधिकारियों ने बताया कि सीडीओ अंकिता जैन के निर्देश पर समूहों के रकम की बंदरबांट मामले में बीडीओ अभय सिंह ने ब्लॉक मिशन मैनेजर कुलदीप तिवारी व समूहों के खिलाफ खरगूपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद शासन स्तर के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने पूरे ब्लॉक के समूहों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात कही जा रही है। इस मामले में एक और एफआईआर दर्ज हो सकती है।
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राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को छोटे-छोटे काम करने के लिए पैसे दिए गए थे। मगर इन समूह के खाते में पैसा न भेजकर सीधे कार की कंपनी के खाते में भुगतान किया गया। समूह के पैसे से कार खरीदी गई। बैंक से वाउचर मिलने के बाद अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
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नियम विरुद्ध समूह के पैसे को चेक के जरिये भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, सभी को नियमानुसार पैसा देने के बजाय खास समूहों पर मेहरबानी दिखाई गई। कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को आगे किया गया। जिन समूहों को पैसे दिए गए, अधिकतर ने कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि पैसे से जमीन तो किसी ने गाड़ी तक खरीद ली। आरोप है कि सरकारी धन की निगरानी के लिए लगाए गए ब्लॉक के लेकर जिला तक के अधिकारी सिर्फ निजी लाभ की तलाश करते रहे। शिकायतों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की। कुछ अच्छा काम कर रहीं समूहों को आगे कर घोटाले किया गया।
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सीडीओ अंकिता जैन ने शिकायत के बाद जांच कराई तो घोटाले की परत खुल सकी। खरगूपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपियों के रसूख के आगे खरगूपुर पुलिस भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए प्रयासरत रही, फिर उच्चाधिकारियों की फटकार के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की जांच कर रहे डीडीओ सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वाउचर मिलने के बाद लगभग जांच पूरी हो चुकी है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
...तब उपलब्ध कराया घोटाले का वाउचर
30 सितंबर को जांच अधिकारियों ने संबंधित बैंकों से भुगतान का वाउचर मांगा था। मगर करीब 15 दिन बीतने के बावजूद भी बैंकों ने वाउचर नहीं उपलब्ध कराया। 19 अक्तूबर को अमर उजाला में खबर प्रकाशित की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि बैंक ने वाउचर उपलब्ध करा दिया। इसके बाद जांच आगे बढ़ सकी।
ग्राम्य विकास आयुक्त के निर्देश पर हो रही जांच
अधिकारियों ने बताया कि सीडीओ अंकिता जैन के निर्देश पर समूहों के रकम की बंदरबांट मामले में बीडीओ अभय सिंह ने ब्लॉक मिशन मैनेजर कुलदीप तिवारी व समूहों के खिलाफ खरगूपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद शासन स्तर के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने पूरे ब्लॉक के समूहों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात कही जा रही है। इस मामले में एक और एफआईआर दर्ज हो सकती है।