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Gonda News: बैराजों के पानी से सरयू में फिर उफान
Thu, 17 Sep 2026 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:03 AM IST
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तुलसीपुर के बलुहा में ढेमवा मार्ग पर प्राथमिक विद्यालय के सामने भरा पानी। -संवाद
विश्नोहरपुर/उमरी बेगमगंज। बैराजों से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण बुधवार सुबह से सरयू नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। एल्गिन ब्रिज पर नदी लाल निशान से केवल पांच सेमी नीचे प्रवाहित हो रही है।
जिला आपदा प्रबंधक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को गिरिजा बैराज से एक लाख 28 हजार क्यूसेक, शारदा से एक लाख 35 हजार क्यूसेक और सुहेली बैराज से 31 हजार क्यूसेक तथा सरयू बैराज से करीब छह हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है। बढ़ते जलस्तर से माझा क्षेत्र के ग्रामीण एक बार फिर चिंतित हो गए हैं।
व्योंदा, दत्तनगर, साकीपुर, गोकुला आदि गांवों में करीब 10 दिन बाद पानी घटने से लोगों ने राहत महसूस की थी। अब पुनः जलस्तर बढ़ने से उन्हें फिर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दत्तनगर निवासी चंदी यादव ने बताया कि जब तक बरसात रहती है, यही स्थिति बनी रहती है। करीब तीन महीने तक घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच जान सांसत में रहती है। अरुण सिंह ने बताया कि उनका मजरा चारों तरफ से पानी से घिर जाता है। साकीपुर के चहलवा मजरे के नन्हे ने बताया कि पानी घटने पर जो लोग मवेशियों के साथ लौट आए थे, उन्हें फिर सुरक्षित ठिकाना तलाशना पड़ सकता है। बाढ़ का दर्द झेल रहे लगभग आधा दर्जन गांवों के लोगों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
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व्योंदा माझा के मजरों के किनारे अब भी पानी भरा है। हरे चारे के लिए लोगों को दूर जाना पड़ रहा है। खेतों में फसलें बर्बाद हो रही हैं। दिनेश यादव ने बताया कि सड़क कटने के बाद पानी भरने से रास्तों पर चलना बहुत जोखिम भरा होगा। एसडीएम तरबगंज प्रदीप कुमार का कहना है कि तहसील की टीमें पूरी तरह से बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर रख रही हैं। बाढ़ चौकियां सतर्क हैं।
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जिला आपदा प्रबंधक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को गिरिजा बैराज से एक लाख 28 हजार क्यूसेक, शारदा से एक लाख 35 हजार क्यूसेक और सुहेली बैराज से 31 हजार क्यूसेक तथा सरयू बैराज से करीब छह हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है। बढ़ते जलस्तर से माझा क्षेत्र के ग्रामीण एक बार फिर चिंतित हो गए हैं।
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व्योंदा, दत्तनगर, साकीपुर, गोकुला आदि गांवों में करीब 10 दिन बाद पानी घटने से लोगों ने राहत महसूस की थी। अब पुनः जलस्तर बढ़ने से उन्हें फिर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दत्तनगर निवासी चंदी यादव ने बताया कि जब तक बरसात रहती है, यही स्थिति बनी रहती है। करीब तीन महीने तक घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच जान सांसत में रहती है। अरुण सिंह ने बताया कि उनका मजरा चारों तरफ से पानी से घिर जाता है। साकीपुर के चहलवा मजरे के नन्हे ने बताया कि पानी घटने पर जो लोग मवेशियों के साथ लौट आए थे, उन्हें फिर सुरक्षित ठिकाना तलाशना पड़ सकता है। बाढ़ का दर्द झेल रहे लगभग आधा दर्जन गांवों के लोगों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
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व्योंदा माझा के मजरों के किनारे अब भी पानी भरा है। हरे चारे के लिए लोगों को दूर जाना पड़ रहा है। खेतों में फसलें बर्बाद हो रही हैं। दिनेश यादव ने बताया कि सड़क कटने के बाद पानी भरने से रास्तों पर चलना बहुत जोखिम भरा होगा। एसडीएम तरबगंज प्रदीप कुमार का कहना है कि तहसील की टीमें पूरी तरह से बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर रख रही हैं। बाढ़ चौकियां सतर्क हैं।