{"_id":"68fbc04039d5df4d2d09539b","slug":"newborn-died-in-front-of-sncu-after-not-being-admitted-gonda-news-c-100-1-slko1028-145963-2025-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: नहीं किया गया भर्ती, एसएनसीयू के सामने नवजात की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: नहीं किया गया भर्ती, एसएनसीयू के सामने नवजात की मौत
Fri, 24 Oct 2025 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 24 Oct 2025 11:36 PM IST
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल में बनी एसएनसीयू। - संवाद
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू (सिक न्यू केयर यूनिट) में नवजात को भर्ती कराने के लिए बृहस्पतिवार शाम 04:30 बजे पहुंचे मनकापुर के विनोद कुमार व उनकी बहन उर्मिला शाम 07:48 बजे तक भटकते रहे। अफसरों से फोन कराया। पैरवी की। हाथ जोड़े और गिड़गिड़ाए, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। नतीजतन, इलाज न मिलने के कारण नवजात ने एसएनसीयू के सामने ही अपनी बुआ की गोद में दम तोड़ दिया। परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर पांच हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। कहा कि रकम नहीं देने पर नवजात को भर्ती नहीं किया गया। पीड़ित ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। सीएमओ ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
मनकापुर के झलियारानी गांव निवासी विनोद कुमार ने डीएम को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि बृहस्पतिवार को प्रसव पीड़ा होने पर अपनी भाभी गुड़िया देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई तो चिकित्सक ने रेफर कर दिया। वह एंबुलेंस से नवजात को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। यहां स्टाफ नर्स ने भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने चिकित्सक से भर्ती कराने को कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विनोद के साथी सपा नेता लालचंद गौतम ने सीएमएस को फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद सीएमएस ने स्टाफ को फोन करके नवजात को भर्ती करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद स्टाफ नर्स ने नवजात को भर्ती नहीं किया, बल्कि पांच हजार रुपये की मांग की गई। विनोद का कहना है कि वह रकम का इंतजाम करने लगे। इसी बीच नवजात की मौत हो गई। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन
एसएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. दयाल का कहना है कि एसएनसीयू में 18 बेड ही हैं। एक भी बेड खाली नहीं है। इस वजह से नवजातों को भर्ती करने में समस्या आ रही है। वहीं, जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. अमित त्रिपाठी का कहना है कि मामले की जानकारी है। नवजात की हालत गंभीर थी। उसे लखनऊ रेफर किया गया था। समझाने के बाद भी घरवाले नहीं ले गए। इसी वजह से नवजात की मौत हो गई। रुपये मांगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। फुटेज की जांच कराएंगे। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी नवजातों की मौत
- 25 सितंबर को बड़गांव के सतईपुरवा निवासी मोहित कुमार ने भी इलाज में लापरवाही के चलते नवजात की मौत होने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि जिला महिला अस्पताल में पत्नी का प्रसव कराया था। चिकित्सक ने चेक करने के बाद बताया था कि नवजात ने गंदा पानी पी लिया है। वह नवजात को लेकर निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने हजारों रुपये का बिल थमा दिया था। मामले की शिकायत डीएम से की गई थी।
- 10 सितंबर को कटरा बाजार के कोटिया मदारा निवासी विनय सिंह की पत्नी किरन का प्रसव सीएचसी में हुआ था। नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल भेजा गया। 11 सितंबर की शाम को नवजात की मौत हो गई थी। इस मामले की भी शिकायत की गई थी।
विज्ञापन
मनकापुर के झलियारानी गांव निवासी विनोद कुमार ने डीएम को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि बृहस्पतिवार को प्रसव पीड़ा होने पर अपनी भाभी गुड़िया देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई तो चिकित्सक ने रेफर कर दिया। वह एंबुलेंस से नवजात को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। यहां स्टाफ नर्स ने भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने चिकित्सक से भर्ती कराने को कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
विनोद के साथी सपा नेता लालचंद गौतम ने सीएमएस को फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद सीएमएस ने स्टाफ को फोन करके नवजात को भर्ती करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद स्टाफ नर्स ने नवजात को भर्ती नहीं किया, बल्कि पांच हजार रुपये की मांग की गई। विनोद का कहना है कि वह रकम का इंतजाम करने लगे। इसी बीच नवजात की मौत हो गई। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन
एसएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. दयाल का कहना है कि एसएनसीयू में 18 बेड ही हैं। एक भी बेड खाली नहीं है। इस वजह से नवजातों को भर्ती करने में समस्या आ रही है। वहीं, जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. अमित त्रिपाठी का कहना है कि मामले की जानकारी है। नवजात की हालत गंभीर थी। उसे लखनऊ रेफर किया गया था। समझाने के बाद भी घरवाले नहीं ले गए। इसी वजह से नवजात की मौत हो गई। रुपये मांगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। फुटेज की जांच कराएंगे। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी नवजातों की मौत
- 25 सितंबर को बड़गांव के सतईपुरवा निवासी मोहित कुमार ने भी इलाज में लापरवाही के चलते नवजात की मौत होने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि जिला महिला अस्पताल में पत्नी का प्रसव कराया था। चिकित्सक ने चेक करने के बाद बताया था कि नवजात ने गंदा पानी पी लिया है। वह नवजात को लेकर निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने हजारों रुपये का बिल थमा दिया था। मामले की शिकायत डीएम से की गई थी।
- 10 सितंबर को कटरा बाजार के कोटिया मदारा निवासी विनय सिंह की पत्नी किरन का प्रसव सीएचसी में हुआ था। नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल भेजा गया। 11 सितंबर की शाम को नवजात की मौत हो गई थी। इस मामले की भी शिकायत की गई थी।