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'साझा जीवन, सहनशीलता की मिसाल': इस्राइली राष्ट्रपति ने की अहमदिया मुसलमानों की तारीफ; भारतीय राजदूत क्या बोले?
Sat, 19 Sep 2026 11:05 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, हाइफा।
पीटीआई, हाइफा।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:05 AM IST
सार
इस्राइली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अहमदिया मुसलमानों को ‘साझा जीवन और सहनशीलता’ की मिसाल बताया। हाइफा में हुए जलसा सालाना में मदीना के संविधान से लेकर यहूदी-मुस्लिम संवाद तक पर चर्चा हुई। भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने भी अहमदिया समुदाय को लेकर क्या कहा? पढ़िए रिपोर्ट
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इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अहमदिया मुसलमानों की सराहना की। उन्होंने उन्हें 'साथ मिलकर जीवन जीने, सहनशीलता और सम्मान' का उदाहरण बताया। हर्जोग ने यह बात हाइफा में अहमदिया समुदाय के वार्षिक सम्मेलन में कही। इस सम्मेलन में अलग-अलग समुदायों के धर्मगुरू शामिल हुए। इसमें शिक्षाविद और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग भी मौजूद थे।
जलसा सालाना में क्या चर्चा हुई?
अहमदिया समुदाय का 29वां वार्षिक सम्मेलन इस सप्ताह हाइफा में हुआ। इसे 'जलसा सालाना' कहा जाता है। इस सम्मेलन में मदीना के ऐतिहासिक संविधान पर चर्चा हुई। इसमें चर्चा की गई कि यह संविधान आज साझा नागरिकता के बारे में क्या सीख दे सकता है। अलग-अलग समुदायों के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई। आपसी जिम्मेदारी पर भी विचार किया गया। शांति बनाने में धर्म की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद रहे?
हर्जोग ने गुरुवार को सम्मेलन में हिस्सा लिया। उनके साथ हाइफा के मेयर योना याहव भी थे। सम्मेलन में धर्मगुरू, शिक्षाविद और इस्राइली संसद यानी नेसेट के सदस्य भी शामिल हुए। हाइफा के पूर्व मेयर भी मौजूद थे। प्रमुख सांस्कृतिक और सामाजिक हस्तियां भी सम्मेलन में आईं। राजनयिक भी इसमें शामिल हुए। इनमें भारतीय राजदूत जेपी सिंह भी मौजूद थे। कई अन्य देशों से आए मेहमानों ने भी इस अहम सम्मेलन में हिस्सा लिया।
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इस्राइली राष्ट्रपति ने क्या कहा?
इस्राइली राष्ट्रपति ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्यक्रम के बारे में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि अगर दुनिया के ज्यादा लोग इस सभा को देख पाते और इस्राइली समाज का यह चेहरा भी जान पाते, तो अच्छा होता।
हर्जोग ने अहमदिया समुदाय के नेता अमीर मुहम्मद शरीफ ओदेह का भी धन्यवाद किया। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए उनका आभार जताया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए हर्जोग ने अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच बातचीत की अहमियत पर जोर दिया।
अहमदिया समुदाय की तारीफ की
उन्होंने अहमदिया मुस्लिम समुदाय के शांति और सहनशीलता के विचारों की तारीफ की। उन्होंने यहूदी और मुस्लिम लोगों के बीच बातचीत बढ़ाने में समुदाय के योगदान की भी सराहना की। पश्चिम एशिया में यहूदी और मुस्लिम लोगों के बीच बातचीत का जिक्र करते हुए हर्जोग ने कहा कि अहमदिया समुदाय सम्मान और हिम्मत के साथ बातचीत का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत मतभेदों को स्वीकार करती है। साथ ही, यह लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करती है।
भारतीय मूल के ईकान अहमद शम्स भी शामिल हुए
भारतीय मूल के ईकान अहमद शम्स भी सम्मेलन में शामिल हुए। उनके पिता शम्सुद्दीन दो दशक से ज्यादा समय पहले भारत से इस्राइल आए थे। वह समुदाय के इमाम हैं। ईकान अहमद शम्स ने सम्मेलन में एक व्याख्यान दिया। इसका शीर्षक था- 'साझा नागरिकता के मॉडल के रूप में मदीना का संविधान – ऐतिहासिक और समकालीन नजरिया'।
उन्होंने मदीना के संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि आज अलग-अलग समुदायों के बीच संबंधों को समझने में इसके किन सिद्धांतों से सीख ली जा सकती है। शम्स ने पीटीआई से बातचीत में अहमदिया समुदाय की भारतीय जड़ों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसका मूल पंजाब से जुड़ा है।
ये भी पढ़ें: एच-1बी वीजा: ट्रंप प्रशासन ने 1 लाख डॉलर शुल्क एक साल बढ़ाया, जांच भी सख्त; भारतीयों पर क्या होगा असर?
उन्होंने कहा कि अहमदिया समुदाय करीब एक सदी से इस्राइल में मौजूद है। शम्स के मुताबिक, यह समुदाय छोटा है। इसमें केवल कुछ हजार लोग हैं। इसके बावजूद हाइफा के बहुसांस्कृतिक माहौल में इसे पूरी तरह स्वीकार किया जाता है। शम्स का जन्म भी भारत में हुआ था। उनका परिवार तब इस्राइल चला गया था, जब वह सिर्फ एक साल के थे।
राजदूत जेपी सिंह ने क्या कहा?
सम्मेलन में भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने कहा कि अहमदिया समुदाय के दिल में भारत की खास जगह है। सिंह ने अहमदिया समुदाय के नारे का भी जिक्र किया। यह नारा है- सबसे प्यार, किसी से नफरत नहीं। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत हमारी सामूहिक सोच और नजरिये का हिस्सा बनने के लायक है।
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जलसा सालाना में क्या चर्चा हुई?
अहमदिया समुदाय का 29वां वार्षिक सम्मेलन इस सप्ताह हाइफा में हुआ। इसे 'जलसा सालाना' कहा जाता है। इस सम्मेलन में मदीना के ऐतिहासिक संविधान पर चर्चा हुई। इसमें चर्चा की गई कि यह संविधान आज साझा नागरिकता के बारे में क्या सीख दे सकता है। अलग-अलग समुदायों के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई। आपसी जिम्मेदारी पर भी विचार किया गया। शांति बनाने में धर्म की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
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कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद रहे?
हर्जोग ने गुरुवार को सम्मेलन में हिस्सा लिया। उनके साथ हाइफा के मेयर योना याहव भी थे। सम्मेलन में धर्मगुरू, शिक्षाविद और इस्राइली संसद यानी नेसेट के सदस्य भी शामिल हुए। हाइफा के पूर्व मेयर भी मौजूद थे। प्रमुख सांस्कृतिक और सामाजिक हस्तियां भी सम्मेलन में आईं। राजनयिक भी इसमें शामिल हुए। इनमें भारतीय राजदूत जेपी सिंह भी मौजूद थे। कई अन्य देशों से आए मेहमानों ने भी इस अहम सम्मेलन में हिस्सा लिया।
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इस्राइली राष्ट्रपति ने क्या कहा?
इस्राइली राष्ट्रपति ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्यक्रम के बारे में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि अगर दुनिया के ज्यादा लोग इस सभा को देख पाते और इस्राइली समाज का यह चेहरा भी जान पाते, तो अच्छा होता।
हर्जोग ने अहमदिया समुदाय के नेता अमीर मुहम्मद शरीफ ओदेह का भी धन्यवाद किया। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए उनका आभार जताया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए हर्जोग ने अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच बातचीत की अहमियत पर जोर दिया।
अहमदिया समुदाय की तारीफ की
उन्होंने अहमदिया मुस्लिम समुदाय के शांति और सहनशीलता के विचारों की तारीफ की। उन्होंने यहूदी और मुस्लिम लोगों के बीच बातचीत बढ़ाने में समुदाय के योगदान की भी सराहना की। पश्चिम एशिया में यहूदी और मुस्लिम लोगों के बीच बातचीत का जिक्र करते हुए हर्जोग ने कहा कि अहमदिया समुदाय सम्मान और हिम्मत के साथ बातचीत का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत मतभेदों को स्वीकार करती है। साथ ही, यह लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करती है।
भारतीय मूल के ईकान अहमद शम्स भी शामिल हुए
भारतीय मूल के ईकान अहमद शम्स भी सम्मेलन में शामिल हुए। उनके पिता शम्सुद्दीन दो दशक से ज्यादा समय पहले भारत से इस्राइल आए थे। वह समुदाय के इमाम हैं। ईकान अहमद शम्स ने सम्मेलन में एक व्याख्यान दिया। इसका शीर्षक था- 'साझा नागरिकता के मॉडल के रूप में मदीना का संविधान – ऐतिहासिक और समकालीन नजरिया'।
उन्होंने मदीना के संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि आज अलग-अलग समुदायों के बीच संबंधों को समझने में इसके किन सिद्धांतों से सीख ली जा सकती है। शम्स ने पीटीआई से बातचीत में अहमदिया समुदाय की भारतीय जड़ों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसका मूल पंजाब से जुड़ा है।
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उन्होंने कहा कि अहमदिया समुदाय करीब एक सदी से इस्राइल में मौजूद है। शम्स के मुताबिक, यह समुदाय छोटा है। इसमें केवल कुछ हजार लोग हैं। इसके बावजूद हाइफा के बहुसांस्कृतिक माहौल में इसे पूरी तरह स्वीकार किया जाता है। शम्स का जन्म भी भारत में हुआ था। उनका परिवार तब इस्राइल चला गया था, जब वह सिर्फ एक साल के थे।
राजदूत जेपी सिंह ने क्या कहा?
सम्मेलन में भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने कहा कि अहमदिया समुदाय के दिल में भारत की खास जगह है। सिंह ने अहमदिया समुदाय के नारे का भी जिक्र किया। यह नारा है- सबसे प्यार, किसी से नफरत नहीं। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत हमारी सामूहिक सोच और नजरिये का हिस्सा बनने के लायक है।