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Gonda News: हमेशा ‘नक्षत्रबली’ साबित हुए गोंडा की सियासत के महाबली
Wed, 25 Jan 2023 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 25 Jan 2023 12:29 AM IST
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गोंडा। 36 सालों से अपना रसूख बनाए रखने वाले बृजभूषण शरण सिंह को बाहुबली के साथ ही ‘नक्षत्रबली’ भी माना जाता है। इनके ग्रह-नक्षत्र अनुकूल ही रहते हैं। सामान्य किसान परिवार में जन्मे बृजभूषण अपनी तरुणाई के बाद से ही राजयोग चक्र में हैं। काबुल के घोड़ों से लेकर हेलीकॉप्टर तक की सवारी करते हैं।
वर्ष 1988 में गन्ना डायरेक्टर का चुनाव लड़कर अपने सियासी सफर की शुरुआत करने वाले बृजभूषण को हार का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उनका दबदबा बढ़ता गया। उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 1979 में का. सु. साकेत महाविद्यालय अयोध्या से वह छात्रसंघ के महामंत्री निर्वाचित हुए। वर्ष 1987 में गन्ना समिति का चुनाव लड़ा।
वर्ष 1989 में भाजपा के टिकट पर उन्होंने एमएलसी का चुनाव लड़ा, लेकिन इनमें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 1991 में अपने राजनीतिक गुरु कांग्रेस के तत्कालीन दिग्गज नेता राजा मनकापुर आनंद सिंह को एक लाख से अधिक वोटों से शिकस्त देकर पहली बार सांसद बने। वर्ष 1996 में जेल में रहते हुए अपनी पत्नी केतकी सिंह को भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जिताने में कामयाब रहे।
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1998 में इन्हें कीर्तिवर्धन सिंह से शिकस्त का सामना करना पड़ा। 1999 में गोंडा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर फिर सांसद चुने गए। उसके बाद वर्ष 2004 में रिजवान जहीर को शिकस्त देकर बलरामपुर लोकसभा से एमपी चुने गए। वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चौथी बार कैसरगंज लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2011 में भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उसके बाद वर्ष 2014 व 2019 में कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए।
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फिल्मी है लाइफ स्टाइल
सांसद बृजभूषण शरण सिंह की लाइफ स्टाइल किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं है। नवाबगंज के विश्नोहरपुर स्थित इनका आलीशान किलेनुमा कोठी किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। अंदर ही दो हेलीपैड है। कोठी के अंदर ही एक बड़ा सा सफेद रंग का अस्तबल है। जहां काबुल के अन्य अच्छे नस्ल के घोड़े उनकी बादशाहत में चार चांद लगाते हैं। घोड़ों को गुड़ व चना खिलाकर वह अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हैं और तीन-चार राउंड घुड़सवारी करते हैं।
कई महंगी गाड़ियां
पॉलिटिक्स के किंग बृजभूषण शरण सिंह के काफिले में दर्जनों महंगी गाड़ियों की कतारें होती है। लैंडक्रूजर, इंडीवर, फॉर्च्यूनर सहित वैनिटीवैन टाइप की लक्जरी गाड़ियां उनके काफिले की शान बढ़ाती हैं। इनके सुरक्षाकर्मी भी फॉर्च्यूनर जैसी महंगी गाड़ियों की सवारी करते हैं। कभी काले तो कभी नीले रंग के हेलीकाप्टर से कार्यक्रमों में दस्तक देते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र की यात्रा के दौरान प्राइवेट जेट में देखे गए।
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वर्ष 1988 में गन्ना डायरेक्टर का चुनाव लड़कर अपने सियासी सफर की शुरुआत करने वाले बृजभूषण को हार का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उनका दबदबा बढ़ता गया। उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 1979 में का. सु. साकेत महाविद्यालय अयोध्या से वह छात्रसंघ के महामंत्री निर्वाचित हुए। वर्ष 1987 में गन्ना समिति का चुनाव लड़ा।
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वर्ष 1989 में भाजपा के टिकट पर उन्होंने एमएलसी का चुनाव लड़ा, लेकिन इनमें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 1991 में अपने राजनीतिक गुरु कांग्रेस के तत्कालीन दिग्गज नेता राजा मनकापुर आनंद सिंह को एक लाख से अधिक वोटों से शिकस्त देकर पहली बार सांसद बने। वर्ष 1996 में जेल में रहते हुए अपनी पत्नी केतकी सिंह को भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जिताने में कामयाब रहे।
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1998 में इन्हें कीर्तिवर्धन सिंह से शिकस्त का सामना करना पड़ा। 1999 में गोंडा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर फिर सांसद चुने गए। उसके बाद वर्ष 2004 में रिजवान जहीर को शिकस्त देकर बलरामपुर लोकसभा से एमपी चुने गए। वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चौथी बार कैसरगंज लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2011 में भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उसके बाद वर्ष 2014 व 2019 में कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए।
फिल्मी है लाइफ स्टाइल
सांसद बृजभूषण शरण सिंह की लाइफ स्टाइल किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं है। नवाबगंज के विश्नोहरपुर स्थित इनका आलीशान किलेनुमा कोठी किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। अंदर ही दो हेलीपैड है। कोठी के अंदर ही एक बड़ा सा सफेद रंग का अस्तबल है। जहां काबुल के अन्य अच्छे नस्ल के घोड़े उनकी बादशाहत में चार चांद लगाते हैं। घोड़ों को गुड़ व चना खिलाकर वह अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हैं और तीन-चार राउंड घुड़सवारी करते हैं।
कई महंगी गाड़ियां
पॉलिटिक्स के किंग बृजभूषण शरण सिंह के काफिले में दर्जनों महंगी गाड़ियों की कतारें होती है। लैंडक्रूजर, इंडीवर, फॉर्च्यूनर सहित वैनिटीवैन टाइप की लक्जरी गाड़ियां उनके काफिले की शान बढ़ाती हैं। इनके सुरक्षाकर्मी भी फॉर्च्यूनर जैसी महंगी गाड़ियों की सवारी करते हैं। कभी काले तो कभी नीले रंग के हेलीकाप्टर से कार्यक्रमों में दस्तक देते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र की यात्रा के दौरान प्राइवेट जेट में देखे गए।