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Gonda News: सपा हारकर भी शांत, भाजपा में बदला माहौल
Mon, 15 May 2023 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 15 May 2023 11:40 PM IST
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गोंडा। निकाय चुनाव में इस बार सपा को साल 2017 से कम सीटें मिलीं हैं। उस समय सात सीटों में चार पर सपा ने जीत दर्ज की थी। इस बार दस निकाय होने के बाद भी सपा तीन ही सीट पर सिमट गई। इसके बावजूद हर निकाय में पिछले बार की तुलना में सपा को मत अधिक मिले हैं। वहीं, पार्टी में रार नहीं ठनी है, जबकि भाजपा ने छह सीटें तो जीत लीं मगर आपसी विवाद से माहौल बिगड़ा हुआ है।
पिछले चुनाव में जिन सात निकायों में मतदान हुआ, इस बार उनके मतों के अंतर से स्पष्ट है कि सपा और भाजपा के मतदाता बढ़े ही हैं। इससे तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों के मध्य ही चुनावी संघर्ष होगा। वहीं, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी किसी भी सीट पर ठीक से चुनाव ही नहीं लड़ सके। उन्हें मतदाताओं ने सिरे खारिज कर दिया है। भाजपा को सबसे अधिक झटका अयोध्या से सटे निकाय नवाबगंज में लगा। यहां पिछली बार के मुकाबले भाजपा को 3,411 मत कम मिले हैं, जबकि सपा के वोटों में इतना ज्यादा अंतर नहीं है। सपा को पिछले चुनाव के मुकाबले 410 मत ही कम मिले हैं। यह अलग बात है कि नवाबगंज में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की जमानत तक नहीं बच पाई, कारण मुकाबला निर्दल उम्मीदवारों में ही सिमटा रहा।
निकाय निर्वाचन में भाजपा को अपनों से दूरी से भी झटका लगा है। स्थिति यह है कि एक-दूसरे को पार्टी में कमजोर करने की सियासत भी तेज हो गई है। पार्टी ने निकाय चुनाव के दौरान ही 16 बागियों को निष्कासित किया था। मतगणना के बाद आरोप प्रत्यारोप के दौर तेज हो गए हैं। शहर में पार्टी प्रत्याशी की हार के बाद तो लोग एक-दूसरे पर आरोप मढ़ ही रहे हैं, मतगणना के पहले ही सिर फुटौव्वल की स्थिति बन गई थी। वहीं, करनैलगंज और कटरा बाजार में सपा के बागियों ने चुनाव में ताल तो ठोकी मगर पार्टी नेताओं में रार नहीं ठनी है। इस तरह आपस में बढ़ी दूरियां भी आने वाले चुनाव में गुल खिला सकती हैं।
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पिछले चुनाव में जिन सात निकायों में मतदान हुआ, इस बार उनके मतों के अंतर से स्पष्ट है कि सपा और भाजपा के मतदाता बढ़े ही हैं। इससे तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों के मध्य ही चुनावी संघर्ष होगा। वहीं, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी किसी भी सीट पर ठीक से चुनाव ही नहीं लड़ सके। उन्हें मतदाताओं ने सिरे खारिज कर दिया है। भाजपा को सबसे अधिक झटका अयोध्या से सटे निकाय नवाबगंज में लगा। यहां पिछली बार के मुकाबले भाजपा को 3,411 मत कम मिले हैं, जबकि सपा के वोटों में इतना ज्यादा अंतर नहीं है। सपा को पिछले चुनाव के मुकाबले 410 मत ही कम मिले हैं। यह अलग बात है कि नवाबगंज में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की जमानत तक नहीं बच पाई, कारण मुकाबला निर्दल उम्मीदवारों में ही सिमटा रहा।
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निकाय निर्वाचन में भाजपा को अपनों से दूरी से भी झटका लगा है। स्थिति यह है कि एक-दूसरे को पार्टी में कमजोर करने की सियासत भी तेज हो गई है। पार्टी ने निकाय चुनाव के दौरान ही 16 बागियों को निष्कासित किया था। मतगणना के बाद आरोप प्रत्यारोप के दौर तेज हो गए हैं। शहर में पार्टी प्रत्याशी की हार के बाद तो लोग एक-दूसरे पर आरोप मढ़ ही रहे हैं, मतगणना के पहले ही सिर फुटौव्वल की स्थिति बन गई थी। वहीं, करनैलगंज और कटरा बाजार में सपा के बागियों ने चुनाव में ताल तो ठोकी मगर पार्टी नेताओं में रार नहीं ठनी है। इस तरह आपस में बढ़ी दूरियां भी आने वाले चुनाव में गुल खिला सकती हैं।
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