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सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसानों में बढ़ा आक्रोश

Fri, 19 Feb 2021 10:28 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2021 10:28 PM IST
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Anger among farmers due to negligence of irrigation department
गोंडा। नहर खोदाई के लिए भूमि अधिग्रहण के 10 साल बाद बैनामा कराने से किसानों में आक्रोश है और उन्होंने वर्तमान बाजार के दर पर मुआवजे की मांग कर आंदोलन शुरू किया। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही की रिपोर्ट में सिंचाई विभाग की लापरवाही उजागर हुई है।
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उन्होंने अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को पूरी रिपोर्ट भेज कर परसा गोड़री की वर्तमान स्थिति बताई है और मार्गदर्शन मांगा है। अभी किसानों को पूरी तरह मुआवजे की राशि का भी भुगतान नहीं हो सका है।
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सरयू नहर खंड प्रथम ने साल 2008 में करनैलगंज के परसा गोड़री गांव में 1.249 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। गजट के बाद किसानों को 8 जनवरी 2010 को सुनवाई के लिए बुलाया गया।
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किसानों से सुनवाई के बाद 2 जुलाई 2010 को अधिग्रहण भूमि का मुआवजा 12 लाख 25 हजार 838 तय किया गया। किसानों को नोटिस दी गई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक कोई किसान मुआवजा लेने नहीं आया।
जिलाधिकारी का दावा है कि भुगतान के लिए तय धनराशि उपलब्ध है और किसान ले सकते हैं। इसके बाद में सरयू नहर की ओर से अन्य भूमि का बैनामा कराया गया। यह किसानों की सहमति से किया गया। बताया जा रहा है कि साल 2010 से ही नहरों की खोदाई शुरू की जाती तो वर्तमान में विरोध नहीं होता है।
सरयू नहर की ओर से वर्ष 2018 व 2019 में क्रय की गई भूमि का बैनामा बाजार मूल्य पर किया गया। जिससे परसा गोड़री में किसान आंदोलन कर रहे हैं और वह भी बाजार मूल्य की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अगर बाजार मूल्य पर परसा गोड़री के किसानों को वर्तमान में भुगतान किया जाता है तो अन्य गांव सालपुर धौताल, धनखर और धानीपुर गांव के किसान भी मांग कर सकते हैं।
ऐसे में भुगतान के लिए शासन से मार्ग दर्शन मांगा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अभी किसानों की ओर से प्रतिकर धनराशि नही ली गई है। उन्होंने पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए भुगतान के लिए मार्गदर्शन मांगा है। वैसे रिपोर्ट से सिंचाई विभाग की लापरवाही सामने आई है। वहीं किसानों की मांग को मजबूती मिला है।
इसी नहर की खोदाई में 56 लाख का घपला भी हुआ था। वर्ष 2005-06 में नहर खोदाई नहीं कराई गई और विभाग के अधिकारी व ठेकेदारों ने मिलकर 56 लाख का भुगतान करा लिया था। इस मामले में शासन की सख्ती पर तत्कालीन सहायक अभियंता केएन उपाध्याय सहित चार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी और तीन गुना एक करोड़ 58 लाख की रिकवरी का आदेश हुआ था।
परसा गोंडरी शिवशंकर पुरवा में किसान पिछले 107 दिनों से खेत में ही धरनेपर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि जिस समय अधिग्रहण किया गया उन किसानों की मृत्यु हो चुकी है और जमीन का बैनामा भी नहीं हो पाया है।

अब उस जमीन के मालिक उनके परिजन हैं। ऐसे में अब नए सर्किल रेट पर भुगतान होना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि नए सर्किल रेट पर भुगतान करने पर अधिग्रहण के समय उन सभी किसानों को नए सर्किल रेट पर भुगतान करना पड़ेगा। ऐसे में यह संभव नहीं है।
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