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शिकायत किया तो आक्सीजन लगे मरीज को जमीन पर लिटाया
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गोंडा। जिला अस्पताल में मरीजों की देखभाल के लिए व्यवस्था नही सुधर रहा है। बीते रविवार को जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने निरीक्षण में सुधार की हिदायत दी थी। साफ-सफाई में लापरवाही पर चेतावनी दी थी।
इसके बाद भी अस्पताल के जिम्मेदार गंभीर नहीं हुए। बुधवार को एक मरीज को बेड से उतार कर जमीन पर लिटा दिया गया। उसकी खता सिर्फ इतनी थी कि मरीज ने गंदगी की शिकायत की थी। इसी बात से खफा स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज की अनदेखी करते हुए उसे जमीन पर लिटा दिया।
जिम्मेदार अधिकारी भी मरीजों का दुख दर्द देखने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। मरीजों की मानें तो डॉक्टर व ड्यूटी पर तैनात नर्स अपने कक्ष से बाहर निकलने की हिमायत नहीं करते। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज वार्ड ब्वाय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिम्मे कर दिया जाता है।
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अस्पताल कर्मचारियों के बेरुखी का उदाहरण बुधवार दोपहर में देखने को मिला। जिला अस्पताल में मेडिकल वार्ड के बगल बने आयुष्मान वार्ड के बाहर एक मरीज मुंह में आक्सीजन लगाए जमीन पर लेटा दिखाई पड़ा। गंभीर हालात में पड़े मरीज की कोई सुध खबर लेने वाला नहीं था।
परिजनों से पूछने पर पता चला कि मरीज का नाम वंशीधर पांडेय है, जो रुपईडीह के मल्लापुर के रहने वाले हैं। हृदयरोग से पीड़ित वंशीधर पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से आयुष्मान वार्ड में भर्ती हैं। परिजनों की माने तो उन्होंने अस्पताल के कर्मचारी से वार्ड में गंदगी की शिकायत की तो उसने मरीज को बाहर जाने को कहा। इसके बाद मरीज को मुंह में ऑक्सीजन की पाइप लगाए वार्ड के बाहर लिटा दिया गया, लेकिन कई घंटो तक अस्पताल प्रशासन को इसकी खबर नहीं हुई।
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जमीनी हकीकत जानने के लिए अधिकारी औचक निरीक्षण की बात करते हैं। लेकिन निरीक्षण के घंटों पहले अस्पताल से जुड़े सभी अधिकारी कर्मचारियों को निरीक्षण की सूचना हो जाती है। जिससे आनन-फानन में व्यवस्थाओं में सुधार कर लिया जाता है। नतीजन इस माह में दो बड़े अधिकारियों के घंटों निरीक्षण के बावजूद जिला अस्पताल में कोई खास अव्यवस्था दिखाई नहीं पड़ी।
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इसके बाद भी अस्पताल के जिम्मेदार गंभीर नहीं हुए। बुधवार को एक मरीज को बेड से उतार कर जमीन पर लिटा दिया गया। उसकी खता सिर्फ इतनी थी कि मरीज ने गंदगी की शिकायत की थी। इसी बात से खफा स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज की अनदेखी करते हुए उसे जमीन पर लिटा दिया।
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जिम्मेदार अधिकारी भी मरीजों का दुख दर्द देखने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। मरीजों की मानें तो डॉक्टर व ड्यूटी पर तैनात नर्स अपने कक्ष से बाहर निकलने की हिमायत नहीं करते। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज वार्ड ब्वाय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिम्मे कर दिया जाता है।
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अस्पताल कर्मचारियों के बेरुखी का उदाहरण बुधवार दोपहर में देखने को मिला। जिला अस्पताल में मेडिकल वार्ड के बगल बने आयुष्मान वार्ड के बाहर एक मरीज मुंह में आक्सीजन लगाए जमीन पर लेटा दिखाई पड़ा। गंभीर हालात में पड़े मरीज की कोई सुध खबर लेने वाला नहीं था।
परिजनों से पूछने पर पता चला कि मरीज का नाम वंशीधर पांडेय है, जो रुपईडीह के मल्लापुर के रहने वाले हैं। हृदयरोग से पीड़ित वंशीधर पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से आयुष्मान वार्ड में भर्ती हैं। परिजनों की माने तो उन्होंने अस्पताल के कर्मचारी से वार्ड में गंदगी की शिकायत की तो उसने मरीज को बाहर जाने को कहा। इसके बाद मरीज को मुंह में ऑक्सीजन की पाइप लगाए वार्ड के बाहर लिटा दिया गया, लेकिन कई घंटो तक अस्पताल प्रशासन को इसकी खबर नहीं हुई।
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जमीनी हकीकत जानने के लिए अधिकारी औचक निरीक्षण की बात करते हैं। लेकिन निरीक्षण के घंटों पहले अस्पताल से जुड़े सभी अधिकारी कर्मचारियों को निरीक्षण की सूचना हो जाती है। जिससे आनन-फानन में व्यवस्थाओं में सुधार कर लिया जाता है। नतीजन इस माह में दो बड़े अधिकारियों के घंटों निरीक्षण के बावजूद जिला अस्पताल में कोई खास अव्यवस्था दिखाई नहीं पड़ी।