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राप्ती नदी में कटी 92 बीघा जमीन
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:18 PM IST
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नदी का जलस्तर घटने के साथ ही तटवर्ती गांवों के निकट कटान तेज हो गई। कटान के कारण गंगाबक्श भागड़, चौका कलां और चेतरापुरवा गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों के किसानों की खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो रही है।
अब तक किसानों की 92 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। प्राथमिक विद्यालय चौकाकला भी नदी की कटान की जद में है। नदी तेजी से कटान करते हुए स्कूल की तरफ बढ़ रही है। इन गांवों को कटान से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई उपाय नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने गांवों को नदी की विनाशलीला से बचाने के लिए गुहार लगाई है। सोमवार को चौकाकला निवासी अलखराम ने बताया कि उनकी 10 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है।
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इसी तरह गांव के घनश्याम पांडेय की आठ बीघा संतराम की 10 बीघा, तिलकराम यादव की पांच बीघा, कृपा व रामधीरज की चार-चार बीघा, दयले, पिन्ने, हरिद्वार, रक्षाराम व बरसाती की भी पांच-पांच बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। गंगाबक्श भागड़ गांव में नंदलाल की 24 बीघा तथा काशीराम की सात बीघा जमीन नदी में विलीन हो गई है।
इसी गांव के मनीराम, धनीराम, रामकेवल का खेत भी नदी के कटान की जद में है। चेतरापुरवा के राज कुमार तिवारी, महादेव व रामदेव के खेती की जमीन भी राप्ती नदी की कटान की जद में है। यही हाल रहा तो गांव के कई लोगों के आशियाने भी नदी में विलीन हो जाएंगे।
गांवों को नदी की कटान से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इन लोगों ने शासन-प्रशासन से गांव को कटान से बचाने की गुहार लगाई है।
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अब तक किसानों की 92 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। प्राथमिक विद्यालय चौकाकला भी नदी की कटान की जद में है। नदी तेजी से कटान करते हुए स्कूल की तरफ बढ़ रही है। इन गांवों को कटान से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई उपाय नहीं किया गया है।
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ग्रामीणों ने गांवों को नदी की विनाशलीला से बचाने के लिए गुहार लगाई है। सोमवार को चौकाकला निवासी अलखराम ने बताया कि उनकी 10 बीघा जमीन नदी में विलीन हो चुकी है।
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इसी तरह गांव के घनश्याम पांडेय की आठ बीघा संतराम की 10 बीघा, तिलकराम यादव की पांच बीघा, कृपा व रामधीरज की चार-चार बीघा, दयले, पिन्ने, हरिद्वार, रक्षाराम व बरसाती की भी पांच-पांच बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। गंगाबक्श भागड़ गांव में नंदलाल की 24 बीघा तथा काशीराम की सात बीघा जमीन नदी में विलीन हो गई है।
इसी गांव के मनीराम, धनीराम, रामकेवल का खेत भी नदी के कटान की जद में है। चेतरापुरवा के राज कुमार तिवारी, महादेव व रामदेव के खेती की जमीन भी राप्ती नदी की कटान की जद में है। यही हाल रहा तो गांव के कई लोगों के आशियाने भी नदी में विलीन हो जाएंगे।
गांवों को नदी की कटान से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इन लोगों ने शासन-प्रशासन से गांव को कटान से बचाने की गुहार लगाई है।